Saturday , 12 September 2026

UP News: यूपी में जमीनी झंझटों से मिलेगी राहत, EWS सर्टिफिकेट से लेकर भूमि बंटवारा तक सब ऑनलाइन; खतौनी में अब दिखेगा….

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने राजस्व व्यवस्था को पारदर्शी और पूरी तरह हाईटेक बनाने की दिशा में बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। आम जनता को तहसीलों के अंतहीन चक्करों, दलालों के चंगुल और कागजी लेटलतीफी से निजात दिलाने के लिए तीन क्रांतिकारी डिजिटल सेवाएं शुरू की गई हैं। अब आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) प्रमाणपत्र बनवाना हो, जमीन का बंटवारा करना हो या खतौनी में सटीक रकबा देखना हो—ये सभी काम अब घर बैठे एक क्लिक पर होंगे। राजस्व परिषद की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल ने शुक्रवार को राजधानी लखनऊ स्थित आंबेडकर सभागार में ईडब्ल्यूएस पोर्टल, सरलीकृत खतौनी और धारा 116 के तहत भूमि विभाजन से जुड़े नए डिजिटल पोर्टल का विधिवत शुभारंभ किया।

घर बैठे बनेगा EWS प्रमाणपत्र, लेखपाल और तहसीलदार का काम भी ऑनलाइन ट्रैक

नए ईडब्ल्यूएस पोर्टल के अस्तित्व में आने से सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर नागरिकों को बड़ी राहत मिली है। अब आवेदक सीधे पोर्टल के जरिए ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकेंगे। यह डिजिटल फाइल सीधे संबंधित लेखपाल और तहसीलदार के लॉगिन में ट्रांसफर होगी और सत्यापन के बाद वहीं से डिजिटली निस्तारित की जाएगी। नागरिक अपने आवेदन की रियल-टाइम स्थिति (ट्रैकिंग स्टेटस) खुद ऑनलाइन देख सकेंगे। इस पारदर्शी व्यवस्था से तहसील कार्यालयों में फाइलों के अटकने की समस्या खत्म होगी और तय समयसीमा के भीतर जवाबदेही सुनिश्चित हो सकेगी।

सरलीकृत खतौनी में 6 दशमलव तक क्षेत्रफल, पुराने बंधक आदेश भी दिखेंगे

भू-अभिलेखों को आम जनता के समझने योग्य और विवादमुक्त बनाने के लिए ‘सरलीकृत खतौनी’ की शुरुआत की गई है। इस नई व्यवस्था में सबसे बड़ा सुधार यह हुआ है कि जमीन का क्षेत्रफल अब दशमलव के छह अंकों (सिक्स डेसिमल प्लेसेज) तक प्रदर्शित किया जाएगा। इससे रकबे के एक-एक इंच की जानकारी पूरी सटीकता के साथ दर्ज होगी और पैमाइश को लेकर होने वाले आपसी विवाद पूरी तरह खत्म हो जाएंगे। इसके साथ ही खतौनी में भू-अभिलेख कक्ष से जुड़े पुराने न्यायिक आदेश, बंधक दर्ज होने या निरस्त होने के संपूर्ण विवरण क्रमबद्ध तरीके से दर्ज मिलेंगे, जिससे भूमि की खरीद-फरोख्त में धोखाधड़ी की आशंका नगण्य हो जाएगी।

राजस्व संहिता की धारा 116: अब ऑनलाइन होगा पारिवारिक भूमि का बंटवारा

जमीन के पारिवारिक बंटवारे के विवादों को तेजी से निपटाने के लिए राजस्व संहिता की धारा 116 की प्रक्रिया को भी पूरी तरह डिजिटल कर दिया गया है। सह-खातेदार अब जमीन के वैध विभाजन के लिए पोर्टल पर ऑनलाइन वाद (केस) दायर कर सकेंगे। विभाजन से जुड़े अदालती नोटिस, उद्घोषणा और पक्षों को तलब करने का काम डिजिटल माध्यम से मॉनिटर होगा। मौके का मुआयना करने वाले लेखपाल की रिपोर्ट सीधे पोर्टल पर अपलोड होगी और भूमि की वास्तविक स्थिति जांचने के लिए डिजिटल मैप (मानचित्र) की सुविधा भी पोर्टल पर जोड़ी गई है। इससे राजस्व अदालतों में लंबित मुकदमों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित होगा।

अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल बोलीं- तकनीक का मकसद केवल ऑनलाइन करना नहीं, समाधान देना है

समारोह को संबोधित करते हुए राजस्व परिषद की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल ने कहा कि राजस्व प्रशासन का सीधा नाता आम जनमानस की भावनाओं और उनके मूल अधिकारों से जुड़ा है। उन्होंने जोर दिया कि तकनीक का लक्ष्य केवल फाइलों को कंप्यूटर में बदलना नहीं, बल्कि लोगों की समस्याओं का निष्पक्ष, संवेदनशील और पारदर्शी समाधान निकालना है। उन्होंने राजस्व अधिकारियों से अपील की कि वे तकनीक का अधिकतम लाभ उठाकर जनता को त्वरित न्याय दिलाएं ताकि व्यवस्था में जन-विश्वास और मजबूत हो सके।

ट्रेनी पीसीएस अधिकारियों को दी गई रोवर तकनीक से भूमि पैमाइश की ट्रेनिंग

इस मौके पर राजस्व परिषद पहुंचे पीसीएस प्रशिक्षु अधिकारियों के साथ विशेष संवाद सत्र आयोजित किया गया। युवा अधिकारियों को क्षेत्रीय राजस्व व्यवस्था की जमीनी चुनौतियों और डिजिटल कार्यप्रणाली की बारीकियों से रूबरू कराया गया। कार्यक्रम में अधिकारियों को ‘रोवर तकनीक’ (GNSS Rover) के जरिए सैटेलाइट-बेस्ड अत्याधुनिक और सटीक भूमि मापन का सजीव प्रदर्शन करके दिखाया गया। प्रशिक्षु अफसरों ने फील्ड स्तर पर आने वाले कानूनी विवादों और तकनीक के बेहतर समन्वय को लेकर उच्चाधिकारियों से सवाल-जवाब भी किए।

 

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