Saturday , 27 June 2026

अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा घोटाला: SIT की रडार पर आए वायरलेस अफसर, 17 साल से एक ही जगह टिके रहने का खुला बड़ा राज!

अयोध्या। राम नगरी अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे की राशि गायब होने के हाई-प्रोफाइल मामले में एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा खुलासा हुआ है। इस पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की रडार पर अब पुलिस के वायरलेस विभाग के एक रसूखदार अधिकारी अर्जुन देव आ गए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि अर्जुन देव के पास ही उस अति-संवेदनशील काउंटिंग रूम की सीसीटीवी (CCTV) निगरानी की सीधी जिम्मेदारी थी, जहां रामलला के दरबार में आने वाले करोड़ों रुपये के चढ़ावे के नोटों की गिनती की जाती थी। अब इस महालापरवाही में उनकी संदिग्ध भूमिका को लेकर एसआईटी ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।

SIT की शुरुआती पड़ताल में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर खामियां पाई गई हैं। जांच एजेंसी अब इस बात की तह तक जा रही है कि सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में रहते हुए भी दान के पैसे कैसे गायब होते रहे और जिम्मेदार अधिकारी क्या कर रहे थे।

कैमरे देखने के बजाय राम मंदिर ट्रस्ट के प्रशासनिक कामों में था भारी दखल

एसआईटी की जांच रिपोर्ट में जो सबसे गंभीर बात सामने आई है, उसके अनुसार अर्जुन देव सिर्फ अपनी मुख्य जिम्मेदारी यानी सीसीटीवी कैमरों की निगरानी तक ही सीमित नहीं थे। उनकी सक्रियता राम मंदिर ट्रस्ट के कई अंदरूनी और प्रशासनिक कार्यों में जरूरत से ज्यादा बढ़ गई थी। मंदिर परिसर में आने वाले देश-विदेश के वीवीआईपी (VVIP) मेहमानों को विशेष दर्शन कराने से लेकर परिसर की अन्य व्यवस्थाओं को अपने हाथ में लेने में वह काफी रुचि दिखाते थे। जांच एजेंसी का साफ मानना है कि मुख्य काम को छोड़कर अन्य व्यवस्थाओं में अतिरिक्त दखल देने और लापरवाही बरतने के कारण ही सुरक्षा में इतनी बड़ी चूक हुई, जिसका फायदा उठाकर चढ़ावे की रकम पार कर दी गई।

17 साल से अयोध्या में जमे हैं अफसर, हर बार जादू की तरह रुक जाता था ट्रांसफर

इस पूरे मामले का सबसे हैरान कर देने वाला पहलू अर्जुन देव की अयोध्या में रिकॉर्डतोड़ तैनाती को लेकर है। सरकारी नियमों को ताक पर रखकर वह साल 2009 से लगातार यानी पिछले 17 वर्षों से एक ही जगह अयोध्या में जमे हुए हैं। इस लंबी अवधि के दौरान पुलिस मुख्यालय से कई बार उनके ट्रांसफर के कड़े आदेश जारी किए गए, लेकिन हर बार कोई न कोई ‘चमत्कार’ होता और उनका तबादला रुक जाता था। अभी हाल ही में लखनऊ मुख्यालय से जारी हुआ उनका एक और ट्रांसफर ऑर्डर अचानक रद्द कर दिया गया था। एसआईटी अब इस बात की गहराई से छानबीन कर रही है कि आखिर ऐसी कौन सी अदृश्य ताकत थी, जिसके दम पर वह इतने संवेदनशील जिले में इतने लंबे समय तक टिके रहे।

चंपत राय समेत ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों से थे बेहद करीबी संबंध, अब कार्रवाई की तैयारी

एसआईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, अर्जुन देव के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय समेत कई अन्य बड़े और रसूखदार पदाधिकारियों से बेहद करीबी और दोस्ताना संबंध हैं। माना जा रहा है कि इन्हीं वीवीआईपी संबंधों और ऊंचे रसूख की बैसाखी के सहारे उनका ट्रांसफर हर बार ऐन वक्त पर रुकवा दिया जाता था। जांच एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा है कि सुरक्षा जैसे अत्यंत संवेदनशील पद पर बैठे किसी अधिकारी का मुख्य व्यवस्था में जरूरत से ज्यादा दखल देना सुरक्षा के लिहाज से बिल्कुल ठीक नहीं है। फिलहाल, इस पूरे चढ़ावा घोटाले में मुख्य आरोपी टिन्नू यादव और वायरलेस अधिकारी अर्जुन देव दोनों के खिलाफ विभागीय और कानूनी स्तर पर एक साथ बड़ी कार्रवाई की तैयारी पूरी कर ली गई है।

 

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