
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखने वाले प्रतीक यादव के आकस्मिक निधन के बाद अब उनकी संपत्ति और कथित वसीयत को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। सियासी और सामाजिक गलियारों में इस बात की चर्चाएं बेहद तेज हैं कि प्रतीक यादव ने अपनी वसीयत में एक बेहद चौंकाने वाला फैसला लिया था। सूत्रों के हवाले से यह बड़ा दावा किया जा रहा है कि उन्होंने अपनी अकूत संपत्ति का वारिस सिर्फ अपनी दोनों बेटियों को बनाया है, जबकि अपनी पत्नी और भाजपा नेता अपर्णा यादव का इस वसीयत में कहीं कोई जिक्र नहीं किया है।
लखनऊ की 22 बीघा जमीन सहित बेटियों को मिली करोड़ों की संपत्ति
सामने आ रही जानकारियों के मुताबिक, प्रतीक यादव की इस कथित वसीयत में लखनऊ स्थित 22 बीघा की बेशकीमती कृषि भूमि सहित कई अन्य चल और अचल संपत्तियों का लेखा-जोखा शामिल है। यह पूरी जायदाद उन्होंने अपनी दोनों बेटियों के नाम कर दी है। हालांकि, इस वसीयत में एक बेहद कड़ा और विशेष नियम भी जोड़ा गया है। सूत्रों का कहना है कि बेटियों को इस संपत्ति से मिलने वाले लाभ और उसके उपयोग का पूरा अधिकार तो होगा, लेकिन वे एक तय उम्र सीमा से पहले इसे किसी भी हाल में बेच नहीं सकेंगी। बताया जा रहा है कि बड़ी बेटी जब तक 27 वर्ष की आयु पूरी नहीं कर लेती, तब तक उसे संपत्ति को बेचने या पूरी तरह अपने मुताबिक इस्तेमाल करने का कानूनी अधिकार नहीं मिलेगा।
वसीयत से अपर्णा यादव का नाम गायब होने पर उठे सवाल
इस पूरी खबर में सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात अपर्णा यादव के नाम का गायब होना है। उत्तर प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष और भाजपा की वरिष्ठ नेता अपर्णा यादव का नाम इस कथित वसीयत में न होने से हर कोई दंग है। इस खुलासे के बाद से ही राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि, इस पूरे मामले पर अब तक यादव परिवार की ओर से कोई भी आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है और न ही इस वसीयत को अभी तक सार्वजनिक रूप से पेश किया गया है। आपको बता दें कि जहां अपर्णा यादव राजनीति में सक्रिय हैं, वहीं प्रतीक यादव हमेशा सियासी चकाचौंध से दूर रहकर अपने फिटनेस और रियल एस्टेट के कारोबार को संभालते थे।
क्या पारिवारिक अनबन बनी इस बड़े फैसले की वजह?
इस कथित वसीयत की खबर के सोशल मीडिया पर आते ही अब लोग अतीत की कड़ियों को जोड़ने लगे हैं। दरअसल, इसी साल की शुरुआत में प्रतीक यादव और अपर्णा यादव के आपसी रिश्तों को लेकर इंटरनेट पर कई तरह की अफवाहें और अटकलें उड़ी थीं। कुछ सोशल मीडिया पोस्ट्स के बाद यह दावा किया जाने लगा था कि दोनों के बीच गंभीर मतभेद चल रहे हैं। हालांकि, उस वक्त विवाद बढ़ता देख खुद प्रतीक यादव ने एक वीडियो संदेश जारी कर इन तमाम खबरों का खंडन किया था। उन्होंने कहा था कि मियां-बीवी के बीच मामूली कहासुनी हुई थी और अब सब कुछ पूरी तरह सामान्य है। लेकिन अब इस वसीयत के सामने आने के बाद लोग एक बार फिर उन पुरानी अटकलों को सच मानकर चर्चाएं कर रहे हैं।
अभी तक नहीं हुई है कोई आधिकारिक पुष्टि
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह पूरी जानकारी केवल सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के दावों पर आधारित है। प्रतीक यादव के परिवार या उनके किसी करीबी ने अब तक इस वसीयत की प्रामाणिकता को लेकर कोई मुहर नहीं लगाई है। जब तक परिवार की तरफ से कोई औपचारिक बयान नहीं आता, तब तक इस वसीयत और संपत्ति के बंटवारे को लेकर चल रही खबरों को पूरी तरह सच नहीं माना जा सकता।
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