
नई दिल्ली वैश्विक आतंकी संगठन अल-कायदा ने अमेरिका पर हुए 9/11 हमलों की 25वीं बरसी पर करीब 50 मिनट का एक बेहद चौंकाने वाला प्रोपेगेंडा वीडियो जारी किया है। संगठन के आधिकारिक मीडिया विंग ‘अस-सहाब’ की ओर से जारी इस वीडियो को ‘ए क्वार्टर सेंचुरी ऑफ द 11 सितंबर रेड्स’ शीर्षक दिया गया है। इस पूरे वीडियो में सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात ओसामा बिन लादेन के बेटे हमजा बिन लादेन के पहले वीडियो फुटेज का सामने आना है, जिसे अमेरिकी खुफिया एजेंसियां साल 2019 के आसपास ही अफगान-पाकिस्तान सीमा पर चलाए गए सैन्य ऑपरेशन में मृत मान चुकी थीं।

सफेद पगड़ी, बगल में राइफल और लादेन की छवि भुनाने की कोशिश वीडियो में हमजा बिन लादेन को एक पुरानी व चटकती हुई मिट्टी की दीवार के सहारे बैठे दिखाया गया है। उसके सिर पर पारंपरिक सफेद पगड़ी बंधी है और पास में एक असॉल्ट राइफल रखी नजर आ रही है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस विजुअल फ्रेम को बेहद सोची-समझी रणनीति के तहत रचा गया है। इसका पहला मकसद हमजा को ओसामा बिन लादेन के वास्तविक वारिस के तौर पर पेश करना है, वहीं दूसरा मकसद शुरुआती दौर के जिहादी विमर्श की पुरानी यादों को ताजा कर भटके हुए युवाओं को संगठन से जोड़ना है।
जवाहिरी की अनदेखी तस्वीरें और नेतृत्व का रहस्य इस वीडियो में मारे जा चुके अल-कायदा सरगना अयमान अल-जवाहिरी की कई ऐसी दुर्लभ तस्वीरें भी शामिल की गई हैं, जो इससे पहले सार्वजनिक पटल पर कभी नहीं आई थीं। दिलचस्प पहलू यह है कि संगठन ने आधिकारिक तौर पर अब तक जवाहिरी की मौत की सार्वजनिक पुष्टि नहीं की है और न ही उसकी ओर से कोई शोक संदेश जारी किया गया है। खुफिया विश्लेषकों का दावा है कि संगठन के मौजूदा रणनीतिकार सैफ अल-अदल की विचारधारा को विस्तार देने और युवाओं की नई खेप भर्ती करने के लिए जानबूझकर लादेन परिवार के चेहरे का सहारा लिया जा रहा है।
कराची नेवल डॉकयार्ड हमले से शुरुआत: पाकिस्तानी आतंकियों का गहरा दखल इस 50 मिनट के वीडियो की शुरुआत किसी अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम से न होकर साल 2014 में हुए कराची नेवल डॉकयार्ड हमले के आर्काइव फुटेज से की गई है। भारतीय उपमहाद्वीप में सक्रिय शाखा ‘अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट’ (AQIS) द्वारा अंजाम दिए गए इस क्षेत्रीय हमले को शुरुआती मिनटों में तरजीह देना साफ इशारा करता है कि अल-कायदा के केंद्रीय नेतृत्व और उसके प्रचार तंत्र पर पाकिस्तानी आतंकियों का असर कितना ज्यादा बढ़ चुका है।
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