
नई दिल्ली। देश के तटीय क्षेत्रों के लिए आगामी तीन महीने बेहद संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने उन्नत मौसम उपग्रहों और निगरानी प्रणालियों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर एक गंभीर चेतावनी जारी की है। इसरो की रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर से दिसंबर के दौरान बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में तीन शक्तिशाली चक्रवाती तूफानों के टकराने की प्रबल आशंका है। इन तूफानों के प्रभाव से तटीय इलाकों में मूसलाधार बारिश, समुद्र में जानलेवा ऊंची लहरें और अत्यधिक तीव्र गति से तूफानी हवाएं चल सकती हैं।
44 साल के औसत से 83 फीसदी ज्यादा ताकतवर होंगे तूफान
इसरो के वैज्ञानिक विश्लेषण के मुताबिक, इस बार चक्रवातों की मारक क्षमता और ऊर्जा का स्तर पिछले 44 वर्षों के औसत से करीब 83 फीसदी अधिक रहने का अनुमान है। इसका सीधा अर्थ यह है कि ये चक्रवात पूर्व में आए तूफानों की तुलना में कहीं अधिक विनाशकारी और जानलेवा साबित हो सकते हैं। रिपोर्ट में अक्टूबर-दिसंबर की अवधि के लिए 1.30 करोड़ का पीडीआई (Power Dissipation Index – PDI) आंका गया है, जबकि वर्ष 1982 से 2025 के बीच यह औसत केवल 71 लाख रहा था। पीडीआई एक ऐसा पैमाना है जो किसी चक्रवात की ताकत, उसकी सक्रियता की अवधि और उसकी आवृत्ति को जोड़कर उसकी कुल विध्वंसक ऊर्जा को मापता है। इसकी गणना नॉट्स क्यूब में की जाती है।
1982 के बाद सबसे ज्यादा तीव्रता का रिकॉर्ड बनने के आसार
अध्ययन में 1982 से लेकर 2025 तक उत्तर हिंद महासागर में मानसून के बाद सक्रिय हुए तूफानों और उनके पीडीआई का गहन ऐतिहासिक विश्लेषण किया गया है। 44 साल की इस समयावधि में पीडीआई का औसत $7.15 \times 10^6$ नॉट्स क्यूब दर्ज किया गया था, लेकिन वर्ष 2026 के अंतिम तीन महीनों में इसके उछलकर $13.06 \times 10^6$ नॉट्स क्यूब तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। आसान शब्दों में समझें तो यह आकलन केवल तूफानों की संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्पष्ट करता है कि तूफान कितनी भयानक हवाओं के साथ बनेंगे और समुद्र व तट पर कितने लंबे समय तक कहर बरपाएंगे।
केंद्र सरकार सतर्क, तटीय राज्यों में आपदा प्रबंधन एजेंसियां अलर्ट
इसरो की इस बेहद गंभीर चेतावनी के बाद केंद्र सरकार पूरी तरह सक्रिय हो गई है। मौसम विभाग (IMD), राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और तमाम तटीय राज्यों के आपदा प्रबंधन विभागों ने मिलकर निगरानी तंत्र को मजबूत करना शुरू कर दिया है। तटीय क्षेत्रों में रहने वाली आबादी को सुरक्षित रखने के लिए समय-समय पर विस्तृत परामर्श और अलर्ट जारी किए जाएंगे। इसके साथ ही, समुद्र में उतरने वाले मछुआरों और समुद्री बंदरगाहों पर तैनात कर्मचारियों के लिए सुरक्षा दिशा-निर्देशों को अनिवार्य रूप से लागू करने की तैयारी की जा रही है।
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