Tuesday , 14 July 2026

UNSC में भारत की ‘महा-दावेदारी’: ‘SHANTI’ विजन के साथ मैदान में उतरा हिंदुस्तान; राह में खड़ा है ये मुस्लिम देश, समझें जीत का पूरा गणित

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक बार फिर भारत का डंका बजने जा रहा है. वैश्विक मंच पर अपनी धाक जमाने के लिए भारत ने साल 2028-29 के कार्यकाल के लिए सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता का अपना आधिकारिक अभियान शुरू कर दिया है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस महा-अभियान के लिए भारत के विशेष ‘SHANTI’ विजन को दुनिया के सामने पेश किया है.

पूरी दुनिया इस समय रूस-यूक्रेन युद्ध, गाजा संकट और ईरान-इजराइल के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tension) से जूझ रही है. ऐसे नाजुक दौर में भारत का यह कदम वैश्विक शांति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है. संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में होने वाले इस चुनाव को जीतने के लिए भारत को दो-तिहाई यानी कम से कम 128 से 129 देशों के वोटों की जरूरत होगी.

आइए 6 बड़े पॉइंट्स के जरिए आसान भाषा में समझते हैं कि सुरक्षा परिषद का यह चुनाव कैसे होता है, भारत की दावेदारी कितनी मजबूत है और स्थायी सदस्यता (Permanent Seat) का सपना आखिर कब तक पूरा हो पाएगा.

 

UNSC में भारत की दावेदारी कितनी मजबूत और क्या है चुनौती?

भारत इस समय ‘ग्लोबल साउथ’ यानी विकासशील और गरीब देशों की बुलंद आवाज बनकर उभरा है. साल 2028-29 के कार्यकाल के लिए यह चुनाव अगले साल यानी जून 2027 में आयोजित किए जाएंगे. भारत की इस दावेदारी का अमेरिका, फ्रांस, ऑस्ट्रिया, फिजी और श्रीलंका जैसे कई ताकतवर और मित्र देशों ने खुलकर समर्थन किया है.

हालांकि, इस बार भारत की राह इतनी आसान नहीं रहने वाली है. एशिया-प्रशांत समूह (Asia-Pacific Group) की इस इकलौती सीट के लिए इस बार कजाकिस्तान या किर्गिस्तान नहीं, बल्कि ताजिकिस्तान भारत के सामने सीना ताने खड़ा है. ताजिकिस्तान को 57 मुस्लिम देशों के संगठन (OIC) का समर्थन मिलने की प्रबल संभावना है. ऐसे में इस कड़े मुकाबले को जीतने के लिए भारत को एक बड़ी और आक्रामक कूटनीतिक लामबंदी करनी होगी.

UNSC में भारत का इतिहास: 8 बार रह चुका है सदस्य

ऐसा नहीं है कि भारत पहली बार इस कुर्सी की दौड़ में शामिल है. भारत अब तक 8 बार UNSC का अस्थायी सदस्य रह चुका है. वैश्विक शांति बनाए रखने में भारत का रिकॉर्ड बेहद शानदार रहा है. संयुक्त राष्ट्र की शांति सेना (UN Peacekeeping) में भारत दुनिया के सबसे बड़े योगदानकर्ताओं में से एक है. भारत अब तक 50 से अधिक मिशनों में अपने 3 लाख से ज्यादा जांबाज सैनिक भेज चुका है.

इसके अलावा, भारत ने हमेशा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के खात्मे, समुद्री सुरक्षा, रंगभेद और उपनिवेशवाद के खिलाफ अग्रणी भूमिका निभाई है. साल 2021-22 में अपने पिछले कार्यकाल के दौरान, जब पूरी दुनिया कोरोना महामारी से कराह रही थी, तब भारत ने ‘वैक्सीन कूटनीति’ के जरिए दर्जनों देशों की मदद करके अपनी वैश्विक लीडरशिप का लोहा मनवाया था.

स्थायी सदस्यता का सपना कब होगा पूरा?

भारत अब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में महज दो साल का ‘मेहमान’ बनकर नहीं रहना चाहता, बल्कि देश का असली लक्ष्य वीटो पावर वाली स्थायी सदस्यता (Permanent Seat) हासिल करना है. वर्तमान में सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों (P5) का कार्यकाल कभी खत्म नहीं होता और उनके पास किसी भी फैसले को पलटने की ‘वीटो पावर’ होती है, जबकि अस्थायी सदस्य केवल 2 साल के लिए चुने जाते हैं और उनके पास वीटो की शक्ति नहीं होती.

