Saturday , 7 November 2026

UP Crime News: कालपी बार एसोसिएशन अध्यक्ष गयादीन अहिरवार हत्याकांड का खुलासा, 34 साल पुराने जमीनी विवाद में 10 लाख की सुपारी देकर कराई गई थी हत्या

जालौन/कानपुर। उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में कालपी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता गयादीन अहिरवार (67) की सनसनीखेज हत्या की गुत्थी को पुलिस ने सुलझा लिया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि इस जघन्य हत्याकांड के पीछे 34 साल पुराना 32 बीघा जमीन का विवाद था। इस विवाद के खात्मे के लिए बाकायदा 10 लाख रुपये की सुपारी देकर भाड़े के शूटरों से वकील का अपहरण कर उनकी हत्या कराई गई थी। इस साजिश के तार सीधे तौर पर कानपुर से जुड़े हैं। पुलिस ने मुख्य साजिशकर्ता इंद्रजीत सिंह यादव समेत वारदात में शामिल तीन शूटरों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि सुपारी लेने वाला मुख्य आरोपी मोनू यादव फिलहाल फरार है।

हजार बीघा के मालिक की संपत्ति और 1990 से शुरू हुई कानूनी रार

इस पूरे खूनी खेल की जड़ कदौरा क्षेत्र के चतेला गांव निवासी माधव सिंह की अकूत संपत्ति से जुड़ी है। माधव सिंह के पास करीब एक हजार बीघा जमीन थी। उन्होंने हांसा गांव में स्थित 32 बीघा जमीन अपनी नातिन अपर्णा सिंह के नाम पंजीकृत की थी। माधव सिंह और उनके पुत्र रामगोपाल की मृत्यु के उपरांत, वर्ष 1990 में अधिवक्ता गयादीन अहिरवार ने वसीयत के आधार पर इस 32 बीघा जमीन पर अपना कानूनी दावा ठोक दिया।

इसके बाद अपर्णा सिंह और अधिवक्ता गयादीन अहिरवार के बीच अदालतों में लंबी कानूनी लड़ाई खिंचती चली गई। वर्षों चली मुकदमेबाजी के बाद अदालत से अपर्णा सिंह के पक्ष में फैसला आया। इसके बाद अपर्णा सिंह ने साल 2019 में यह विवादित जमीन मैनपुरी के करहल क्षेत्र के कठौली निवासी इंद्रपाल सिंह उर्फ इंद्रजीत सिंह यादव को बेच दी, जो लंबे अर्से से कानपुर में रह रहा था। जमीन की रजिस्ट्री के बाद भी विवाद नहीं थमा। इसी साल जून माह में गयादीन अहिरवार ने इंद्रजीत, उसकी पत्नी सविता सहित सात लोगों पर मारपीट का मुकदमा दर्ज कराया था, जिसके बाद दोनों पक्षों में तल्खी और बढ़ गई थी।

कागजात और नाश्ते का बहाना: बेटे के सामने से कार में किया अगवा

घटनाक्रम के अनुसार, शनिवार को गयादीन अहिरवार एक मुकदमे की पैरवी के सिलसिले में उरई गए हुए थे। दोपहर बाद वह बस पकड़कर कालपी पहुंचे। वहां उनका बेटा हर्षनाथ उन्हें स्कूटर से घर ले जाने के लिए पहुंचा था। रास्ते में पहले से घात लगाए बैठे मोनू यादव ने उन्हें रोक लिया। मोनू ने कुछ आवश्यक अदालती दस्तावेज सौंपने और साथ में नाश्ता करने का झांसा देकर गयादीन को अपनी कार में बैठा लिया।

कार में पहले से तीन अन्य बदमाश मौजूद थे। बुजुर्ग वकील को बेटे से अलग करते ही बदमाश गाड़ी लेकर कानपुर की ओर फरार हो गए। 31 अक्टूबर (शनिवार) को कानपुर के गुजैनी क्षेत्र अंतर्गत गंभीरपुर में नहर के किनारे ले जाकर उनकी बेरहमी से हत्या कर दी गई और साक्ष्य मिटाने के इरादे से शव को नहर में फेंक दिया गया।

पुलिस मुठभेड़ में दो शूटर घायल, तीन शूटरों समेत मुख्य आरोपी दबोचा गया

पुलिस ने सर्विलांस और मुखबिर तंत्र की मदद से मुख्य साजिशकर्ता इंद्रजीत सिंह यादव को हिरासत में लेकर कड़ी पूछताछ की, जिसके बाद साजिश की परतें खुलती चली गईं। इंद्रजीत ने कबूल किया कि उसने जमीन पर कब्जे की राह से वकील को हटाने के लिए मोनू यादव और उसके पिता अजय यादव को 10 लाख रुपये की सुपारी दी थी।

पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए हत्या में शामिल तीन शूटरों सर्वेश शुक्ला उर्फ सब्बू, आशीष विश्वकर्मा और केशव कटियार को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के दौरान हुई पुलिस मुठभेड़ में दो शूटरों के पैर में गोली लगने की भी पुष्टि हुई है। मुख्य शूटर मोनू यादव की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।

कानपुर के वकीलों का फूटा गुस्सा, दो दिन की हड़ताल और मुआवजे की मांग

कालपी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष की नृशंस हत्या की खबर से वकीलों में भारी आक्रोश फैल गया है। घटना के विरोध में कानपुर बार एसोसिएशन और वकीलों ने मंगलवार और बुधवार को दो दिन की पूर्ण हड़ताल का ऐलान किया है। न्यायिक कार्य ठप करते हुए अधिवक्ताओं ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि पीड़ित परिवार को पांच करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और एक आश्रित को सरकारी नौकरी दी जाए। साथ ही मामले की निष्पक्ष और त्वरित सुनवाई के लिए केस को फास्ट ट्रैक कोर्ट में ट्रांसफर किया जाए। पुलिस अब सुपारी की रकम के लेन-देन के खातों की जांच के साथ फरार मोनू यादव की तलाश में जुटी है।

 

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