Wednesday , 8 July 2026

मेटा की सफाई: चाइल्ड एब्यूज कंटेंट विज्ञापनों पर भारत सरकार के सख्त नोटिस के बाद झुकी मेटा, 6 महीने में उड़ाए 1.6 लाख अकाउंट्स !

नई दिल्ली: इंस्टाग्राम (Instagram) विज्ञापनों के जरिए बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री (CSEAM) को बढ़ावा देने के आरोपों पर भारत सरकार के कड़े रुख के बाद सोशल मीडिया दिग्गज मेटा (Meta) बैकफुट पर आ गई है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा भेजे गए सख्त नोटिस के कुछ ही दिनों बाद, मंगलवार को मेटा ने एक विस्तृत ब्लॉग पोस्ट जारी कर अपनी सफाई पेश की है। फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप की पैरेंट कंपनी मेटा ने दावा किया कि वह बच्चों के शोषण को एक भयानक अपराध मानती है और इसे रोकने के लिए अपने प्लेटफॉर्म पर एडवांस्ड एआई (AI) और इंसानी समीक्षकों की मदद से बड़े पैमाने पर कार्रवाई कर रही है।

BBC की जांच रिपोर्ट के बाद सरकार ने लिया था संज्ञान

दरअसल, यह पूरा विवाद ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (BBC) की एक खोजी रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि मेटा का रिकमेंडेशन एल्गोरिदम इंस्टाग्राम पर पेड (पेड विज्ञापनों) के जरिए ‘रेप वीडियो’ और ‘चाइल्ड वीडियो’ जैसे संवेदनशील कीवर्ड्स वाले विज्ञापनों को प्रमोट कर रहा था। ये विज्ञापन यूजर्स को सीधे टेलीग्राम (Telegram) चैनलों पर ले जा रहे थे, जहां कथित तौर पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री बेची जा रही थी।

इस गंभीर लापरवाही पर संज्ञान लेते हुए आईटी (IT) मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अधिकारियों को मेटा को तलब करने का निर्देश दिया था, जिसके बाद MeitY ने मेटा को नोटिस जारी कर 7 दिनों के भीतर विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा था।

[मेटा की कार्रवाई: आंकड़ों में समझिए ]

  • 40 लाख अकाउंट्स डिलीट: मेटा ने बताया कि पिछले साल उसने दुनिया भर में बच्चों से जुड़ी संदिग्ध गतिविधियों में शामिल 40 लाख से ज्यादा अकाउंट्स को अपने ऑटोमेटेड सिस्टम से हटा दिया था।

  • 3.6 करोड़ कंटेंट पर एक्शन: वैश्विक स्तर पर बच्चों के शोषण से जुड़े 3.6 करोड़ कंटेंट को प्लेटफॉर्म से पूरी तरह डिलीट किया गया।

  • भारत में 1,60,000 अकाउंट्स ब्लॉक: पिछले महज 6 महीनों के भीतर एआई टूल्स की मदद से भारत में 1.6 लाख से अधिक उन अकाउंट्स को बैन किया गया, जो शोषणकारी गतिविधियों से जुड़े संदिग्ध लिंक (URLs) पोस्ट कर रहे थे।

  • 98% भाषाओं पर पकड़: मेटा का नया एआई-बेस्ड डिटेक्शन सिस्टम दुनिया भर में बोली जाने वाली 98 प्रतिशत भाषाओं को कवर करता है, जिससे आपत्तिजनक कीवर्ड्स को तुरंत पकड़ा जा सके।

‘जानबूझकर ऐसे विज्ञापन दिखाना पूरी तरह गलत’: मेटा

कैलिफोर्निया के मेनलो पार्क स्थित मुख्यालय वाली कंपनी मेटा ने उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि कंपनी मुनाफे के लिए जानबूझकर ऐसे विज्ञापन दिखाती है। मेटा ने अपने ब्लॉग में लिखा:

“यह कहना पूरी तरह गलत है कि हम जानबूझकर और सोच-समझकर ऐसे विज्ञापन लोगों को दिखाते हैं जिनमें बच्चे हों और जो गलत दिलचस्पी पर आधारित हों। बिल्कुल इसके उलट, हमारी विज्ञापन समीक्षा प्रक्रिया में ऑटोमेटेड सिस्टम और इंसानी समीक्षकों का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, हम मानते हैं कि कोई भी सिस्टम 100% परफेक्ट नहीं होता और कुछ चीजें छूट जाती हैं।”

विज्ञापनों की दोबारा समीक्षा और जीरो-टॉलरेंस नीति

मेटा ने स्पष्ट किया कि किसी भी विज्ञापन को लाइव करने से पहले उसकी गहन जांच की जाती है और उनके लगातार लाइव रहने के दौरान भी री-रिव्यू (दोबारा समीक्षा) किया जाता है। इसके अलावा, कंपनी न सिर्फ विज्ञापनों बल्कि विज्ञापनदाताओं (Advertisers) के व्यवहार पर भी पैनी नजर रखती है। नियमों का उल्लंघन करने वाले बिजनेस अकाउंट्स, विज्ञापन अकाउंट्स और पेजों को हमेशा के लिए प्रतिबंधित (Ban) कर दिया जाता है।

मेटा ने भारत सरकार को भरोसा दिलाया है कि वह इस मुद्दे पर ‘जीरो-टॉलरेंस’ नीति का पालन करती है और बुरे तत्वों को अपने प्लेटफॉर्म से दूर रखने के लिए अपनी तकनीकों को लगातार अपग्रेड कर रही है। वहीं, सरकारी सूत्रों के अनुसार, सरकार इस बात पर पैनी नजर रखेगी कि मेटा ने भविष्य में ऐसी गंभीर गलतियों को रोकने के लिए जमीनी स्तर पर क्या सुधारात्मक कदम उठाए हैं।

Check Also

लॉरेंस बिश्नोई और जग्गू भगवानपुरिया के ‘इंटरनेशनल क्राइम सिंडिकेट’ पर FBI का बड़ा एक्शन, क्या अब होगी प्रत्यर्पण की तैयारी?

नई दिल्ली/वॉशिंगटन दुनियाभर में खौफ का पर्याय बन चुके गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और उसके सहयोगियों …