आज के समय में दुनिया की सबसे बड़ी आबादी, पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और विश्व शांति में सबसे बड़ा मददगार होने के नाते भारत इस स्थायी सीट पर अपना स्वाभाविक हक मानता है. अमेरिका, रूस, फ्रांस और ब्रिटेन जैसे शक्तिशाली देश भारत की स्थायी सदस्यता का मौखिक समर्थन तो करते हैं, लेकिन चीन हमेशा इसमें अपना अड़ंगा लगा देता है. यही वजह है कि भारत, जापान, जर्मनी और ब्राजील (G4 देश) मिलकर संयुक्त राष्ट्र के 1945 पुराने ढांचे में तत्काल सुधार की मांग कर रहे हैं.

आखिर कैसे काम करता है संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का सिस्टम?

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का प्राथमिक काम दुनिया में अमन-चैन और सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखना है. इस परिषद में कुल 15 सदस्य देश होते हैं, जिनमें 5 स्थायी (P5) और 10 अस्थायी सदस्य शामिल हैं. P5 देशों में अमेरिका, चीन, रूस, फ्रांस और ब्रिटेन शामिल हैं.

सुरक्षा परिषद के पास दुनिया के बड़े फैसले लेने का अधिकार होता है, जैसे किसी देश पर आर्थिक प्रतिबंध लगाना, शांति सेना भेजना या अंतरराष्ट्रीय सैन्य कार्रवाई को मंजूरी देना. परिषद में कोई भी प्रस्ताव पास करने के लिए 9 वोटों की जरूरत होती है, बशर्ते किसी भी स्थायी सदस्य ने वीटो पावर का इस्तेमाल न किया हो. अगर दुनिया के 14 देश किसी प्रस्ताव के पक्ष में हों और सिर्फ एक स्थायी देश वीटो कर दे, तो वह प्रस्ताव वहीं रद्दी के ढेर में चला जाता है. अस्थायी सदस्यों को परिषद की अध्यक्षता करने और प्रस्ताव लाने का मौका तो मिलता है, लेकिन वे वीटो नहीं कर सकते.

भारत की विदेश नीति के लिए क्यों संजीवनी है यह सीट?

सुरक्षा परिषद की यह सीट भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के लिए बेहद मायने रखती है. लश्कर-ए-तैयबा या जैश-ए-मोहम्मद जैसे पाकिस्तानी आतंकियों को ‘ग्लोबल टेररिस्ट’ घोषित करवाने और कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के झूठे प्रोपेगैंडा को अंतरराष्ट्रीय मंच पर ध्वस्त करने के लिए यह सीट भारत को एक बेहद मजबूत मंच देती है.

इसके अलावा, जब भी दुनिया में कोई युद्ध (जैसे यूक्रेन या गाजा संकट) होता है, तो सबसे ज्यादा मार गरीब देशों पर पड़ती है, जहां तेल, अनाज और फर्टिलाइजर का संकट खड़ा हो जाता है. भारत इन वैश्विक संकटों के बीच किसी गुटबाजी का हिस्सा न बनकर हमेशा डायलॉग और डिप्लोमेसी (बातचीत और कूटनीति) का रास्ता सुझाता है और ग्लोबल साउथ के हितों की रक्षा करता है.

समझिए UNSC चुनाव का पूरा गणित और वोटिंग प्रक्रिया

सुरक्षा परिषद के अस्थायी सदस्यों के चुनाव की प्रक्रिया बेहद सख्त होती है, जो पूरी तरह क्षेत्रीय कोटे (Regional Groups) पर आधारित है. कुल 10 अस्थायी सीटों में से 5 सीटें अफ्रीकी और एशियाई देशों के लिए, 1 पूर्वी यूरोप, 2 लैटिन अमेरिका और 2 सीटें पश्चिमी यूरोप व अन्य देशों के लिए आरक्षित होती हैं. हर साल 5 सीटों के लिए मतदान होता है.

साल 2028-29 के लिए एशिया-प्रशांत समूह के खाते में महज एक सीट आई है, जिस पर भारत और ताजिकिस्तान के बीच आमने-सामने की सीधी टक्कर है. यह चुनाव संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में सीक्रेट बैलेट यानी गुप्त मतदान के जरिए होता है. नियम के मुताबिक, जीत दर्ज करने के लिए उपस्थित सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत हासिल करना अनिवार्य है. संयुक्त राष्ट्र में कुल 193 सदस्य देश हैं, जिसका मतलब है कि भारत को कम से कम 128-129 देशों का समर्थन जुटाना होगा. साल 2021 के चुनाव में भारत ने 192 में से 184 वोट हासिल कर एकतरफा जीत दर्ज की थी. हालांकि इस बार ताजिकिस्तान की एंट्री से मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है, लेकिन भारत की मजबूत वैश्विक साख और कूटनीतिक पकड़ को देखते हुए भारत का पलड़ा भारी नजर आ रहा है.

 

Check Also

धार भोजशाला विवाद: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश—परिसर में नहीं होगा कोई ढांचागत बदलाव, शुक्रवार की नमाज के लिए अलग जगह देने का प्रस्ताव

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक और बेहद संवेदनशील धार भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट …