
जापान के आइची-नागोया में 19 सितंबर से शुरू होने जा रहे 20वें एशियन गेम्स से ठीक पहले भारतीय खेल जगत से एक बड़ा और संवेदनशील विवाद सामने आया है। खेल मंत्रालय द्वारा 11 सितंबर को जारी एक संशोधित सूची में भारतीय वुशु टीम से राजस्थान (कोटा) की उभरती खिलाड़ी दिव्यांशी चौधरी का नाम हटाकर उनकी जगह दो बार की एशियन गेम्स पदक विजेता नाओरेम रोशिबीना देवी को शामिल कर लिया गया। टीम से बाहर किए जाने के बाद दिव्यांशी का करीब 9 मिनट का एक भावुक वीडियो सामने आया है, जिसमें वे रोते हुए चयन प्रक्रिया पर सवाल उठा रही हैं और मानसिक तनाव में आकर कठोर कदम उठाने जैसी बातें कह रही हैं।

‘मां-पापा माफ करना…’: वीडियो में छलका खिलाड़ी का दर्द सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में दिव्यांशी बेहद आहत नजर आ रही हैं। उन्होंने कहा कि उनका चयन तय हो चुका था, उन्हें आधिकारिक भारतीय जर्सी (किट) मिल चुकी थी और सेंड-ऑफ सेरेमनी में भी वे शामिल हुई थीं, लेकिन ऐन वक्त पर उनका नाम काट दिया गया। वीडियो के अंतिम पलों में वे अपने परिजनों से माफी मांगते हुए कहती हैं कि वे कभी ऐसा कदम नहीं उठाना चाहती थीं, लेकिन इस अन्याय ने उन्हें तोड़ दिया है। वीडियो के अंत में उन्होंने अपने कमरे की छत दिखाते हुए इसे अपना ‘आखिरी वीडियो’ करार दिया, जिसके बाद खेल महकमे और सोशल मीडिया पर हड़कंप मच गया।
ट्रायल में जीत का दावा बनाम SAI की अनफिट रिपोर्ट दिव्यांशी का दावा है कि उन्होंने 60 किग्रा सांदा वर्ग के फाइनल सेलेक्शन ट्रायल में रोशिबीना देवी को हराया था। श्रीनगर कैंप के दौरान उनके कंधे में चोट आई थी, लेकिन डॉक्टर ने टेपिंग के साथ खेलने की अनुमति दी थी और वे पूरी तरह फिट महसूस कर रही थीं। दूसरी ओर, वुशु एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह बाजवा का कहना है कि दिव्यांशी जिस फिटनेस रिपोर्ट का हवाला दे रही हैं वह एक निजी डॉक्टर की है। स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) के मेडिकल पैनल के अनुसार दिव्यांशी पूरी तरह फिट नहीं हैं। महासंघ का कहना है कि एशियन गेम्स में पदक जीतना देश का मुख्य लक्ष्य है, इसलिए किसी अनफिट एथलीट को मैदान में नहीं उतारा जा सकता।
पिता ने लगाए साजिश के आरोप, महासंघ ने दी सफाई दिव्यांशी के पिता सुनील कुमार सुंडा का आरोप है कि श्रीनगर नेशनल कैंप के दौरान जानबूझकर उनकी बेटी को चोटिल किया गया ताकि अनुभवी खिलाड़ी को मौका दिया जा सके। उन्होंने कहा कि चोट के बावजूद दिव्यांशी ने चीन में अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेलकर रजत पदक जीता था और उनकी अंतिम एंट्री भी कन्फर्म थी। इस आरोप को खारिज करते हुए महासंघ अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि वुशु एक कॉम्बैट मार्शल आर्ट है, जहां अभ्यास के दौरान चोट लगना सामान्य बात है और किसी खिलाड़ी पर जानबूझकर चोट पहुंचाने का आरोप लगाना पूरी तरह बेबुनियाद है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर चुकी हैं दिव्यांशी कोटा की महाबली स्पोर्ट्स एकेडमी से प्रशिक्षण लेने वाली दिव्यांशी 60 किग्रा वर्ग में सांदा की प्रमुख खिलाड़ी हैं। उनके नाम 2024 जूनियर वर्ल्ड वुशु चैंपियनशिप में कांस्य पदक और जून 2026 में चीन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय आमंत्रण टूर्नामेंट में रजत पदक दर्ज है। इसके अलावा वे राज्य स्तर पर 12 स्वर्ण पदक भी अपने नाम कर चुकी हैं।
जापान में 20 से 24 सितंबर तक होंगे वुशु के मुकाबले 20वें एशियन गेम्स के अंतर्गत वुशु प्रतिस्पर्धाएं 20 से 24 सितंबर के बीच आयोजित होंगी। भारत ने 7 सदस्यीय वुशु दल (3 पुरुष और 4 महिला) को मैदान में उतारा है। पुरुष वर्ग में सूरज सिंह मायांगलंबम, आर्यन और विक्रांत बलियान शामिल हैं, जबकि महिला वर्ग में न्येमान वांगसू, अपर्णा, रोशीबीना देवी और लैंगलेंटोम्बी देवी हंजाबम भारत की दावेदारी पेश करेंगी।
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