Wednesday , 24 June 2026

अलीगंज अग्निकांड: एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार का बड़ा एक्शन, 5 जोनल अफसरों और 18 इंजीनियरों पर गिरेगी गाज, शासन को भेजी रिपोर्ट !

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी के अलीगंज इलाके में हुए भीषण अग्निकांड मामले में लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा एक्शन लिया है। उपाध्यक्ष ने अवैध बिल्डिंग के निर्माण को शह देने और लापरवाही बरतने के दोषी तत्कालीन विहित प्राधिकारी, 5 जोनल अफसरों समेत कुल 18 इंजीनियरों की जवाबदेही तय कर दी है। इन सभी दागी अफसरों और अभियंताओं के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई के लिए एलडीए उपाध्यक्ष ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश शासन को अपनी विस्तृत रिपोर्ट भेज दी है, जिससे महकमे में हड़कंप मच गया है।

एलडीए उपाध्यक्ष ने खुद खंगाली एक-एक फाइल, खुली लापरवाही की पोल

अलीगंज अग्निकांड के बाद एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने इस पूरे मामले की कमान खुद संभाली। उन्होंने प्रकरण से जुड़ी एक-एक फाइल और दस्तावेजों को बारीकी से स्वयं खंगाला। जांच के दौरान अलीगंज, सेक्टर-डी स्थित संबंधित भूखंड और भवन के आवंटन से लेकर उसकी रजिस्ट्री और मानचित्र स्वीकृति तक के इतिहास को खंगाला गया। उपाध्यक्ष ने इस बात की गहन पड़ताल की कि आवासीय पट्टे पर व्यावसायिक साम्राज्य कैसे खड़ा हो गया और इस अवैध निर्माण को रोकने में किन-किन अफसरों ने जानबूझकर अपनी आंखें बंद रखीं।

आवासीय नक्शे पर धड़ल्ले से चल रही थीं कमर्शियल गतिविधियां

प्रारंभिक जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। जिस भवन में यह भीषण अग्निकांड हुआ, उसका मानचित्र (नक्शा) केवल ‘एकल आवासीय’ उपयोग के लिए पास किया गया था। लेकिन समय के साथ नियमों को ताक पर रखकर वहां कई मंजिला व्यावसायिक (कमर्शियल) गतिविधियां धड़ल्ले से संचालित होती रहीं। विभिन्न स्तरों पर तैनात एलडीए के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा इस बिल्डिंग की न तो प्रभावी निगरानी की गई और न ही कोई प्रवर्तन कार्रवाई अमल में लाई गई। अफसरों की इसी मिलीभगत और लापरवाही के कारण सालों तक मानचित्र का उल्लंघन और अवैध निर्माण का खेल चलता रहा।

तत्कालीन विहित प्राधिकारी दुर्गेश श्रीवास्तव की भूमिका बेहद संदिग्ध

जांच में तत्कालीन विहित प्राधिकारी दुर्गेश श्रीवास्तव की भूमिका को सबसे गंभीर पाया गया है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, विहित प्राधिकारी ने वर्ष 2016 में इस विवादित भवन के खिलाफ ध्वस्तीकरण (बुलडोजर चलाने) का आदेश जारी किया था, लेकिन बाद में निर्माणकर्ता की एक मामूली अर्जी पर उस कड़े आदेश को ही समाप्त कर दिया गया। उपाध्यक्ष की जांच में यह बड़ा सवाल उठाया गया है कि अगर ध्वस्तीकरण का आदेश वापस लिया गया था, तो उसके बाद भवन की वास्तविक स्थिति, उसके उपयोग और नक्शे के अनुपालन की दोबारा जांच क्यों नहीं की गई? इस खेल ने प्रवर्तन जोन-4 में तैनात रहे 05 जोनल अफसरों, 06 सहायक अभियंताओं और 06 अवर अभियंताओं को सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया है।

इन 18 दोषी अधिकारियों और इंजीनियरों के खिलाफ शासन को भेजी गई रिपोर्ट

एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार द्वारा शासन को भेजी गई रिपोर्ट में जिन रसूखदार अफसरों और अभियंताओं के नाम शामिल हैं, उनकी सूची इस प्रकार है:

  • तत्कालीन विहित प्राधिकारी: दुर्गेश श्रीवास्तव

  • जोनल अधिकारी (अधिशासी अभियंता): अवनीन्द्र सिंह, बी.पी. मौर्या, पी.सी. पांडेय और आनंद मिश्रा।

  • सहायक अभियंता (AE): सुनील कुमार, गिरीश चंद्र शर्मा, अमर कुमार मिश्रा, आर.एस. सिंह, अनिल कुमार और संजय शुक्ला।

  • अवर अभियंता (JE): जय प्रकाश नारायण, रवींद्र कुमार श्रीवास्तव, ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव, प्रमोद पाण्डेय, अम्बरीश कुमार शर्मा, शिवानंद शुक्ला और हेमंत कुमार (वर्तमान में निलंबित)।

उपाध्यक्ष की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से एलडीए के भीतर भ्रष्टाचार और लापरवाही की नींव पर खड़े अवैध निर्माणों के आकाओं में खौफ का माहौल है। शासन को रिपोर्ट भेजे जाने के बाद अब इन सभी अधिकारियों पर जल्द ही बड़ी गाज गिरना तय माना जा रहा है।

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