
नई दिल्ली। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के केंद्र में दोनों देशों का गहरा रक्षा और सामरिक सहयोग रहने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच शुक्रवार को होने वाली शीर्ष स्तरीय द्विपक्षीय वार्ता में रक्षा, असैन्य परमाणु ऊर्जा और स्वतंत्र विदेश नीति के मोर्चे पर कई ऐतिहासिक समझौतों पर मुहर लगने की संभावना है। वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच कूटनीतिक और सैन्य गलियारों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यह ऐतिहासिक मुलाकात दोनों देशों की दशकों पुरानी रणनीतिक साझेदारी को किस नए पायदान पर पहुंचाती है।
सैन्य मजबूती और तकनीक हस्तांतरण पर रहेगा जोर
द्विपक्षीय बैठक के एजेंडे में अत्याधुनिक रक्षा सौदे और प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण सबसे अहम बिंदु हैं। दोनों देश अब केवल ‘खरीदार और विक्रेता’ के पारंपरिक ढांचे से बाहर निकलकर संयुक्त अनुसंधान, विकास और साझा उत्पादन पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। रक्षा क्षेत्र से जुड़े प्रमुख बिंदुओं पर ठोस प्रगति की संभावना है:
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सुखोई-57 (Su-57): रूस भारत को अपने पांचवीं पीढ़ी के इस अत्याधुनिक स्टील्थ लड़ाकू विमान की पेशकश कर रहा है। दोनों पक्ष संभावित खरीद के साथ-साथ ‘मेक इन इंडिया’ के तहत इसके व्यापक तकनीक हस्तांतरण (ToT) पर भी गहन चर्चा कर रहे हैं।
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एस-400 मिसाइल प्रणाली: दुनिया की सबसे अचूक वायु रक्षा प्रणालियों में शुमार एस-400 से जुड़े आगामी समझौतों, शेष बची बैटरियों की आपूर्ति और स्पेयर पार्ट्स के त्वरित प्रबंध पर फैसला हो सकता है।
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ब्रह्मोस का नेक्स्ट-जेनरेशन मॉडल: दोनों मित्र देश सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस के अगले और अधिक मारक संस्करण के संयुक्त विकास पर बातचीत को आगे बढ़ा रहे हैं।
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संयुक्त रक्षा उत्पादन: सैन्य उपकरणों के पुर्जों का भारत में ही विनिर्माण और तकनीकी सहयोग को गति देकर भारतीय सैन्य तैयारियों को नया आयाम दिया जाएगा।
ऊर्जा सुरक्षा और परमाणु सहयोग का मजबूत स्तंभ
रक्षा के अलावा इस यात्रा का दूसरा सबसे बड़ा आधार ऊर्जा सुरक्षा और असैन्य परमाणु ऊर्जा है। पश्चिमी देशों के तमाम आर्थिक व कूटनीतिक दबावों के बावजूद भारत और रूस के बीच कच्चे तेल का लेन-देन और ऊर्जा साझेदारी निरंतर मजबूत बनी हुई है। वार्ता के दौरान देश में नए परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना से जुड़ी चर्चाओं को अंतिम रूप दिए जाने की तैयारी है। इसके साथ ही, भारत की भविष्य की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करने और द्विपक्षीय व्यापार असंतुलन को पाटने के लिए दीर्घकालिक ऊर्जा समझौतों पर सहमति बन सकती है।
2030 तक 100 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का रोडमैप
सामरिक रिश्तों के साथ-साथ आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देने के लिए भारत और रूस ने महत्वाकांक्षी रोडमैप तैयार किया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार, दोनों देश एक नए द्विपक्षीय निवेश समझौते को तेजी से अंतिम रूप दे रहे हैं।
नई दिल्ली में रूस के उद्योग एवं व्यापार मंत्री एंतोन अलीखानोव के साथ ‘इनोप्रोम इंडिया 2026’ के पूर्ण सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि वर्ष 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वर्तमान में दोनों देशों का आपसी व्यापार करीब 60 अरब डॉलर के स्तर पर है। ऐसे में इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अगले चार वर्षों में व्यापार में लगभग 40 अरब डॉलर की ठोस वृद्धि सुनिश्चित की जाएगी।
भू-राजनीतिक दबावों के बीच स्वतंत्र कूटनीति की मिसाल
राष्ट्रपति पुतिन की यह यात्रा इस बात का भी प्रत्यक्ष प्रमाण है कि अंतरराष्ट्रीय दबावों और पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच भी दोनों देश अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को अक्षुण्ण रख सकते हैं। मजबूत रक्षा आधार, ऊर्जा सुरक्षा की पुख्ता गारंटी और स्वतंत्र विदेश नीति का यह अनूठा संगम भारत-रूस संबंधों को आने वाले दशकों के लिए अधिक व्यावहारिक और अटूट दिशा प्रदान करेगा।
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