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BRICS Summit 2026: एक दशक लंबे अंतराल के बाद भारत में एक मंच पर दिखेंगे मोदी, पुतिन और जिनपिंग; 11 देशों की महाबैठक से बदलेगा वैश्विक समीकरण

 नई दिल्ली राजधानी नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आगाज होने जा रहा है। एक दशक लंबे अंतराल के बाद यह पहला मौका है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग भारतीय धरती पर एक साथ मंच साझा करेंगे। इससे पहले तीनों दिग्गज नेता साल 2016 के गोवा ब्रिक्स समिट में एक साथ नजर आए थे। भारत की अध्यक्षता में हो रहे इस ऐतिहासिक सम्मेलन में ब्रिक्स के 11 पूर्ण सदस्य देशों के अलावा 10 साझेदार मुल्कों के शीर्ष नेता और प्रतिनिधि भी शामिल हो रहे हैं।

वैश्विक जीडीपी में 39% हिस्सेदारी, हर दूसरा व्यक्ति ब्रिक्स का नागरिक विस्तार के बाद ब्रिक्स की ताकत में अभूतपूर्व इजाफा हुआ है। मौजूदा समय में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, यूएई, सऊदी अरब और इंडोनेशिया सहित कुल 11 सदस्य देशों में दुनिया की करीब 49.5 प्रतिशत आबादी निवास करती है। आर्थिक मोर्चे पर भी यह मंच पश्चिमी देशों के प्रभुत्व को कड़ी चुनौती दे रहा है। क्रय शक्ति समता (PPP) के आधार पर ब्रिक्स देशों की संयुक्त अर्थव्यवस्था विश्व की लगभग 39 फीसदी बैठती है, जो कि अकेले अमेरिकी अर्थव्यवस्था के आकार से करीब तीन गुना अधिक है।

डॉलर पर निर्भरता घटाने और डिजिटल पेमेंट कनेक्टिविटी पर फोकस इस सम्मेलन का मुख्य एजेंडा वैश्विक व्यापार में अमेरिकी डॉलर के वर्चस्व को संतुलित करना और स्थानीय मुद्राओं में आपसी कारोबार को बढ़ावा देना है। भारत की पहल पर सदस्य देशों के डिजिटल भुगतान प्रणालियों (UPI की तर्ज पर) और सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) को आपस में जोड़ने पर गंभीर चर्चा होगी। इसका सीधा लाभ यह होगा कि क्रॉस-बॉर्डर ट्रांजैक्शन की लागत घटेगी, लेन-देन तेज होगा और तीसरे देश की मुद्रा पर निर्भरता खत्म होगी।

गलवान संघर्ष के बाद पहली बार भारत पहुंचे शी जिनपिंग चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग करीब 7 साल के लंबे अंतराल के बाद भारत यात्रा पर पहुंचे हैं। साल 2020 की गलवान घाटी की हिंसक झड़प के बाद यह उनकी भारत में पहली द्विपक्षीय बातचीत होगी। दोनों देश वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर शांति और स्थिरता के लिए छह प्रमुख बिंदुओं पर काम कर रहे हैं। इनमें सीमा विवाद के समाधान हेतु विशेषज्ञ कार्यसमूह का गठन, दो अतिरिक्त सैन्य संपर्क केंद्र और पूर्वी व मध्य सेक्टर में दो सैन्य हॉटलाइन स्थापित करना शामिल है। इन रक्षा प्रस्तावों के अलावा करीब 8.6 लाख करोड़ रुपये से अधिक के बढ़ते व्यापार घाटे को संतुलित करना भी दोनों शीर्ष नेताओं की बातचीत का केंद्रीय मुद्दा रहेगा।

दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति और गौतम अडाणी के बीच अहम बैठक सम्मेलन के इतर राजनयिक और व्यापारिक मुलाकातों का सिलसिला भी तेज हो गया है। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने नई दिल्ली में अडाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडाणी से उच्चस्तरीय बैठक की। इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य दक्षिण अफ्रीका में बुनियादी ढांचे, ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में भारतीय निवेश को आकर्षित करना और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय आर्थिक साझेदारी को मजबूत करना है।

6 साल बाद बहाल होगी भारत-चीन सीधी हवाई सेवा कूटनीतिक रिश्तों में नरमी के बीच एविएशन सेक्टर में भी बड़ी राहत की खबर सामने आई है। ‘चाइना सदर्न एयरलाइंस’ ने 6 साल के निलंबन के बाद 21 सितंबर से भारत के लिए नियमित वाणिज्यिक उड़ानें फिर से शुरू करने का ऐलान किया है। कंपनी सबसे पहले ग्वांगझू-दिल्ली मार्ग पर अपनी उड़ानों का परिचालन बहाल करेगी, जिसके तहत दक्षिण एशियाई क्षेत्र में हर हफ्ते 100 से अधिक राउंड-ट्रिप उड़ानें संचालित की जाएंगी।

 

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