
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी का सपना देख रहे लाखों प्रतियोगी छात्रों और युवाओं के लिए शासन स्तर से बड़ा फैसला सामने आया है। योगी सरकार ने सीधी भर्ती के तहत चयनित अभ्यर्थियों के चरित्र सत्यापन (Character Verification) को लेकर नई समेकित नीति की घोषणा कर दी है। इस संबंध में शासन की ओर से विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, जिसमें यह साफ कर दिया गया है कि किन गंभीर मामलों में आरोप तय होने पर उम्मीदवारी खत्म हो जाएगी, किन मामलों में दोषसिद्धि अनिवार्य होगी और किन परिस्थितियों में अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिल सकेगी।
नई व्यवस्था के तहत यदि किसी चयनित अभ्यर्थी ने अपने आवेदन या स्वघोषणा पत्र में दर्ज मुकदमों, गिरफ्तारी या आपराधिक इतिहास की जानकारी छिपाई तो उसकी नियुक्ति तुरंत रद्द कर दी जाएगी। इसके साथ ही विधिक कार्रवाई का भी सामना करना पड़ेगा। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि केवल FIR दर्ज होने या हर लंबित मुकदमे के आधार पर अभ्यर्थियों को अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा। इसके लिए अपराधों को पांच अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर मानक तय किए गए हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देश पर समेकित नीति जारी, इन संस्थानों में भी लागू होंगे नियम
अपर मुख्य सचिव एम. देवराज की ओर से जारी शासनादेश में पूर्व के विभिन्न आदेशों को समेकित करते हुए यह पारदर्शी व्यवस्था लागू की गई है। यह कदम इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में उठाया गया है। नई नीति का दायरा सिर्फ राज्य सरकार के प्रशासनिक विभागों तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह प्रदेश के सभी निगमों, परिषदों, उच्च व माध्यमिक शिक्षण संस्थानों, स्वायत्तशासी निकायों, उपक्रमों, पंचायती राज संस्थाओं और नगर निगम व नगर पालिकाओं में सीधी भर्ती के जरिए होने वाली नियुक्तियों पर भी पूर्ण रूप से प्रभावी होगी।
कैटेगरी-A: पेपर लीक, साइबर फ्रॉड, हत्या और दुष्कर्म जैसे जघन्य मामलों में आरोप तय होते ही अयोग्यता
शासनादेश के अनुसार अपराधों को पांच श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। पहली श्रेणी यानी कैटेगरी-A में जघन्य, गंभीर और नैतिक पतन से जुड़े अपराध शामिल हैं। इसमें देशद्रोह, सेना के विरुद्ध अपराध, हत्या, गैर-इरादतन हत्या, दहेज हत्या, आत्महत्या के लिए उकसाना, तेजाब हमला, गंभीर हमला, फिरौती हेतु अपहरण, मानव तस्करी, दुष्कर्म और अन्य यौन अपराध रखे गए हैं।
प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता भंग करने वाले मामलों को भी इसी कठोर श्रेणी में रखा गया है। पेपर लीक, सॉल्वर गैंग, डमी अभ्यर्थी, परीक्षा प्रणाली में हैकिंग, फर्जी जाति, आय, दिव्यांगता या खेल प्रमाण पत्र का उपयोग करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। इसके अलावा डिजिटल अरेस्ट, यूपीआई व ओटीपी फ्रॉड, डीपफेक, डकैती, लूट, रंगदारी, मॉब लिंचिंग, आगजनी और झूठे साक्ष्य गढ़ने जैसे मामलों में अदालत द्वारा आरोप तय होते ही या दोषसिद्धि होने पर अभ्यर्थी सीधे तौर पर सरकारी सेवा के लिए अयोग्य हो जाएगा।
कैटेगरी-B: विशेष और कठोर अधिनियमों के तहत दर्ज मामलों पर भी कड़े प्रावधान
