Saturday , 12 September 2026

BRICS Forum: ‘सिर्फ बातों से नहीं, ठोस नेटवर्क से मजबूत होगा ब्रिक्स’, ईरानी राष्ट्रपति ने की पीएम मोदी की तारीफ; पीयूष गोयल ने गिनाए आंकड़े

 

नई दिल्ली। वैश्विक अनिश्चितता और सप्लाई चेन के संकट के बीच ब्रिक्स बिजनेस फोरम के मंच से सदस्य देशों ने साझा आर्थिक शक्ति को जमीन पर उतारने का बड़ा आह्वान किया है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने स्पष्ट कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच आर्थिक तालमेल को महज संभावनाओं तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि इसे व्यापार, निवेश और संयुक्त वित्तपोषण के एक मजबूत व ठोस नेटवर्क में बदलना समय की मांग है। इस दौरान उन्होंने भारत के आतिथ्य की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और ब्रिक्स को एकजुट करने के प्रयासों की खुलकर तारीफ की।

पीएम मोदी के प्रयासों की सराहना, निजी क्षेत्र की भागीदारी पर बल

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने भारत सरकार और देश की जनता का आभार जताते हुए कहा कि आज दुनिया भू-राजनीतिक उथल-पुथल, आपूर्ति शृंखला में बाधाओं और आर्थिक दबावों का सामना कर रही है। ऐसे समय में ब्रिक्स की असली ताकत केवल सदस्य देशों की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में नहीं, बल्कि इस बात में है कि वे अपनी क्षमताओं को असल साझेदारी में कैसे बदलते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि निजी क्षेत्र, बड़े कारोबारी संस्थानों और नए उद्यमियों को साथ जोड़े बिना ब्रिक्स सहयोग को वास्तविक नतीजों में नहीं बदला जा सकता।

वैश्विक जीडीपी में ग्लोबल साउथ का दबदबा, ब्राजील ने पेश की तस्वीर

मंच से ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा ने वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) की बढ़ती ताकत का ब्योरा रखा। उन्होंने कहा कि संरक्षणवाद और एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों के मौजूदा दौर में उत्पादन क्षेत्रों का आपसी तालमेल पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है। विएरा ने ऐतिहासिक बदलाव का जिक्र करते हुए बताया कि 1960 के दशक में वैश्विक जीडीपी में निम्न और मध्यम आय वाले देशों की हिस्सेदारी महज 20 प्रतिशत के आसपास थी, जो आज बढ़कर 50 प्रतिशत के पार जा चुकी है। उन्होंने रेखांकित किया कि वर्तमान में ब्रिक्स देश अकेले पूरे विश्व के आर्थिक उत्पादन का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा संभाल रहे हैं।

2003 में 900 अरब डॉलर था निर्यात, आज पहुंचा 6 खरब पार: पीयूष गोयल

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने फोरम को संबोधित करते हुए सदस्य देशों के बीच व्यापार को नई गति देने और लचीली आपूर्ति शृंखला तैयार करने की वकालत की। उन्होंने आंकड़ों के जरिए ब्रिक्स की ऐतिहासिक प्रगति को सामने रखते हुए कहा कि साल 2003 में ब्रिक्स देशों का वैश्विक वस्तु निर्यात लगभग 900 अरब डॉलर था, जो वर्ष 2024 तक आते-आते करीब छह खरब (ट्रिलियन) डॉलर के विशाल स्तर पर पहुंच गया। इसी अवधि के दौरान वैश्विक निर्यात में ब्रिक्स की हिस्सेदारी भी 12 प्रतिशत से दोगुनी होकर करीब 24 प्रतिशत दर्ज की गई है।

2000 से अधिक दिग्गज जुटे, 44 अहम सिफारिशों पर तैयार हुई रिपोर्ट

केंद्रीय मंत्री गोयल ने जानकारी दी कि इस प्रतिष्ठित बिजनेस फोरम में 2,000 से अधिक शीर्ष कारोबारी नेताओं और वैश्विक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक के दौरान गैर-टैरिफ बाधाओं को हटाने, कृषि क्षेत्र, सेवा क्षेत्र, महिला नेतृत्व वाले उद्यमों और डिजिटल अर्थव्यवस्था को गति देने जैसे प्रमुख मुद्दों पर गहन मंथन हुआ। ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल ने इस दिशा में 44 से अधिक व्यावहारिक सिफारिशों वाली एक विस्तृत वार्षिक रिपोर्ट भी पेश की है।

फोरम के ऐतिहासिक सत्र में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा समेत ब्रिक्स के शीर्ष नेता एक मंच पर मौजूद रहे। शिखर बैठक के दौरान वैश्विक नेताओं ने एकजुटता का संदेश देते हुए सामूहिक तस्वीर भी खिंचवाई।

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