Monday , 29 June 2026

राम मंदिर चंदा चोरी कांड में आज महासुनवाई: सुप्रीम कोर्ट से हाई कोर्ट तक मचेगा हड़कंप, कोर्ट में पेश होंगे सभी 8 आरोपी, अयोध्या के संतों ने की ट्रस्ट भंग करने की मांग!

अयोध्या/नई दिल्ली। अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे और चंदे के पैसे में हुए कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया है। इस महा-घोटाले को लेकर आज यानी सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में एक बेहद अहम जनहित याचिका पर सुनवाई होनी है, जिसमें पूरे मामले की जांच सीबीआई (CBI) की निगरानी में कराने की मांग की गई है। सिर्फ शीर्ष अदालत ही नहीं, बल्कि हाई कोर्ट में भी आज एक अन्य याचिका पर सुनवाई होनी है, जिसमें मंदिर के पैसों का कैग (CAG) ऑडिट कराने और एक स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग की गई है। कानूनी मोर्चे पर मचे इस घमासान के बीच आज इस मामले के सभी 8 आरोपियों की अदालत में पेशी होनी है। सूत्रों के मुताबिक, अयोध्या पुलिस इन आरोपियों की पुलिस कस्टडी नहीं मांगेगी, बल्कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत (ज्यूडिशियल रिमांड) में जेल भेजने की अपील करेगी। पुलिस इस मामले में कुछ और संदिग्धों को नोटिस भेजने और नए ठिकानों पर छापेमारी की तैयारी में भी है।

कोष में गड़बड़ी है और कोषाध्यक्ष बरी है, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का सीधा हमला

राम मंदिर चंदा चोरी मामले पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बेहद तीखा और बड़ा बयान देकर राजनीतिक और धार्मिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। उन्होंने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को घेरते हुए कहा, “इस कोष में साफ तौर पर गड़बड़ी दिखाई दे रही है, लेकिन कोषाध्यक्ष को बरी रखा गया है। यह पूरी तरह से प्रधानमंत्री कार्यालय का मामला है क्योंकि पीएमओ ने ही इस ट्रस्ट का गठन करवाया था। सरकारी खजाने से महज एक रुपया निकालकर यह ट्रस्ट बनाया गया और इसमें चुन-चुनकर अपने लोग रखे गए। उन्हीं लोगों से मंदिर का निर्माण और संचालन सब कुछ कराया गया।” शंकराचार्य ने एफआईआर और एसआईटी (SIT) के गठन पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जिन लोगों के नाम एफआईआर में दर्ज हैं, वे इस कैलिबर के ही नहीं हैं कि इतना बड़ा गबन कर सकें। असली जांच तो एफआईआर के बाद शुरू होती है, लेकिन यहां जांच शुरू होने से पहले ही एसआईटी गठन का ढोल पीट दिया गया। उन्होंने पूर्व नौकरशाह नृपेन्द्र मिश्रा के हवाले से कहा कि जब एसआईटी मुख्यमंत्री के निर्देश पर काम करेगी, तो ऐसी जांच कमेटी की निष्पक्षता पर सवाल उठना लाजिमी है।

बीजेपी के लिए अब नेशन नहीं, ‘डोनेशन फर्स्ट’ है: अखिलेश यादव

सपा मुखिया और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने प्रयागराज के दो दिवसीय दौरे के दौरान इस मुद्दे को लेकर सूबे की योगी और केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा। अखिलेश यादव ने तीखा तंज कसते हुए आरोप लगाया, “भारतीय जनता पार्टी की निगाहें अब नेशन (देश) पर नहीं, बल्कि सिर्फ डोनेशन (चंदे) पर टिकी हैं। जो लोग कल तक ‘नेशन फर्स्ट’ का नारा देते थकते नहीं थे, उनके लिए आज ‘डोनेशन फर्स्ट’ हो गया है।” सपा अध्यक्ष ने कहा कि समाजवादी पार्टी का स्पष्ट मानना है कि जिन लोगों ने करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और श्रद्धा के साथ इतना बड़ा खिलवाड़ किया है, उन्हें बख्शा नहीं जाना चाहिए। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के भव्य मंदिर में इतना बड़ा घोटाला हो जाएगा, ऐसा देश के किसी नागरिक ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था। आज देश के बड़े-बड़े न्यूज चैनल भी सरकार से इस पर सवाल पूछ रहे हैं।