दूसरी श्रेणी यानी कैटेगरी-B में विशेष कानूनों के तहत आने वाले गंभीर अपराधों को शामिल किया गया है। इसमें एनडीपीएस (NDPS) एक्ट, आर्म्स एक्ट, शासकीय गुप्त बात अधिनियम (Official Secrets Act), विस्फोटक पदार्थ कानून, गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून (UAPA) और आतंकवाद से जुड़े कानून सूचीबद्ध हैं। इसके साथ ही एनआईए (NIA) अनुसूची के अपराध, पॉक्सो (POCSO) एक्ट, अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम, भ्रष्टाचार निवारण कानून, मनी लॉन्ड्रिंग, सार्वजनिक परीक्षा अनुचित साधन रोकथाम कानून, गैंगस्टर एक्ट, अवैध धर्म परिवर्तन निषेध कानून, गोवध निवारण अधिनियम और जहरीली शराब से जुड़े आबकारी अपराधों में भी निर्धारित नियमों के तहत सख्त अयोग्यता लागू होगी।
कैटेगरी-C व D: एनएसए, प्रतिबंधात्मक कार्रवाई और दोषसिद्धि से जुड़े दिशा-निर्देश
कैटेगरी-C के अंतर्गत राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA), कोफेपोसा (COFEPOSA) और राष्ट्रीय सुरक्षा व आतंकवाद से जुड़े कानूनों के तहत की गई निरोधात्मक कार्रवाइयों को रखा गया है। इसमें शर्त यह है कि सलाहकार बोर्ड से आदेश की पुष्टि हो चुकी हो और सक्षम न्यायालय ने उसे निरस्त न किया हो।
वहीं कैटेगरी-D में ऐसे अपराध रखे गए हैं जिनमें केवल आरोप तय होने से अयोग्यता नहीं होगी, बल्कि सक्षम अदालत द्वारा दोषसिद्धि (Conviction) अनिवार्य होगी। इस श्रेणी में आपराधिक षड्यंत्र, सामाजिक सौहार्द बिगाड़ना, अखंडता को क्षति पहुंचाना, मानहानि, गंभीर चोट, अपहरण, पीछा करना, संपत्ति से जुड़े अपराध, आर्थिक धोखाधड़ी, कूट दस्तावेज तैयार करना और विवाह व दहेज से संबंधित निर्दिष्ट मामले आते हैं। इस श्रेणी में अपील लंबित रहने पर भी शासनादेश के नियम प्रभावी रहेंगे।
कैटेगरी-E: आदतन अपराधियों और बार-बार मुकदमे दर्ज होने पर शिकंजा
पांचवीं श्रेणी यानी कैटेगरी-E में उन अभ्यर्थियों पर नियम लागू होंगे जो बार-बार आपराधिक गतिविधियों में लिप्त पाए जाते हैं। यदि किसी अभ्यर्थी के खिलाफ भिन्न मामलों में दो या अधिक चार्जशीट दाखिल हो चुकी हैं और उनमें से कम से कम एक मामला सत्यापन की तारीख से पिछले तीन साल के भीतर का है, तो उसे अयोग्य ठहराया जा सकता है। इसके अलावा पिछले पांच वर्षों में सक्षम अदालत द्वारा तीन या अधिक अलग-अलग मामलों में आरोप तय किए गए हों, तो भी अयोग्यता का नियम लागू होगा।
हालांकि, इसमें गणना का पैमाना बेहद स्पष्ट है। एक ही घटना या लेन-देन से जुड़े मामले और उसी घटना की क्रॉस एफआईआर को एक ही केस माना जाएगा। पारिवारिक, भूमि या वैवाहिक विवाद से जुड़े मामलों को भी अलग-अलग नहीं गिना जाएगा। जिन मुकदमों में अभ्यर्थी बाइज्जत बरी हो चुका है, लोक अदालत या समझौते से निपटारा हो चुका है, सरकार ने केस वापस ले लिया है अथवा कोर्ट ने प्रोसीडिंग्स निरस्त कर दी हैं, उन्हें इस गणना से पूरी तरह बाहर रखा जाएगा।
हर मुकदमे में नहीं जाएगी नौकरी, छोटे अपराधों और बरी हुए अभ्यर्थियों को राहत
नीति में युवाओं के हितों का भी पूरा ख्याल रखा गया है। स्पष्ट किया गया है कि मात्र एफआईआर दर्ज होने, विवेचना लंबित रहने या चार्जशीट दाखिल होने से (जब तक कि अदालत ने आरोप तय न किए हों) उम्मीदवारी प्रभावित नहीं होगी। यह छूट गंभीर श्रेणियों में भी आरोप तय न होने तक लागू रहेगी।
अदालत से अंतिम दोषमुक्ति, लोक अदालत में सुलह, अभियोजन वापसी, उच्च न्यायालय या शीर्ष अदालत द्वारा कार्यवाही रद्द किए जाने पर अभ्यर्थी को पूर्ण राहत मिलेगी। इसके साथ ही असंज्ञेय और शमनीय अपराध, जिनमें केवल जुर्माना या सामुदायिक सेवा का प्रावधान है, एक वर्ष तक की सजा वाले छोटे अपराध, 10 हजार रुपये से कम मूल्य की संपत्ति से जुड़े विवाद और सामान्य ट्रैफिक चालान जैसी बातों को अयोग्यता का आधार नहीं बनाया जाएगा। कैटेगरी-D के मामलों में यदि दोषसिद्धि के बाद 7 वर्ष का समय बीत चुका है और अभ्यर्थी का आचरण उत्कृष्ट रहा है, तो नियुक्ति प्राधिकारी लिखित कारण दर्ज कर नियुक्ति पर विचार कर सकता है।
राहत के मुख्य बिंदु:
