Sunday , 4 October 2026

Saharanpur PNB Fake Currency Case : 11 हजार कमाने वाला लोडर निकला कुबेर, 5 मकान, लग्जरी कारें और अपना ड्राइवर; 17.29 करोड़ के फर्जी नोट कांड में NIA का शिकंजा

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के करेंसी चेस्ट से बरामद हुए 17.29 करोड़ रुपये के जाली नोटों के बहुचर्चित सिंडिकेट में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के हाथ एक बड़ा सुराग लगा है। इस पूरे घोटाले के केंद्र में बैंक का एक ऐसा संविदा कर्मचारी आ गया है, जिसकी कागजी पगार तो महज 11,000 रुपये प्रति माह है, लेकिन उसकी ठाठ-बाट और अकूत संपत्तियां देखकर जांच अधिकारी भी दंग रह गए। जांच एजेंसियों को पुख्ता अंदेशा है कि करेंसी चेस्ट के निलंबित मुख्य प्रबंधक अमित कुमार के साथ मिलकर इसी संविदा कर्मी ने असली भारतीय मुद्रा को बाहर निकालकर उसकी जगह हूबहू दिखने वाले जाली नोटों की गड्डियां फिट की थीं। गौरतलब है कि मामले के मास्टरमाइंड निलंबित मैनेजर अमित कुमार को एनआईए पहले ही चंडीगढ़ से धर दबोच चुकी है।

11 हजार की तनख्वाह, 5 आलीशान मकान और खुद का रखा था पर्सनल ड्राइवर

सहारनपुर पुलिस और राष्ट्रीय जांच एजेंसी की संयुक्त पड़ताल में संविदा कर्मचारी की आय और उसके पास मौजूद बेनामी संपत्तियों के बीच जमीन-आसमान का फासला सामने आया है। शुरुआती छानबीन के अनुसार, महज 11 हजार रुपये कमाने वाला यह चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पांच आलीशान मकानों, एक महंगी एसयूवी, एक सेडान कार और दो दोपहिया वाहनों का मालिक निकला। सबसे हैरतअंगेज पहलू यह रहा कि खुद ड्राइवर-लोडर के पद पर तैनात यह आरोपी अपनी निजी एसयूवी खुद चलाने के बजाय 500 रुपये रोजाना की दिहाड़ी पर पर्सनल ड्राइवर रखता था। पुलिस और जांच एजेंसियों ने उसके जनकपुरी व मानकमऊ स्थित ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर जमीन-जायदाद के बैनामे, बैंक पासबुक और गाड़ियों के पंजीकरण दस्तावेज जब्त कर लिए हैं।

सुरक्षा नियमों की धज्जियां उड़ाकर चेस्ट मैनेजर का ‘राइट हैंड’ बना था लोडर

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की सख्त गाइडलाइंस के मुताबिक, किसी भी बैंक का करेंसी चेस्ट ‘हाई-सिक्योरिटी जोन’ होता है, जहां अनाधिकृत स्टाफ तो दूर, सामान्य बैंक कर्मियों का प्रवेश भी पूरी तरह वर्जित रहता है। कागजों में इस संविदा कर्मी का काम सिर्फ कैश वैन को चलाना और नोटों के बक्सों की लोडिंग-अनलोडिंग तक सीमित था। इसके उलट, हकीकत यह थी कि वह करेंसी चेस्ट के अंदर निलंबित मैनेजर अमित कुमार के बेहद करीबी निजी सहायक (PA) की तरह काम करता था। चेस्ट के मुख्य वॉल्ट एरिया में उसका बेरोकटोक आना-जाना था। जांच दल अब यह कड़ियां जोड़ रहे हैं कि किस तरह तिजोरी के भीतर असली नोटों के बंडलों से नकदी निकाली गई और उसकी जगह पर जाली नोट सेट कर असली रुपयों को बाहर ठिकाने लगाया गया।

नेपाल बॉर्डर और विदेशी सिंडिकेट से जुड़े तार, NIA और SIT कर रहीं पड़ताल

एनआईए और एसआईटी अब इस बड़े सवाल की तह तक जाने में जुटी हैं कि 17.29 करोड़ रुपये के 500-500 के उच्च गुणवत्ता वाले नकली नोट (FICN) आखिर कहां से सप्लाई किए गए। क्या इस रैकेट का सीधा कनेक्शन नेपाल सीमा या किसी सीमापार विदेशी जाली नोट नेटवर्क से जुड़ा हुआ है? इसके अलावा एनआईए और आरबीआई की संयुक्त ऑडिट टीम इस गंभीर आशंका की भी बारीकी से जांच कर रही है कि पकड़े गए खेप के अलावा जाली नोटों का कोई हिस्सा पहले ही विभिन्न बैंक शाखाओं, एटीएम मशीनों या खुले बाजार में तो नहीं खपा दिया गया।

 

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