Tuesday , 14 July 2026

Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन पर साल का आखिरी चंद्र ग्रहण! क्या राखी बांधने के शुभ मुहूर्त पर मंडराएगा सूतक काल का साया? जानिए हर सवाल का जवाब

नई दिल्ली। भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक रक्षाबंधन का पावन पर्व इस बार एक बेहद दुर्लभ और अनोखे संयोग के साथ आने वाला है। इस साल 28 अगस्त को मनाए जाने वाले रक्षाबंधन के दिन ही साल का आखिरी चंद्र ग्रहण भी लगने जा रहा है। जैसे ही इस अद्भुत खगोलीय घटना की खबर सामने आई है, देश भर के भाई-बहनों और परिवारों के मन में कई तरह की शंकाएं और सवाल उठने लगे हैं। हर कोई यह जानने को बेताब है कि क्या इस साल राखी बांधने के पावन और शुभ मुहूर्त पर ग्रहण का कोई साया पड़ेगा? क्या ग्रहण की वजह से सूतक काल मान्य होगा और बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांध पाएंगी या नहीं? आइए, ज्योतिष शास्त्र और पंचांग के अनुसार जानते हैं इन सभी जरूरी सवालों के सटीक जवाब।

कब लगेगा साल का अंतिम चंद्र ग्रहण?

द्रिक पंचांग की गणना के अनुसार, साल 2026 का यह अंतिम चंद्र ग्रहण 28 अगस्त, शुक्रवार को सुबह 6 बजकर 55 मिनट पर शुरू हो जाएगा। वहीं, इस खगोलीय घटना का समापन दोपहर 12 बजकर 30 मिनट पर होगा। इस लिहाज से देखा जाए तो चंद्र ग्रहण की कुल अवधि करीब 5 घंटे 35 मिनट की रहने वाली है। चूंकि यह इस साल का आखिरी चंद्र ग्रहण है, इसलिए इसे लेकर आम लोगों से लेकर ज्योतिषियों में भी काफी उत्सुकता देखी जा रही है।

क्या भारत में दिखाई देगा यह चंद्र ग्रहण?

ग्रहण को लेकर सबसे महत्वपूर्ण और राहत देने वाली बात यह है कि यह चंद्र ग्रहण भारत में बिल्कुल भी दिखाई नहीं देगा। जब यह ग्रहण लगेगा, उस समय भारत में दिन का उजाला रहेगा और चंद्रमा क्षितिज के नीचे होगा। यही वजह है कि देश के किसी भी हिस्से से इस खगोलीय घटना को देख पाना मुमकिन नहीं होगा। हिंदू धर्मशास्त्रों और ज्योतिष विज्ञान में यह स्पष्ट मान्यता है कि जिस ग्रहण का दृश्य प्रभाव किसी स्थान पर नहीं होता, वहां उससे जुड़े कोई भी धार्मिक नियम या पाबंदियां लागू नहीं होती हैं। इसलिए, भारत में इस ग्रहण को लेकर किसी भी प्रकार की धार्मिक बाध्यता नहीं मानी जाएगी।

क्या रक्षाबंधन के शुभ मुहूर्त पर पड़ेगा इसका असर?

रक्षाबंधन के पावन पर्व पर चंद्र ग्रहण की खबर सुनते ही कई बहनें इस बात को लेकर चिंतित थीं कि कहीं उनके भाइयों को राखी बांधने का समय तो प्रभावित नहीं हो जाएगा। लेकिन अब आपको परेशान होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। चूंकि यह ग्रहण भारत में अदृश्य रहेगा, इसलिए इसका रक्षाबंधन के त्योहार या इसके शुभ मुहूर्त पर रत्ती भर भी नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। बहनें बिना किसी डर या दुविधा के पंचांग द्वारा निर्धारित किए गए शुभ समय में अपने भाइयों की कलाई पर प्यार से राखी बांध सकेंगी।

क्या इस बार सूतक काल मान्य होगा?

सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल की गणना और उसके नियम तभी लागू किए जाते हैं जब ग्रहण किसी भौगोलिक क्षेत्र में प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देता है। चूंकि 28 अगस्त 2026 को लगने वाला यह चंद्र ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं है, इसलिए यहां सूतक काल पूरी तरह से अमान्य होगा। इसका सीधा मतलब यह है कि त्योहार के दिन न तो मंदिरों के कपाट बंद किए जाएंगे, न पूजा-पाठ रोकी जाएगी और न ही अन्य किसी मांगलिक कार्यों पर प्रतिबंध रहेगा। सभी श्रद्धालु और आम लोग सामान्य दिनों की तरह ही हर्षोल्लास के साथ पूजा-अर्चना और त्योहार मना सकेंगे।

रक्षाबंधन पर राखी बांधने का सबसे शुभ मुहूर्त

ज्योतिषीय पंचांग के अनुसार, इस बार रक्षाबंधन के दिन भाइयों को राखी बांधने का सबसे उत्तम और शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 10 मिनट से शुरू हो जाएगा। यह मंगलकारी मुहूर्त सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक बना रहेगा। इस प्रकार बहनों को अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र सजाने के लिए कुल 3 घंटे 37 मिनट का लंबा और बेहद शुभ समय मिलेगा। इस अवधि में राखी बांधना भाई और बहन दोनों के जीवन में सुख, समृद्धि और दीर्घायु लेकर आएगा।

 

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