
वाशिंगटन/तेहरान। पश्चिम एशिया (Middle East) से इस वक्त की सबसे बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। अमेरिका और ईरान के बीच पिछले 107 दिनों से जारी भीषण युद्ध आखिरकार खत्म हो गया है। दोनों महाशक्तियों ने आधिकारिक तौर पर एलान कर दिया है कि उनके बीच शांति समझौते (Peace Treaty) को लेकर चल रही बातचीत पूरी तरह फाइनल हो चुकी है। इस ऐतिहासिक समझौते पर आगामी शुक्रवार यानी 19 जून को स्विट्जरलैंड की सरजमीं पर दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों द्वारा आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर किए जाएंगे। महीनों से जारी इस खूनी संघर्ष के खत्म होने को वैश्विक शांति और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है।
ईरानी मीडिया का बड़ा दावा: सामने आया 14 सूत्रीय शांति समझौते का पूरा ड्राफ्ट
हालांकि, दोनों देशों की सरकारों ने अभी तक इस समझौते की सभी आधिकारिक शर्तों को सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन ईरान के सरकारी और अर्ध-सरकारी मीडिया ने इस महा-डील के मसौदे (Draft) की इनसाइड स्टोरी लीक कर दी है। ईरान की प्रतिष्ठित ‘मेहर न्यूज एजेंसी’ के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच कुल 14 बिंदुओं वाले एक बेहद महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर सहमति बनी है। इस समझौते में दोनों देशों को कई बड़े और कड़े फैसले लेने पड़े हैं, जो आने वाले समय में पूरी दुनिया की राजनीति और व्यापार का रुख बदल देंगे।
300 अरब डॉलर का मुआवजा और नौसैनिक नाकेबंदी खत्म, ये हैं समझौते की अहम शर्तें:
ईरानी मीडिया द्वारा लीक किए गए ड्राफ्ट के मुताबिक, इस शांति समझौते के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
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स्थायी युद्धविराम की घोषणा: लेबनान समेत पश्चिम एशिया के उन सभी मोर्चों पर तुरंत और स्थायी रूप से सीजफायर (स्थायी युद्धविराम) लागू किया जाएगा, जहां दोनों देश या उनके सहयोगी आमने-सामने थे।
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आंतरिक मामलों में नो इंटरफेरेंस: संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) ने लिखित वादा किया है कि वह भविष्य में ईरान के किसी भी आंतरिक या राजनीतिक मामलों में किसी भी तरह का हस्तक्षेप नहीं करेगा।
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अमेरिकी सेना की वापसी: अमेरिकी प्रशासन अपनी तमाम सेनाओं और सैन्य साजो-सामान को ईरान की सीमाओं और प्रभावित क्षेत्रों से तुरंत वापस बुलाएगा।
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स्ट्रैट ऑफ हॉर्मुज से हटेगी नाकेबंदी: समझौते के तहत अगले 30 दिनों के भीतर हॉर्मुज जलडमरूमध्य से अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी को पूरी तरह हटा लिया जाएगा।
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हॉर्मुज मार्ग पर ईरान का नियंत्रण: 30 दिनों के भीतर “ईरान की व्यवस्था और सुरक्षा” के तहत दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ को दोबारा व्यापार के लिए पूरी तरह खोल दिया जाएगा।
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300 अरब डॉलर का पुनर्निर्माण पैकेज: युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई के लिए अमेरिका और उसके सहयोगी पश्चिमी देश मिलकर ईरान के पुनर्निर्माण के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर (लगभग 25 लाख करोड़ रुपये) की विशाल विकास योजनाएं पेश करेंगे।
तेल और परमाणु हथियारों पर भी बनी सहमति, नए प्रतिबंधों पर लगी रोक
इस समझौते में सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट ईरान की अर्थव्यवस्था और उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर आया है। ड्राफ्ट के अनुसार:
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प्रतिबंधों से मिलेगी मुक्ति: ईरानी तेल, गैस और अन्य ऊर्जा उत्पादों के वैश्विक निर्यात पर अमेरिका द्वारा लगाए गए सभी कड़े प्रतिबंधों को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया जाएगा।
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परमाणु हथियारों पर ईरान का यू-टर्न: ईरान अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने दोबारा यह कड़ा और लिखित वादा करेगा कि वह किसी भी परिस्थिति में परमाणु हथियार (Nuclear Weapons) नहीं बनाएगा।
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सैन्य विस्तार पर रोक: अमेरिका ने गारंटी दी है कि वह मिडल ईस्ट क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी को अब और नहीं बढ़ाएगा और न ही ईरान पर भविष्य में कोई नया प्रतिबंध थोपेगा।
ईरान की बड़ी शर्त: $12 बिलियन का फ्रोजन फंड रिलीज होने के बाद ही लगेगी अंतिम मुहर
मेहर न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा भी हुआ है। ईरान ने साफ कर दिया है कि इस समझौते पर अंतिम हस्ताक्षर और बातचीत की प्रक्रिया तब तक आगे नहीं बढ़ेगी, जब तक कि अमेरिका द्वारा जब्त की गई ईरान की विदेशी संपत्तियों (Frozen Funds) का कम से कम आधा हिस्सा यानी 12 बिलियन डॉलर (12 अरब डॉलर) तुरंत रिलीज नहीं कर दिया जाता। इसके साथ ही तेल पर से पाबंदी हटाना और नौसैनिक नाकेबंदी को तुरंत खत्म करना पहली शर्त होगी। इस अंतिम शांति समझौते को पूरी दुनिया में कानूनी रूप से प्रभावी बनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के एक विशेष प्रस्ताव के जरिए मंजूरी दिलाई जाएगी।
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