Saturday , 15 August 2026

यूएन रिपोर्ट का सनसनीखेज खुलासा: दिल्ली लाल किला हमले के पीछे अल-कायदा का हाथ, AI और यूट्यूब से रची गई थी तबाही की साजिश

नई दिल्ली: दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले पर पिछले साल नवंबर में हुए भीषण कार बम धमाके को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। संयुक्त राष्ट्र (UN) की हालिया रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि की गई है कि इस आतंकवादी हमले की पूरी साजिश खूंखार आतंकी संगठन अल-कायदा ने रची थी। यूएन की वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार, इस हमले के लिए सीधे तौर पर ‘अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट’ (AQIS) जिम्मेदार है। इस खुलासे के बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय खुफिया तंत्र में खलबली मच गई है।

छोटे समूहों में बंटकर नेटवर्क फैला रहा है AQIS

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में चिंता जताते हुए कहा गया है कि AQIS एक बिखरे हुए गुट से निकलकर अब एक संगठित क्षेत्रीय आतंकी संगठन के रूप में उभर रहा है। इस संगठन ने बहुत कम समय में अपना मजबूत लॉजिस्टिक्स और वित्तीय नेटवर्क तैयार कर लिया है। सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए यह संगठन केंद्रीय कमान के बजाय ‘विकेंद्रीकरण’ (Decentralization) की रणनीति पर काम कर रहा है। इसके तहत देश और क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों में बेहद छोटे और गुप्त स्लीपर सेल्स तैयार किए जा रहे हैं। रिपोर्ट में यह चेतावनी भी दी गई है कि AQIS अब भारत के बाद बांग्लादेश में भी तेजी से अपने ठिकाने और सेल्स बनाने की कोशिश में जुटा है।

‘टेरर इंजीनियरिंग’ के लिए ChatGPT और यूट्यूब का इस्तेमाल

इस पूरे मामले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने भी अदालत में बेहद चौंकाने वाले तथ्य पेश किए थे। मई में दाखिल की गई चार्जशीट में NIA ने खुलासा किया कि इस हमले में शामिल आतंकियों ने ‘टेरर इंजीनियरिंग’ के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक टेक्नोलॉजी का सहारा लिया था। मुख्य आरोपी जासिर बिलाल वानी ने ChatGPT और YouTube जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करके यह सीखा कि रॉकेट IED कैसे तैयार किया जाए और उसमें विस्फोटकों का सही अनुपात क्या होना चाहिए। आरोपियों ने प्रयोगशाला स्तर की बारीकी से रॉकेट-आधारित इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) तैयार किए और जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के काजीगुंड जंगलों में इनका बाकायदा परीक्षण भी किया था।

7,500 पन्नों की चार्जशीट में बड़े-बड़े नामजद

मामले में एनआईए द्वारा दाखिल 7,500 से अधिक पन्नों की विस्तृत चार्जशीट के अनुसार, 10 नवंबर को हुए इस भीषण कार धमाके में 11 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे। चार्जशीट में ‘अंसार गजवत-उल-हिंद’ (AGuH) के एक इन-हाउस इंजीनियर का भी नाम सामने आया है, जिसका सीधा संबंध AQIS से है। गृह मंत्रालय पहले ही AQIS और उससे जुड़े तमाम गुटों को प्रतिबंधित आतंकी संगठन घोषित कर चुका है।

जांच के घेरे में आई हरियाणा की अल-फलाह यूनिवर्सिटी

जांच के दौरान एक और बड़ा खुलासा हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी को लेकर हुआ है। आरोपी जासिर बिलाल वानी हमले को तकनीकी रूप से अंजाम देने के लिए साल 2024-25 के दौरान कई बार अल-फलाह यूनिवर्सिटी कैंपस गया और वहां ठहरा भी। सुरक्षा एजेंसियों की जांच तब और गहरी हो गई जब इस साजिश में यूनिवर्सिटी से जुड़े तीन डॉक्टरों की भूमिका उजागर हुई।

डॉ. अदील अहमद राथर ने मुख्य आरोपी जासिर की मुलाकात डॉ. उमर-उन-नबी से करवाई थी। डॉ. उमर ही वह शख्स था जिसने बारूद और रसायनों से भरी कार को लाल किले के पास चलाकर विस्फोट किया था। आरोप है कि डॉ. अदील ने पोटेशियम नाइट्रेट (NPK फ़र्टिलाइज़र) और चीनी जैसी सामग्री जासिर तक पहुँचाई थी, जिसका इस्तेमाल घातक IED बनाने में किया गया। फिलहाल देश की शीर्ष एजेंसियां इस पूरे मॉड्युल से जुड़े अन्य नेटवर्क को खंगालने में जुटी हुई हैं।

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