वाशिंगटन / यरूशलेम: मिडिल ईस्ट (Middle East) में पिछले कई महीनों से जारी भीषण खून-खराबे और तनाव के बीच एक बेहद चौंकाने वाली और राहत भरी खबर सामने आ रही है। इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच जारी विनाशकारी जंग को हमेशा के लिए खत्म करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कामयाबी मिली है। अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन में कई दिनों तक चली बेहद गोपनीय और गहन बातचीत के बाद शुक्रवार को इजरायल और लेबनान ने एक ‘स्थायी शांति एवं सुरक्षा’ समझौते की रूपरेखा (Framework Agreement) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। अमेरिका की मध्यस्थता में तैयार हुई इस डील को मिडिल ईस्ट में शांति बहाली के लिए अब तक का सबसे बड़ा और ठोस कदम माना जा रहा है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो का बड़ा ऐलान, सामने आया 14 पॉइंट का ड्राफ्ट
वाशिंगटन में हुई इस महाबैठक के सफल होने के तुरंत बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने दुनिया के सामने इसकी औपचारिक घोषणा की। अमेरिकी विदेश विभाग ने इस ऐतिहासिक शांति समझौते का 14 पॉइंट का आधिकारिक मसौदा (Draft) भी जारी कर दिया है। इस समझौते की सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें तुरंत प्रभाव से सीजफायर यानी युद्धविराम लागू करने और दक्षिणी लेबनान से हिज्बुल्लाह लड़ाकों को पूरी तरह पीछे हटाने का सख्त प्रावधान शामिल किया गया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने इस समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह शांति और स्थिरता की दिशा में पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम है, हालांकि उन्होंने यह भी आगाह किया कि आने वाला रास्ता अभी भी चुनौतियों से भरा रहने वाला है।
हिज्बुल्लाह को सरेंडर करने होंगे हथियार, खाली करने होंगे ठिकाने
इस हाई-प्रोफाइल शांति समझौते के जो प्रमुख बिंदु सामने आए हैं, वे बेहद कड़े हैं और जमीन पर स्थिति को पूरी तरह बदलने वाले हैं। इस डील के तहत अब लेबनान की आधिकारिक सेना पूरे देश में अपना नियंत्रण स्थापित करेगी। सबसे बड़ा बदलाव हिज्बुल्लाह समेत लेबनान में सक्रिय सभी हथियारबंद समूहों को लेकर होने जा रहा है, जिन्हें अब अपने सारे हथियार सरकारी सेना के पास जमा करने होंगे और सीमाई इलाकों से अपने ठिकाने पूरी तरह खत्म करने होंगे। समझौता पत्र के मुताबिक, जैसे ही हिज्बुल्लाह इन शर्तों को पूरा कर देगा, वैसे ही इजरायली सेना (IDF) दक्षिणी लेबनान के कब्जे वाले क्षेत्रों से चरणबद्ध तरीके से (Phase-wise) पूरी तरह वापस अपने देश लौट जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया की बारीकियों को एक स्पेशल सिक्योरिटी एनेक्स में शामिल किया गया है, जिसे अमेरिकी सरकार के पूरे सहयोग से तैयार किया गया है।
इजरायल और लेबनान के राजदूतों ने बताया ऐतिहासिक कदम, दुनिया की नजरें टिकीं
इस अप्रत्याशित समझौते के बाद वाशिंगटन से लेकर बेरुत और तेल अवीव तक हलचल तेज हो गई है। अमेरिका में लेबनान की राजदूत नदा हमादेह ने इस शांति पहल का पुरजोर स्वागत किया है और इस डील को मुकाम तक पहुंचाने वाले नेताओं का आभार जताया है। वहीं दूसरी ओर, अमेरिका में इजरायल के राजदूत येचिएल लेटर ने भी इस पर खुशी जताते हुए इसे एक ऐतिहासिक और मील का पत्थर साबित होने वाला कदम करार दिया है। हालांकि, कूटनीतिक गलियारों में अभी भी इस बात को लेकर संशय बरकरार है कि जमीन पर कट्टर दुश्मन रहे दोनों पक्ष इस फ्रेमवर्क को कितनी जल्दी और कितनी ईमानदारी से लागू करते हैं। लेकिन फिलहाल इस समझौते ने मिडिल ईस्ट को एक नई उम्मीद जरूर दे दी है।
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