जब भी हमारे सामने सुपरफास्ट बाइक्स या रेसिंग कारों का जिक्र आता है, तो दिमाग में सबसे पहले पेट्रोल की गंध, भारी-भरकम इंजनों की गड़गड़ाहट और साइलेंसर से धुआं उड़ाती गाड़ियां ही घूमती हैं। लेकिन क्या आप कभी सोच सकते हैं कि सिर्फ पानी से बनने वाली भाप (Steam) से भी कोई ऐसी बाइक दौड़ सकती है, जो राइडर को सीधे फाइटर जेट उड़ाने वाला रोमांच दे दे? सुनने में यह भले ही किसी हॉलीवुड की साइंस फिक्शन फिल्म की स्क्रिप्ट जैसा लगे, लेकिन एक ब्रिटिश इंजीनियर ने इस नामुमकिन को हकीकत में बदल दिया है। इस जीनियस इंजीनियर ने एक ऐसी ‘स्टीम पावर्ड’ यानी भाप से चलने वाली रॉकेट बाइक तैयार की है, जिसने रफ्तार की दुनिया के सारे पुराने रिकॉर्ड्स को चकनाचूर कर दिया है। इसकी बेहिसाब स्पीड को देखकर बड़े से बड़े ड्रैगस्टर्स भी दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर हो गए हैं।
महज 5.5 सेकंड में तय की दूरी, टॉप स्पीड 310 KMPH
ड्रैग रेसिंग की दुनिया में ‘क्वार्टर माइल’ यानी करीब 402 मीटर की दूरी को स्पीड का सबसे बड़ा बेंचमार्क माना जाता है। दुनिया की बड़ी-बड़ी सुपरकार और मॉडिफाइड इंजन भी इस फासले को तय करने में अच्छा-खासा वक्त ले लेते हैं। लेकिन इस ब्रिटिश इंजीनियर की बनाई ‘राक्षस बाइक’ ने इस दूरी को महज 5.5 सेकंड में पूरा करके सबको हैरान कर दिया है। सिर्फ इतना ही नहीं, जब यह सुपरबाइक फिनिशिंग लाइन को पार करती है, तो इसकी टॉप स्पीड 310 किलोमीटर प्रति घंटा (KMPH) तक पहुंच जाती है।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस हैरतअंगेज रफ्तार को हासिल करने के लिए बाइक में एक बूंद भी पेट्रोल या डीजल का इस्तेमाल नहीं किया गया है।
21वीं सदी का नया विज्ञान और भाप का अनोखा इंजन
हम सबने बचपन में इतिहास की किताबों में भाप से चलने वाले पुराने रेल इंजनों के बारे में जरूर पढ़ा है, जो बेहद भारी और सुस्त हुआ करते थे। लेकिन इस ब्रिटिश इंजीनियर ने उसी पुरानी तकनीक को 21वीं सदी के आधुनिक विज्ञान के साथ ऐसा कस्टमाइज किया कि एक चलता-फिरता ‘रॉकेट’ तैयार हो गया। इस बाइक के भीतर एक बेहद एडवांस और हाई-प्रेशर स्टीम जेनरेटर लगाया गया है। यह जेनरेटर पानी को बहुत ही कम समय में अत्यधिक तापमान पर गर्म करके सुपर-हीटेड भाप में तब्दील कर देता है। जब यह भारी दबाव वाली भाप एक झटके के साथ पीछे से बाहर निकलती है, तो बाइक को इतना जबरदस्त थ्रस्ट (धक्का) मिलता है कि वह बंदूक की गोली की तरह ट्रैक पर आगे की तरफ भागती है।
फाइटर जेट जैसा 6.8G फोर्स, कमजोर दिल वालों के बस की नहीं बात
इस सुपरबाइक को संभालना किसी आम राइडर के बस की बात बिल्कुल नहीं है। जब यह बाइक अपनी पूरी ताकत के साथ अचानक स्पीड पकड़ती है, तो इस पर बैठे राइडर को 6.8जी (6.8G Force) तक के गुरुत्वाकर्षण बल का सामना करना पड़ता है। आसान भाषा में समझें तो 6.8जी फोर्स का मतलब यह हुआ कि राइडर को अचानक अपने शरीर का वजन सामान्य से करीब सात गुना ज्यादा भारी महसूस होने लगता है।
इतना तगड़ा दबाव आमतौर पर सिर्फ अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेस शटल की लॉन्चिंग के समय या फिर लड़ाकू विमान उड़ाने वाले जांबाज पायलटों को आसमान में खतरनाक स्टंट करते समय ही झेलना पड़ता है। अगर राइडर का दिल मजबूत न हो और उसने इसकी स्पेशल ट्रेनिंग न ली हो, तो वह इस खतरनाक दबाव के कारण पल भर में बेहोश भी हो सकता है।
पर्यावरण का रक्षक: धुएं की जगह साइलेंसर से निकलती है सिर्फ भाप
आज के समय में जब पूरी दुनिया बढ़ते प्रदूषण और लगातार खत्म होते क्रूड ऑयल के भंडारों को लेकर बेहद चिंतित है, ऐसे दौर में यह अनोखा आविष्कार एक नई उम्मीद बनकर सामने आया है। यह बाइक रफ्तार के शौकीनों को रोमांच तो देती ही है, साथ ही इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली कोई जहरीली गैस या कार्बन नहीं निकलता। इस बाइक के साइलेंसर से सिर्फ और सिर्फ पानी की मासूम भाप बाहर आती है।
भले ही अभी इस बाइक को आम सड़कों पर चलने के लिए हरी झंडी नहीं मिली है और इसका इस्तेमाल सिर्फ रेसिंग ट्रैक्स पर रिकॉर्ड तोड़ने के लिए किया जा रहा है, लेकिन इस ब्रिटिश इंजीनियर ने दुनिया को यह साबित कर दिया है कि अगर तकनीक सही हो, तो पानी की ताकत से भी दुनिया की सबसे तेज गाड़ियां खड़ी की जा सकती हैं। आने वाले समय में यह तकनीक ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री का पूरा रुख बदल सकती है।
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