
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी तनाव और युद्ध के हालातों के बीच भारत की मजबूत विदेश नीति का डंका बज रहा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को पश्चिम एशिया के साथ भारत के द्विपक्षीय संबंधों को लेकर विदेश मंत्रालय की परामर्श समिति की अहम बैठक की अध्यक्षता की। इस उच्चस्तरीय बैठक में उन्होंने विस्तार से समझाया कि पूरे क्षेत्र में बारूद सुलगने के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और नागरिकों पर इसका कोई प्रतिकूल असर क्यों नहीं पड़ा। जयशंकर ने जोर देकर कहा कि इस भीषण संकट के बीच भी भारत अपने राष्ट्रीय हितों को पूरी तरह सुरक्षित रखने में कामयाब रहा है।
युद्ध के दौर में भी नहीं थमी ऊर्जा आपूर्ति, प्रवासी भारतीय पूरी तरह सुरक्षित
संसदीय समिति को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि जंग के साए में भी भारत की कूटनीति पूरी तरह सफल साबित हुई है। खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है और देश के लिए ऊर्जा (कच्चा तेल व गैस) की आपूर्ति बिना किसी रुकावट के लगातार जारी है। बैठक के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए उन्होंने लिखा कि भारत के संबंध खाड़ी देशों और पश्चिम एशिया-उत्तरी अफ्रीका (WANA) क्षेत्र के साथ बेहद गहरे और रणनीतिक हैं। चर्चा का मुख्य केंद्र व्यापार, निवेश, ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री सहयोग और जनता के आपसी संबंधों को और सुदृढ़ करने पर केंद्रित रहा। उन्होंने दोहराया कि अशांति के इस मुश्किल दौर में भारतीय प्रवासियों का संरक्षण और आवश्यक आपूर्ति श्रृंखला बनाए रखना सरकार का सर्वोच्च संकल्प है।
अमेरिका और ईरान दोनों से संतुलन साधने वाला इकलौता देश भारत
सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, बैठक के दौरान कई सांसदों ने पश्चिम एशिया में गहराते सैन्य संकट और उससे भारत की ऊर्जा जरूरतों पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को लेकर सवाल उठाए। इस पर विदेश मंत्री ने बताया कि भारत किसी एक देश या मार्ग पर निर्भर रहने के बजाय अपनी ऊर्जा आपूर्ति के स्रोतों में लगातार विविधता ला रहा है, जिससे किसी भी आकस्मिक संकट से निपटा जा सके। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि मौजूदा वैश्विक परिदृश्य में भारत अकेला ऐसा देश है, जिसके अमेरिका और ईरान दोनों के साथ संतुलित व मजबूत रिश्ते कायम हैं। बैठक में खाड़ी देशों में आजीविका चला रहे लगभग एक करोड़ भारतीय प्रवासियों के हितों की रक्षा पर भी गंभीर मंथन हुआ। इसके साथ ही जयशंकर ने संघर्ष के बाद ईरान से कच्चे तेल व अन्य जरूरी सामान की खरीद पर लागू अमेरिकी प्रतिबंधों की व्यावहारिक स्थिति का भी उल्लेख किया।
मक्का रक्षा समझौते पर सांसदों की चिंता, भारत ने साधे राजनीतिक समीकरण
बैठक में सांसदों ने पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हाल ही में हुए ‘मक्का रक्षा समझौते’ को लेकर भी चिंता जाहिर की और इस पर भारत के रुख के बारे में जानना चाहा। गौरतलब है कि 7 अगस्त को हस्ताक्षरित इस त्रिपक्षीय समझौते में यह प्रावधान किया गया है कि यदि तीनों में से किसी भी एक देश पर हमला होता है, तो उसे तीनों पर हमला माना जाएगा। इस कदम को पश्चिम एशिया के बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों और सुरक्षा व्यवस्था से जोड़कर देखा जा रहा है। सांसदों के सवालों के बीच विदेश मंत्री ने आश्वस्त किया कि भारत ने पश्चिम एशिया में अपने कूटनीतिक और राजनीतिक संबंधों को पहले से कहीं अधिक मजबूत और व्यापक बना लिया है, जिससे देश की सुरक्षा और संप्रभुता से कोई समझौता न हो।
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