Monday , 13 July 2026

कानपुर का ‘सूर्या होटल’ कांड: साढ़े 3 घंटे का वो रहस्य, जिसने हंसते-हंसते ले ली दो जिंदगी; प्यार, धोखा या सामूहिक सुसाइड?

 

कानपुर: शहर के कलक्टरगंज थाना क्षेत्र स्थित घंटाघर के ‘सूर्या होटल’ के कमरा नंबर 106 में हुआ वाकया अब भी एक अनसुलझी पहेली बना हुआ है। मोहब्बत के इस दर्दनाक अंत का असली सच भले ही फिलहाल होटल के उसी कमरे में दफन हो, लेकिन मौत के बाद खुद को पाक-साफ दिखाने के लिए परिजनों द्वारा परोसे गए झूठ की परतें अब एक-एक कर बेपर्दा होने लगी हैं।

शुरुआती जांच में यह साफ हो गया है कि फतेहपुर के दिग्विजय सिंह और उन्नाव की शिवांगी तिवारी के परिजनों को उनके बीच चल रहे प्रेम प्रसंग की पूरी भनक थी। इस रिश्ते का घर की चहारदीवारी के भीतर लगातार विरोध हो रहा था। इस बीच, शिवांगी अपने पति से बिना तलाक लिए दिग्विजय के साथ लिव-इन रिलेशनशिप (सहमति संबंध) में रहने का कानूनी रास्ता तलाश रही थी। इसी कशमकश के बीच दोनों होटल पहुंचे, जहां उनका सफर हमेशा के लिए थम गया।

होटल के रिसेप्शन पर खिले चेहरे, फिर कमरा नंबर 106 में क्या हुआ?

शनिवार की दोपहर करीब 12:30 बजे दिग्विजय और शिवांगी बेहद सामान्य और हंसते-खिलखिलाते हुए होटल सूर्या के रिसेप्शन पर लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हुए थे। उनके चेहरों पर न तो कोई शिकन थी और न ही किसी तरह का मानसिक तनाव। होटल के रजिस्टर में एंट्री दर्ज कराने के बाद दोनों कमरा नंबर 106 में चले गए, जिसके बाद वहां सन्नाटा पसर गया।

अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि दाखिल होने के बाद उन साढ़े तीन घंटों के भीतर कमरे में ऐसा क्या हुआ कि दोनों ने मौत को गले लगा लिया? इस गुत्थी को सुलझाने के लिए पुलिस की एक टीम होटल के कर्मचारियों से पल-पल की जानकारी जुटा रही है, जबकि दूसरी टीम सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है। सर्विलांस टीम दोनों के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल (CDR) और व्हाट्सएप चैट की भी बारीकी से जांच कर रही है। पुलिस अफसरों का मानना है कि एंट्री के समय दोनों के चेहरे की शांति को देखते हुए यह फैसला अचानक लिया गया लगता है।

शक के घेरे में शिवांगी: क्या प्रेमी को धोखे से दिया गया सल्फास?

पुलिस सूत्रों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, मामले में एक थ्योरी यह भी है कि दोनों में से किसी एक ने लिव-इन पर बात न बनने के बाद यह खौफनाक कदम उठाया। जांच एजेंसियां इस बिंदु पर भी काम कर रही हैं कि कहीं किसी एक पार्टनर ने दूसरे को धोखे से पानी में सल्फास मिलाकर तो नहीं दे दिया और बाद में खुद भी जहर निगल लिया?

इस थ्योरी में शक की सुई शिवांगी की तरफ घूमती दिख रही है। शिवांगी काफी समय से बिना तलाक के दिग्विजय के साथ रहने के कानूनी दांव-पेच ढूंढ रही थी। उन्नाव कचहरी में शिवांगी के सीनियर वकील ने स्वीकार किया है कि वह वकालत की पढ़ाई के बाद वहां प्रैक्टिस के गुर सीखने आती थी। लेकिन जब जनवरी में दिग्विजय के साथ उसके रिश्ते की बात सामने आई, तो पारिवारिक कलह के कारण उसने कचहरी आना बंद कर दिया था। इस दौरान उसने अपने सीनियर से लिव-इन के कानूनी पहलुओं पर लंबी चर्चा भी की थी।

ट्रेन के सफर से शुरू हुई लव स्टोरी, इंस्टाग्राम पर चढ़ी परवान

जांच में सामने आया कि फतेहपुर के रहने वाले दिग्विजय सिंह की शादी साल 2013 में वंदना से हुई थी और उनका एक 10 साल का बेटा भी है। वह प्रयागराज में रेलवे में संविदा पर कोच अटेंडेंट था। वहीं, शिवांगी की शादी 15 साल पहले अकरमपुर (उन्नाव) निवासी धीरू तिवारी से हुई थी। धीरू बच्चों की अच्छी परवरिश और पत्नी की पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए तीन महीने पहले ही अहमदाबाद (गुजरात) कमाने गया था।

करीब आठ महीने पहले ट्रेन में सफर के दौरान दिग्विजय और शिवांगी की मुलाकात हुई थी, जो धीरे-धीरे इंस्टाग्राम के जरिए गहरी मोहब्बत में बदल गई। जनवरी में जब परिवारों को इसकी भनक लगी तो पाबंदियां लगा दी गईं। लेकिन पति के परदेस जाते ही दोनों फिर करीब आ गए। वे एक-दूसरे के लिए अपने बच्चों और परिवार को भी छोड़ने के लिए तैयार थे। कयास लगाए जा रहे हैं कि जब समाज में साथ रहने का कोई रास्ता नजर नहीं आया, तो उन्होंने अंतिम फैसला कर लिया।

शाम 4:30 बजे कमरे से आई आवाज और फैल गई सनसनी

इस पूरी घटना का खुलासा शनिवार की शाम करीब 4:30 बजे हुआ, जब सूर्या होटल के कमरा नंबर 106 से अचानक अजीब आवाजें आने लगीं। होटल स्टाफ ने जब दरवाजा खोला तो अंदर दोनों अचेत अवस्था में पड़े थे। अस्पताल ले जाने पर दोनों को मृत घोषित कर दिया गया। फिलहाल पुलिस के सामने कई अहम सवाल मुंह बाए खड़े हैं— मसलन, मौत के लिए शहर के अंतिम छोर पर स्थित इसी होटल को क्यों चुना गया? क्या वे पहले भी यहां आते थे? सल्फास की गोलियां कौन लेकर आया था? क्या सुसाइड का फैसला दोनों का था या इसके पीछे कोई गहरी साजिश थी? पुलिस इन सभी सुरागों को जोड़ने में जुटी है।

 

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