Wednesday , 1 July 2026

मोदी कैबिनेट विस्तार: मॉनसून सत्र से पहले महा-फेरबदल की तैयारी, इन दिग्गजों की हो सकती है छुट्टी; चुनावी राज्यों पर बड़ा दांव

नई दिल्ली.  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल में बहुत जल्द एक बड़ा और व्यापक फेरबदल देखने को मिल सकता है। सियासी गलियारों में सुगबुगाहट तेज है कि अगले कुछ ही दिनों के भीतर मोदी कैबिनेट का विस्तार हो जाएगा। इस आगामी विस्तार में जहां एक तरफ कई नए और चौंकाने वाले चेहरों को मंत्रिपरिषद में शामिल कर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है, वहीं दूसरी तरफ खराब प्रदर्शन या संगठन में नई भूमिका पाने वाले कुछ पुराने मंत्रियों की छुट्टी होना भी लगभग तय माना जा रहा है।

मॉनसून सत्र से पहले अंतिम रूप लेने की उम्मीद

राजनीतिक हलकों में इस समय केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार की तारीख से लेकर नए मंत्रियों के नामों पर कयासों का बाजार बेहद गर्म है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्यस्त आधिकारिक कार्यक्रम और आगामी दौरों की सूची 11 जुलाई तक तय है। वहीं, संसद का आगामी मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने की प्रबल संभावना है। ऐसे में माना जा रहा है कि मॉनसून सत्र की शुरुआत से पहले ही प्रधानमंत्री अपनी नई टीम का ऐलान कर राष्ट्रपति भवन में शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन करवा सकते हैं।

‘एक व्यक्ति, एक पद’ के तहत कटेगा इन मंत्रियों का पत्ता!

इस बड़े फेरबदल के पीछे कई राजनीतिक और सांगठनिक मजबूरियां भी काम कर रही हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपने ‘एक व्यक्ति, एक पद’ के सिद्धांत को सख्ती से लागू करने के मूड में दिख रही है। वर्तमान में मोदी कैबिनेट का हिस्सा पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश और हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली भाजपा का नया प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। ऐसे में संगठन की जिम्मेदारी मिलने के बाद इन दोनों मंत्रियों को कैबिनेट से मुक्त किया जा सकता है।

इसके अलावा, जॉर्ज कुरियन पहले ही केंद्रीय मंत्री पद से अपना इस्तीफा सौंप चुके हैं, जबकि एक अन्य केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो चुका है। ऐसे में बिट्टू भी देर-सबेर मंत्री पद छोड़ सकते हैं।

खाली पड़े हैं 13 पद, सियासी समीकरण साधने पर जोर

वर्तमान में मोदी सरकार के मंत्रिपरिषद में कुल 72 मंत्री शामिल हैं, जिनमें 31 कैबिनेट मंत्री, 5 स्वतंत्र प्रभार वाले राज्यमंत्री और 36 राज्यमंत्री शामिल हैं। संवैधानिक नियमों के अनुसार, केंद्र सरकार में अधिकतम 81 मंत्री बनाए जा सकते हैं। इस लिहाज से मौजूदा समय में मंत्रिमंडल में 9 पद पहले से ही खाली हैं, और चार मौजूदा मंत्रियों के हटने की स्थिति में कुल 13 रिक्तियां बन रही हैं।

बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व इन खाली पदों के जरिए क्षेत्रीय, राज्यवार, जातीय और राजनीतिक निष्ठा के समीकरणों को बहुत ही बारीकी से साधने की रणनीति बना रहा है। अहम मंत्रालयों में नए और ऊर्जावान चेहरों को लाकर सरकार के काम को गति देने की भी तैयारी है।

आगामी विधानसभा चुनाव वाले राज्यों पर रहेगा मुख्य फोकस

इस बार के कैबिनेट विस्तार का ब्लूप्रिंट पूरी तरह से आगामी चुनावी राज्यों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। आने वाले समय में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब समेत देश के सात प्रमुख राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में जहां साल की शुरुआत में ही चुनावी रणभेरी बजेगी, वहीं हिमाचल प्रदेश और गुजरात में साल के अंत में चुनाव होने हैं।

इन राज्यों में सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को दुरुस्त करने के लिए पीएम मोदी अपनी नई टीम में यहां के नेताओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने जा रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, उत्तराखंड से दलित चेहरा और वर्तमान परिवहन राज्य मंत्री अजय टम्टा का कद बढ़ाया जा सकता है या सूबे से किसी एक और नए चेहरे को मौका मिल सकता है।

मिशन यूपी 2027: पश्चिमी उत्तर प्रदेश और जातीय संतुलन पर नजर

देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश से वर्तमान में प्रधानमंत्री मोदी समेत कुल 10 मंत्री केंद्र सरकार में शामिल हैं। भले ही साल 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक न रहा हो, लेकिन 2027 के विधानसभा चुनाव के महासमर को जीतने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल में यूपी की हिस्सेदारी और बढ़ाई जा सकती है।

सूत्रों की मानें तो पिछले कुछ समय से पीएम मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का पूरा ध्यान पश्चिमी उत्तर प्रदेश पर केंद्रित है, इसलिए इस क्षेत्र को मंत्रिमंडल में बड़ा स्थान मिल सकता है। इसके साथ ही सूबे के सामाजिक ताने-बाने को अनुकूल बनाने के लिए ओबीसी (OBC) और दलित समुदाय से कुछ नए चेहरों को केंद्रीय मंत्री बनाया जा सकता है।

पंजाब में सिख चेहरे और बागी सांसदों पर भी टिकी निगाहें

पंजाब में भी विधानसभा चुनाव होने हैं और भाजपा वहां अपनी सरकार बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। वर्तमान में पंजाब से इकलौता चेहरा रवनीत सिंह बिट्टू हैं, जो लोकसभा चुनाव हारने के बावजूद मंत्री बनाए गए थे। सिख मतदाताओं को साधे रखने के लिए यूपी कोटे से मंत्री बने हरदीप सिंह पुरी के साथ-साथ पंजाब से दो से तीन नए चेहरे शामिल किए जा सकते हैं। कयास हैं कि आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए किसी राज्यसभा सदस्य को भी मौका मिल सकता है।

इसके अलावा, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के करीब 20 लोकसभा सांसदों ने ममता बनर्जी का साथ छोड़कर एनसीपीआई (NCPI) में विलय किया है और वे मोदी सरकार का समर्थन कर रहे हैं। चर्चा है कि इनमें से भी किसी बागी सांसद को मंत्री पद का पुरस्कार मिल सकता है। वहीं महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना, जिसके पास अब उद्धव गुट से आए सांसदों को मिलाकर एनडीए में सबसे ज्यादा संख्या है, कोटे से भी एक से दो नए मंत्री बनाए जा सकते हैं। बिहार में हुए बड़े उलटफेर के बाद, जहां नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद सम्राट चौधरी सीएम बने हैं, नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने पर उन्हें भी कैबिनेट में एंट्री मिलने की प्रबल संभावना जताई जा रही है।

 

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