
औरैया। उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में करीब छह साल पुराने बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड में एमपी-एमएलए विशेष अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पूर्व सपा एमएलसी कमलेश पाठक समेत सभी 10 दोषियों को आजीवन सश्रम कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश विनय प्रकाश की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रत्येक दोषी पर 50-50 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। 900 से अधिक तारीखों तक चली लंबी अदालती सुनवाई के बाद आए इस फैसले को लेकर पूरे कचहरी परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे।
अदालत ने इन 10 आरोपियों को ठहराया दोषी
अदालत ने अभियोजन पक्ष की दलीलों और पुलिस द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर सभी आरोपियों को हत्या, हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट के तहत दोषी करार दिया। सजा पाने वालों में पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक, उनके भाई संतोष पाठक, रामू पाठक, कुलदीप अवस्थी उर्फ पप्पू, विकल्प अवस्थी उर्फ चैनू अवस्थी, राजेश शुक्ला भगवताचार्य, अवनीश प्रताप सिंह, आशीष दुबे, शिवम अवस्थी और रविंद्र उर्फ लला चौबे शामिल हैं।
पंचमुखी मंदिर पर कब्जे को लेकर हुआ था खूनी संघर्ष
यह सनसनीखेज वारदात 15 मार्च 2020 को औरैया कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला नारायणपुर में हुई थी। नारायणपुर स्थित पंचमुखी मंदिर के स्वामित्व और कब्जे को लेकर दोनों पक्षों के बीच पुराना विवाद चल रहा था। विवाद इतना बढ़ गया कि आरोपियों ने दिनदहाड़े अंधाधुंध फायरिंग कर अधिवक्ता मंजुल चौबे और उनकी बहन सुधा चौबे की गोली मारकर निर्मम हत्या कर दी थी। घटना के बाद मृतक के भाई आशीष कुमार की तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने नामजद एफआईआर दर्ज कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
प्रभावी पैरवी और 900 तारीखों के बाद मिला इंसाफ
पुलिस विवेचना और मॉनीटरिंग टीम के साथ अभियोजन अधिकारी चंद्रभूषण तिवारी एवं पैरोकार हेड कांस्टेबल विनय कुमार ने न्यायालय में सभी गवाहों व मजबूत साक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पेश किया। लंच के बाद जब अदालत ने सजा का एलान किया, तो सुरक्षा के मद्देनजर भारी पुलिस बल और पीएसी तैनात रही। सजा सुनाए जाने के तुरंत बाद सभी दोषियों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जेल भेज दिया गया। पीड़ित परिवार ने फैसले पर संतोष व्यक्त करते हुए इसे न्याय की जीत बताया है।
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