Monday , 15 June 2026

बंगाल में ढह गया TMC का ‘अभेद्य किला’….ऑटो स्टैंड से लेकर रेत माफिया तक का सिंडिकेट राज खत्म; बाहुबली सलाखों के पीछे

कोलकाता/पूर्व बर्धमान: पश्चिम बंगाल में हाल ही में आए चुनावी नतीजों के बाद राज्य की सियासत में केवल शीर्ष स्तर पर ही उथल-पुथल नहीं मची है, बल्कि जमीनी स्तर पर भी सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) का दशकों पुराना अभेद्य किला पूरी तरह ढहता नजर आ रहा है। बंगाल की सड़कों से लेकर सरकारी इमारतों तक, कल तक जहां टीएमसी का एकछत्र राज था, वहां अब बदलाव की बयार बहने लगी है। इस बदलाव की सबसे बड़ी तस्वीर दक्षिण 24 परगना के सोनारपुर रेलवे स्टेशन के पास से सामने आई है। यहां स्थित ऑटो रिक्शा यूनियन का दफ्तर, जो कभी टीएमसी के पारंपरिक नीले-सफेद रंग में रंगा रहता था, अब पूरी तरह बदल चुका है। वहां अब भारतीय मजदूर संघ (BMS) का भगवा बैनर लहरा रहा है। यह बदलाव केवल झंडे या रंग का नहीं है, बल्कि बंगाल की जमीनी राजनीति और परिवहन व्यवस्था पर हावी टीएमसी के कथित सिंडिकेट राज के अंत का सीधा संकेत है।

कट मनी से मिली राहत, गायब हुए धौंस जमाने वाले नेता

सोनारपुर के स्थानीय ऑटो चालक इस सियासी उलटफेर के बाद अब बड़ी राहत की सांस ले रहे हैं। ऑटो चालकों का साफ कहना है कि अब उन्हें स्थानीय टीएमसी नेताओं और उनके गुंडों को 120 रुपये प्रति वाहन की दर से दी जाने वाली जबरन मासिक वसूली यानी ‘कट मनी’ नहीं देनी पड़ रही है। उल्लेखनीय है कि इसी इलाके से महज दो किलोमीटर दूर टीएमसी के कद्दावर नेता अभिषेक बनर्जी पर जनता का भारी गुस्सा फूटा था, जहां एक उग्र भीड़ ने उन पर अंडे और पत्थर बरसाए थे। स्थानीय लोगों के अनुसार, कल तक जो नेता आम जनता पर धौंस जमाते थे, वे चुनावी नतीजे आते ही अब पूरी तरह लापता हैं। वार्ड नंबर 13 की एक सब्जी विक्रेता रूपाली मंडल ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि टीएमसी काउंसलर ने उन्हें दुकान चलाने के एवज में 20,000 रुपये की भारी रिश्वत मांगी थी और मना करने पर उनकी दुकान उजाड़ दी गई थी। चुनावी नतीजों के बाद से वह काउंसलर फरार है और उसके घर पर ताला लटका हुआ है, जिसके बाद पीड़ित महिला ने भाजपा नेताओं से मदद मांगी है।

बेलीघाटा में सन्नाटा, बाहुबली राजू नस्कर पहुंचा सलाखों के पीछे

कोलकाता का बेलीघाटा इलाका जो कभी तृणमूल कांग्रेस का सबसे मजबूत और सुरक्षित गढ़ माना जाता था, वहां अब पूरी तरह सन्नाटा पसरा हुआ है और पार्टी के सभी स्थानीय दफ्तरों में ताले लटके हैं। राज्य में सत्ता का समीकरण बदलते ही कोलकाता नगर निगम (KMC) भी एक्शन मोड में आ गया है। निगम ने इस इलाके में धड़ल्ले से खड़ी की गई अवैध इमारतों और प्रमोटिंग सिंडिकेट पर हथौड़ा चलाना शुरू कर दिया है। इस पूरे सिंडिकेट का सबसे बड़ा सरगना और टीएमसी का बाहुबली ठेकेदार राजू नस्कर अब सलाखों के पीछे पहुंच चुका है। कभी एक मामूली टैक्सी ड्राइवर रहे और अब करोड़ों की अवैध संपत्ति के मालिक बने राजू नस्कर के खिलाफ अब स्थानीय लोग खुलकर सामने आ रहे हैं और पुलिस में जमीन हड़पने की शिकायतें दर्ज करा रहे हैं।

बाढ़ आश्रय गृह से चल रहा था रेत माफिया का काला खेल

कोलकाता से करीब 100 किलोमीटर दूर पूर्व बर्धमान के जमालपुर ब्लॉक से सिंडिकेट राज की जो तस्वीरें सामने आई हैं, वे बेहद हैरान करने वाली हैं। यहाँ ब्लॉक आईएनटीटीयूसी (INTTUC) अध्यक्ष तबरक अली मंडल और उनकी पंचायत प्रधान पत्नी आरिफा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। ये दोनों रसूखदार मिलकर एक सरकारी कम्युनिटी सेंटर और बाढ़ आश्रय गृह पर अवैध कब्जा जमाए हुए थे और इसी सरकारी भवन को अड्डा बनाकर दामोदर नदी में अवैध रेत खनन का काला कारोबार चला रहे थे।

पुलिस ने जब इन सरकारी भवनों पर छापेमारी की तो वहां से ग्रामीणों को बांटे जाने वाले खाद, बीज, कीटनाशक और मनरेगा के भारी संख्या में जॉब कार्ड जब्त किए गए, जिन्हें ब्लैक मार्केट में ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा था। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, यहां से हर दिन 150 से 200 ट्रक अवैध रेत लेकर जाते थे, लेकिन टीएमसी नेताओं के डर के मारे कोई मुंह नहीं खोलता था। अब जब यह पूरा सिंडिकेट जेल की सलाखों के पीछे है, तो ग्रामीणों का डर गायब हो चुका है और वे ‘बांग्लार बाड़ी’ जैसी सरकारी आवास योजनाओं में नेताओं द्वारा ली गई कट मनी की शिकायत दर्ज कराने की तैयारी कर रहे हैं। दूसरी ओर, भाजपा नेताओं का साफ कहना है कि बंगाल में सिंडिकेट और गुंडागर्दी का दौर अब पूरी तरह खत्म हो चुका है।

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