
इम्फाल/तामेंगलोंग। पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में शांति बहाली की कोशिशों के बीच एक बार फिर हिंसा की भीषण आग भड़क उठी है। तामेंगलोंग जिले में रविवार को बेखौफ हथियारबंद बदमाशों ने दो अलग-अलग इलाकों में खूनी तांडव मचाया। इन सुनियोजित हमलों में एक दंपति समेत कुल चार लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई, जबकि छह साल का एक मासूम गोली लगने से जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है। दिल दहला देने वाली यह वारदात उस दिन हुई, जिस दिन कुकी समुदाय 1990 के दशक के संघर्ष की याद में ‘ब्लैक डे’ मना रहा था। इस दोहरे हमले के बाद पूरे इलाके में तनाव चरम पर पहुंच गया है और सुरक्षा बल अलर्ट मोड पर हैं।
सुबह-सुबह घर में घुसकर बरसाईं गोलियां, दंपति की मौत
पहली रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात रविवार तड़के करीब 5:30 बजे कैमाई थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले टोलन गांव में हुई। भारी हथियारों से लैस हमलावरों ने एक परिवार को निशाना बनाकर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस हमले में 46 वर्षीय महिला लिंगज़ंगाई सिंगसिट की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके पति सेनेह सिंगसिट और उनका छह वर्षीय बेटा गोलियों की चपेट में आकर लहूलुहान हो गए।
गोलियों की तड़तड़ाहट से पूरा इलाका दहल उठा। स्थानीय लोगों की मदद से पिता-पुत्र को तुरंत असम के नजदीकी सिलचर मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, लेकिन अस्पताल की दहलीज तक पहुंचने से पहले ही सेनेह सिंगसिट ने रास्ते में दम तोड़ दिया। डॉक्टरों ने सेनेह को मृत घोषित कर दिया, जबकि छह वर्षीय मासूम की हालत नाजुक बनी हुई है और उसका सघन इलाज जारी है।
कुछ ही घंटों बाद लोंगपी गांव में दूसरा हमला, दो ग्रामीणों की हत्या
टोलन गांव की वारदात के बाद तनाव अभी थमा भी नहीं था कि दोपहर करीब 3 बजे नुंगबा थाना क्षेत्र के लोंगपी गांव में दूसरा खूनी हमला बोल दिया गया। नुंगबा पुलिस ने घटना की आधिकारिक पुष्टि की है। अधिकारियों का कहना है कि लोंगपी गांव थाने से लगभग 30 किलोमीटर पश्चिम में घने जंगलों और बेहद दुर्गम पहाड़ी इलाके में स्थित है। भारी बारिश और बदहाल सड़कों के कारण पुलिस टीम रविवार को तुरंत मौके पर नहीं पहुंच सकी, लेकिन सोमवार तड़के भारी सुरक्षा बल के साथ घटनास्थल का मुआयना करने टीम रवाना की गई है।
कुकी समूह का उग्रवादी संगठनों पर आरोप, मुठभेड़ के बाद भागे हमलावर
इस खूनी हमले के बाद कुकी संगठन ‘वेस्टर्न विलेज वॉलंटियर’ (WVV) ने अपने सूचना एवं प्रचार प्रमुख ओबेन सिंगसन के हवाले से एक बयान जारी किया। संगठन ने दावा किया कि लोंगपी गांव में मारे गए लोगों की पहचान जिली सिंगसन और रियोल गंगटे के रूप में हुई है। WVV ने आरोप लगाया कि यह कायराना हमला NSCN-IM और ZUF-K (नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालैंड-इसाक मुइवा और जेलियांगरोंग यूनाइटेड फ्रंट-कामसन) गुट के हथियारबंद कैडरों द्वारा किया गया।
बयान के मुताबिक, पीड़ित ग्रामीण अपने जरूरी काम से जा रहे थे, तभी घात लगाकर उन पर गोलियां बरसाई गईं। ग्रामीणों की हत्या के बाद हमलावर गांव के रिहायशी हिस्से में घुसने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन विलेज वॉलंटियर्स के साथ हुई जवाबी गोलीबारी के बाद हमलावरों को घने जंगलों की ओर भागना पड़ा। WVV ने सुरक्षाबलों को अल्टीमेटम देते हुए 24 घंटे के भीतर सभी हत्यारों को गिरफ्तार करने की मांग की है।
कैमाई नागा प्रशासन की शांति की अपील, ‘ब्लैक डे’ पर हमले से बढ़ा आक्रोश
तनावपूर्ण हालात को देखते हुए कैमाई विलेज अथॉरिटी ने हमले की कड़ी भर्त्सना की है। ग्राम परिषद ने कुकी और नागा दोनों समुदायों से शांति बनाए रखने और सोशल मीडिया पर किसी भी तरह की भड़काऊ अफवाह न फैलाने की अपील की है। गांव के अधिकारियों ने स्पष्ट कहा, “हम शांति, एकता और सांप्रदायिक सद्भाव के पक्षधर हैं। प्रशासन इस खूनी खेल के दोषियों की निष्पक्ष जांच कर उन्हें सख्त से सख्त सजा दिलाए।”
वहीं, कुकी महिलाओं के शीर्ष संगठन ‘कुकी यूथ ऑर्गनाइजेशन विमेंस काउंसिल’ (KYO Women’s Council) ने भी इस हमले पर गहरा आक्रोश जताया है। संगठन ने कहा कि यह हमला ऐसे दिन किया गया जब कुकी समाज 13 सितंबर को 1990 के दशक में मारे गए 1000 से अधिक निर्दोष लोगों की याद में ‘ब्लैक डे’ मना रहा था। काउंसिल ने पूरे मामले की स्वतंत्र और न्यायिक जांच की मांग करते हुए दोषियों पर त्वरित कानूनी कार्रवाई की मांग की है। हिंसा के मद्देनजर संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त अर्धसैनिक बलों की तैनाती की जा रही है।
voice of india