आस्था को लगी ठेस, अयोध्या के संतों ने की राम मंदिर ट्रस्ट भंग करने की मांग

राम मंदिर दान गबन मामले में पुलिसिया कार्रवाई के बाद अब अयोध्या का संत समाज भी बेहद आक्रोशित है और खुलकर सामने आ गया है। अयोध्या के कई प्रतिष्ठित संतों ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। संतों ने दोटूक शब्दों में मांग की है कि वर्तमान ट्रस्ट को तुरंत भंग कर नए सिरे से इसका पुनर्गठन किया जाए। संतों का कहना है कि पुलिस द्वारा आठ लोगों को जेल भेजे जाने की इस कार्रवाई ने दुनियाभर के करोड़ों राम भक्तों की आस्था को गहरी ठेस पहुंचाई है। मंदिर की पवित्रता और पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि इस पूरे प्रकरण की पूरी तरह निष्पक्ष जांच हो और ट्रस्ट के ढांचे में व्यापक बदलाव किए जाएं।

बेटे को गलत फंसाया जा रहा है, आरोपी रमाशंकर के परिजनों का दावा

इस बीच, चंदा चोरी के आरोपी रमाशंकर मिश्रा के परिवार ने उसे पूरी तरह बेकसूर बताया है। बिजनौर और अयोध्या में रह रहे रमाशंकर के पिता और भाभी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें इस पूरे मामले की कोई पुख्ता जानकारी नहीं है और रमाशंकर को साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। परिजनों के मुताबिक, रमाशंकर पिछले दो-ढाई साल से अपने परिवार से अलग एक किराए के कमरे में रह रहा था। वह पिछले 6-7 साल से राम मंदिर से जुड़ी गतिविधियों में सक्रिय था, लेकिन उसका इस तरह के किसी गबन से कोई लेना-देना नहीं है।

चंपत राय के भाई और दोस्तों ने आरोपों को बताया पूरी तरह निराधार

कथित चंदा चोरी के आरोपों के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से चंपत राय के इस्तीफे को लेकर भी चर्चाएं गर्म हैं। इस बीच बिजनौर स्थित उनके पैतृक गांव से चंपत राय के भाई और उनके पुराने मित्रों ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। परिजनों का कहना है कि जिस व्यक्ति ने भगवान राम के मंदिर निर्माण के लिए अपना पूरा जीवन, घर-परिवार और अपनी जमी-जमाई नौकरी तक दांव पर लगा दी और सर्वस्व न्योछावर कर दिया, उन पर इस तरह के घटिया और मनगढ़ंत आरोप लगाना पूरी तरह निराधार और दुर्भाग्यपूर्ण है।

अयोध्या के वकील नहीं लड़ेंगे राम मंदिर के चोरों का केस, कोर्ट में आज बड़ी बैठक

इस पूरे मामले में एक और बड़ा सामाजिक और कानूनी मोड़ देखने को मिल रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, आज अयोध्या कचहरी में बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका मिश्रा की अध्यक्षता में वकीलों की एक बेहद महत्वपूर्ण और आपातकालीन बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में वकील संगठन सामूहिक रूप से यह बड़ा फैसला ले सकता है कि अयोध्या का कोई भी अधिवक्ता राम मंदिर में दान के पैसे चोरी करने वाले इन 8 आरोपियों का केस नहीं लड़ेगा। वकीलों के बीच इस बात को लेकर भारी गुस्सा है कि रामलला के चढ़ावे में सेंध लगाने वालों को किसी भी कीमत पर कानूनी मदद नहीं मिलनी चाहिए।

आरोपियों के घरों पर छापेमारी खत्म, मिला नोटों का पहाड़ और बेनामी निवेश के दस्तावेज

अयोध्या राम मंदिर दान गबन मामले के सभी आरोपियों के ठिकानों पर पुलिस और जिला प्रशासन की संयुक्त छापेमारी की कार्रवाई अब पूरी हो चुकी है। इस तलाशी अभियान में जांच एजेंसियों के हाथ कई चौंकाने वाले सुराग लगे हैं। पुलिस को आरोपियों के ठिकानों से भारी मात्रा में अघोषित नकदी (कैश), लाखों रुपये की सोने-चांदी की ज्वेलरी, महंगे लग्जरी सामान और विभिन्न जगहों पर किए गए बेनामी निवेश व प्रॉपर्टी के दस्तावेज मिले हैं। छापेमारी के दौरान पुलिस ने न सिर्फ आरोपियों के घर का कोना-कोना खंगाला बल्कि उनके परिजनों और पड़ोसियों से भी लंबी पूछताछ की। पुलिस ने परिवार के सदस्यों के पहचान पत्रों और अन्य वित्तीय दस्तावेजों को भी अपने कब्जे में ले लिया है ताकि वित्तीय हेरफेर की कड़ियों को आपस में जोड़ा जा सके।

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