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केवल एफआईआर दर्ज होने या जांच लंबित रहने से उम्मीदवारी रद्द नहीं होगी।
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आरोप पत्र दाखिल होने के बाद भी यदि अदालत ने आरोप तय नहीं किए हैं तो राहत मिलेगी।
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न्यायालय से दोषमुक्त होने या केस रद्द होने पर चयन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
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छोटे, शमनीय अपराध और सामान्य यातायात उल्लंघन के मामले अयोग्यता से बाहर रहेंगे।
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कैटेगरी-D के अपराधों में सजा पूरी होने के 7 साल बाद अच्छे आचरण पर नियुक्ति संभव होगी।
सत्यापन पत्र में आपराधिक रिकॉर्ड छिपाया तो सीधे दर्ज होगा नया केस
सभी चयनित अभ्यर्थियों को आवेदन और सत्यापन प्रपत्र में अपने पूरे आपराधिक इतिहास का खुलासा करना अनिवार्य होगा। गिरफ्तारी, दर्ज मुकदमे, चार्जशीट, ट्रायल, प्रतिबंधात्मक कार्रवाई, किसी पूर्व सेवा से बर्खास्तगी या किसी आयोग द्वारा डिबार किए जाने की जानकारी स्वघोषणा पत्र में देनी होगी। यदि किसी अभ्यर्थी ने जानबूझकर तथ्य छिपाए या गलत जानकारी दी, तो उसकी नियुक्ति तत्काल प्रभाव से रद्द की जाएगी और उसके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) के सुसंगत प्रावधानों के तहत दंडात्मक कानूनी कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी।
30 दिनों में देनी होगी पुलिस रिपोर्ट, अभ्यर्थी को मिलेगा सुनवाई का मौका
शासनादेश के अनुसार, नियुक्ति प्राधिकारी चयनित अभ्यर्थियों का ब्योरा पुलिस महानिदेशक (अभिसूचना) और संबंधित जिलाधिकारियों को प्रेषित करेंगे। अभ्यर्थी के गृह जनपद के अलावा उन जिलों से भी रिपोर्ट ली जाएगी जहां वह पिछले 5 वर्षों में एक वर्ष से अधिक समय तक रहा हो। यदि वह अन्य राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में रहा है, तो वहां के पुलिस प्रमुख से संपर्क साधा जाएगा।
सामान्य मामलों में अभ्यर्थी के घर जाकर पूछताछ करना या उसे व्यक्तिगत रूप से बुलाना अनिवार्य नहीं होगा। डीजीपी अभिसूचना और जिलाधिकारियों को 30 दिन के भीतर अपनी जांच आख्या भेजनी होगी। तय समय पर रिपोर्ट न मिलने पर मामला गृह विभाग को संदर्भित किया जाएगा। यदि पुलिस की ओर से कोई प्रतिकूल रिपोर्ट आती है, तो जिलाधिकारी द्वारा संबंधित अभ्यर्थी को ऑनलाइन या भौतिक रूप से सुनवाई का पूरा मौका दिया जाएगा।
वेरिफिकेशन के चक्कर में नहीं रुकेगी ज्वॉइनिंग, औपबंधिक नियुक्ति पत्र का प्रावधान
प्रक्रिया को तेज करने के लिए सरकार ने स्पष्ट किया है कि सामान्य पदों पर चरित्र सत्यापन लंबित रहने के कारण नियुक्ति पत्र नहीं रोका जाएगा। चयनित अभ्यर्थी से निर्धारित प्रारूप में स्वघोषणा पत्र लेकर उसे प्रोविजनल (औपबंधिक) नियुक्ति पत्र दे दिया जाएगा। हालांकि, अत्यधिक संवेदनशील और सुरक्षा से जुड़े विशिष्ट पदों पर नियुक्ति से पूर्व विस्तृत सत्यापन कराया जाना अनिवार्य रहेगा।
राजनीतिक विचारधारा के आधार पर नहीं होगा भेदभाव
नीति में यह भी रेखांकित किया गया है कि केवल व्यक्तिगत राजनीतिक विचारधारा या मत के आधार पर किसी भी अभ्यर्थी को अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा। हालांकि, यदि कोई अभ्यर्थी ऐसे किसी संगठन या गिरोह का सक्रिय सदस्य पाया जाता है, जिसका घोषित उद्देश्य लोकतांत्रिक व्यवस्था को हिंसक माध्यमों से बदलना या विध्वंसक गतिविधियों को बढ़ावा देना है, तो उसे सरकारी सेवा के लिए पूरी तरह अयोग्य माना जाएगा।
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