
नई दिल्ली/लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ को एक वैश्विक पर्यटन केंद्र बनाने की दिशा में योगी सरकार को देश की सर्वोच्च अदालत से बड़ी कामयाबी मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ के कुकरैल रिजर्व फॉरेस्ट में ‘नाइट सफारी और जूलॉजिकल पार्क प्रोजेक्ट’ को आगे बढ़ाने की आधिकारिक मंजूरी दे दी है। पूरे रिजर्व फॉरेस्ट एरिया के प्रभावित होने संबंधी आपत्तियों को खारिज करते हुए जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली तीन जजों की पीठ ने बेहद तल्ख और महत्वपूर्ण टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा, “क्या यह देश ऐसे ही रुका रहना चाहिए? पारंपरिक चिड़ियाघर अब पुराने हो चुके हैं, और इन सब चीजों की निगरानी के लिए विशेषज्ञ (एक्सपर्ट्स) मौजूद हैं।”
सीईसी (CEC) रखेगी पैनी नजर, 3 महीने में देनी होगी पहली रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने प्रोजेक्ट को हरी झंडी देने के साथ ही पर्यावरण सुरक्षा का भी पूरा ख्याल रखा है। अदालत ने सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) के सदस्यों को समय-समय पर निर्माण स्थल (साइट) का दौरा करने का कड़ा निर्देश दिया है। इसके साथ ही कमेटी को कोर्ट में नियमित रूप से अपनी निरीक्षण रिपोर्ट सौंपनी होगी, जिसमें पहली रिपोर्ट अगले 3 महीने के भीतर जमा करनी होगी। सुनवाई के दौरान जब याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि इस प्रोजेक्ट से पूरे कुकरैल जंगल का माहौल खराब होगा, तो कोर्ट ने साफ किया कि विशेषज्ञों की देखरेख में सभी जरूरी सावधानियां बरती जा सकती हैं।
वाइल्डलाइफ कॉरिडोर के दायरे में नहीं है प्रोजेक्ट, हटाई जाएंगी बाहरी प्रजातियां
सर्वोच्च अदालत में सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से भरोसा दिलाया गया कि वन संरक्षण के लिए सभी जरूरी और कड़े कदम उठाए जाएंगे। कोर्ट को सूचित किया गया कि कुकरैल जंगल से इनवेसिव स्पीशीज (बाहरी/नुकसानदेह प्रजातियों) को पूरी तरह से हटाया जाएगा। इसके अतिरिक्त, तकनीकी रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया कि यह प्रस्तावित प्रोजेक्ट किसी भी प्रकार के मौजूदा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर (वन्यजीव गलियारे) के दायरे में नहीं आता है। सीईसी ने भी कड़ी शर्तों के साथ इस नाइट सफारी को अपनी मंजूरी देने की सिफारिश की थी, जिसे राज्य सरकार ने पूरी तरह स्वीकार कर लिया है।
लखनऊ जू को शिफ्ट करने का प्रस्ताव खारिज, एडवेंचर जोन भी हुआ कैंसल
इस महापरियोजना को मंजूरी देते समय सीईसी ने पर्यावरण और वन्यजीवों की संवेदनशीलता को देखते हुए कुछ महत्वपूर्ण बदलाव भी किए हैं:
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जू शिफ्टिंग पर रोक: सरकार के उस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया गया है जिसमें वर्तमान 72 एकड़ में फैले लखनऊ चिड़ियाघर (जू) को कुकरैल में शिफ्ट करने की योजना थी।
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सड़क की चौड़ाई घटी: जंगल के बीच से गुजरने वाली मौजूदा सड़क को पहले प्रस्तावित 4-लेन के बजाय केवल 2-लेन का ही बनाने की अनुमति दी गई है।
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एडवेंचर जोन कैंसल: शुरुआत में प्लान किए गए एडवेंचर जोन (जिसमें ट्राम सर्विस, अंधेरे में जंगल का अनुभव और ऑगमेंटेड रियलिटी थिएटर शामिल थे) को पूरी तरह से निरस्त कर दिया गया है।
5,000 हेक्टेयर में बनेगा देश का पहला अर्बन नाइट सफारी, 1 के बदले लगेंगे 10 पेड़
दो चरणों (फेज) में विभाजित यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट लगभग 5,000 हेक्टेयर के विशाल कुकरैल रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र में आकार लेगा, जो देश की पहली अर्बन नाइट सफारी होगी। इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 1,500 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत आएगी। नियमों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सरकार को सेंट्रल जू अथॉरिटी (CZA) की सभी गाइडलाइंस का सख्ती से पालन करना होगा। साथ ही, केवल उन्हीं पेड़ों को काटने की अनुमति होगी जो इंजीनियरिंग मॉडिफिकेशन और रीडिजाइनिंग के लिए बेहद जरूरी हैं। पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए 1:10 का सख्त नियम लागू रहेगा, यानी यदि प्रोजेक्ट के लिए 1 पेड़ काटा जाता है, तो उसके बदले 10 नए पौधे रोपने होंगे।
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