उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां दवाओं की आड़ में अवैध हथियारों का एक बहुत बड़ा काला कारोबार चल रहा था। ‘मुनाफा कम, ग्राहक ज्यादा’ की थ्योरी पर काम करने वाले फतेहपुर के एक शातिर दवा व्यापारी को कानपुर की पूर्वी जोन की महराजपुर पुलिस ने सोमवार को रंगे हाथ दबोच लिया। पकड़ा गया आरोपी दिखावे के लिए तो मेडिकल स्टोर चलाता था, लेकिन उसकी असली कमाई मध्य प्रदेश के खंडवा से अवैध पिस्टल लाकर यूपी के जिलों में बेचना था। पुलिस ने उसके पास से तीन शानदार फिनिशिंग वाली देसी पिस्टल बरामद की हैं।
दवा के धंधे में हुआ घाटा, तो शुरू कर दिया ‘मौत का व्यापार’
डीसीपी पूर्वी सत्यजीत गुप्ता के अनुसार, गिरफ्तार किए गए शातिर तस्कर की पहचान फतेहपुर निवासी गैंगस्टर अतीक खान उर्फ लईक अहमद के रूप में हुई है। अतीक खान शुरुआत में फतेहपुर में अपना एक मेडिकल स्टोर चलाता था। लेकिन दवा के इस लीगल बिजनेस में जब उसे लगातार भारी घाटा होने लगा, तो उसने रातों-रात अमीर बनने के चक्कर में अपराध की दुनिया में कदम रख दिया। पिछले दस सालों से वह कानपुर, फतेहपुर और आसपास के तमाम जनपदों में अवैध हथियारों की धड़ल्ले से सप्लाई कर रहा था और इसी काली कमाई से उसने अपनी पूरी गृहस्थी संवारी थी।
जेल की बैरक में हुई थी दोस्ती, वहीं से मिला खंडवा का तस्कर नेटवर्क
अतीक खान के इस अवैध नेटवर्क की कहानी भी बेहद दिलचस्प है। करीब पांच साल पहले जब वह एक अन्य आपराधिक मामले में फतेहपुर जेल में बंद था, तब उसकी बैरक में मध्य प्रदेश के खंडवा का एक बड़ा हथियार तस्कर प्रशांत भी कैद था। जेल की सलाखों के पीछे दोनों में गहरी दोस्ती हो गई। जेल से बाहर आने के बाद प्रशांत ने अतीक को खंडवा के हथियार निर्माताओं और तस्करों से सीधे मिलवाया और उसका पूरा नेटवर्क तैयार करवा दिया। इसके बाद अतीक बिना किसी को शक होने दिए अक्सर खुद अपनी बाइक उठाकर 900 किलोमीटर दूर मध्य प्रदेश के खंडवा पहुंच जाता था और वहां से अकेले ही हथियारों की खेप लाकर यूपी में खपाता था।
मुंगेर की एक लाख वाली पिस्टल को ‘खंडवा कनेक्शन’ से किया फेल
पूछताछ में अतीक खान ने पुलिस के सामने एक बहुत ही शातिर बिजनेस थ्योरी का खुलासा किया। उसने बताया कि बिहार का मुंगेर अवैध हथियारों की तस्करी का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है, लेकिन वहां की बनी 9 एमएम की देसी पिस्टल कानपुर, लखनऊ या दिल्ली आते-आते करीब 1 लाख रुपये में मिलती है। मुंगेर की पिस्टल महंगी इसलिए होती है क्योंकि उसकी बैरल लेथ मशीन से बहुत सटीक बनाई जाती है और राउंड फायरिंग के वक्त गोली फंसती नहीं है।
अतीक ने इस महंगी मार्केट को मात देने के लिए खंडवा का रुख किया। खंडवा में वैसी ही फिनिशिंग वाली देसी पिस्टल सिर्फ 30 हजार रुपये में तैयार मिल जाती थी। अतीक मुंगेर के मुकाबले ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए सिर्फ 15 हजार रुपये का सीधा मुनाफा जोड़कर, मात्र 45 हजार रुपये में खंडवा की पिस्टल यूपी के अपराधियों को मुहैया करा देता था। हालांकि, खंडवा की इस पिस्टल में एक बड़ा रिस्क यह रहता था कि यह कभी भी मौके पर धोखा दे सकती थी।
10 लोगों को पिस्टल बेचने की बात कबूली, खरीदारों की लिस्ट तैयार
महराजपुर पुलिस की गिरफ्त में आए इस तस्कर ने स्वीकार किया है कि हाल-फिलहाल में ही उसने करीब 10 अपराधियों को यह अवैध पिस्टल बेची हैं। पुलिस अब अतीक खान को रिमांड पर लेकर पिछले कई वर्षों में उससे अवैध हथियार खरीदने वाले सभी सफेदपोशों और अपराधियों की कुंडली खंगाल रही है।
सूत्रों के मुताबिक, इन अवैध फैक्ट्रियों में हथियारों को बनाने के लिए बाजार में मिलने वाले बुलेट के साइज के हिसाब से बैरेल तैयार किए जाते हैं, जबकि इनमें इस्तेमाल होने वाले हाई-क्वालिटी स्प्रिंग कानपुर और देश के अन्य औद्योगिक हिस्सों से ऑर्डर देकर मंगाए जाते हैं। फिलहाल पुलिस इस पूरे सिंडिकेट को जड़ से उखाड़ने के लिए आगे की सख्त कानूनी कार्रवाई में जुट गई है।
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