Friday , 15 May 2026

बड़ी खबर :अब भारत नहीं आएगा रूसी तेल? क्या पेट्रोल-डीजल की होने वाली है भारी किल्लत, जानिए पूरा सच!

नई दिल्ली:  वैश्विक तेल बाजार और भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से अगले कुछ घंटे बेहद संवेदनशील माने जा रहे हैं। रूसी कच्चे तेल के आयात पर अमेरिका द्वारा भारत को दी गई विशेष छूट की समय सीमा आज यानी 16 मई की रात 12:01 बजे समाप्त हो रही है। एक तरफ जहां स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में पिछले 75 दिनों से लगातार तनाव और व्यवधान की स्थिति बनी हुई है, वहीं दूसरी तरफ वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव भी लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे नाजुक वक्त में भारत ने एक बार फिर कूटनीतिक मोर्चे पर सक्रियता दिखाते हुए अमेरिका से इस विशेष छूट की अवधि को आगे बढ़ाने का पुरजोर आग्रह किया है।

गौरतलब है कि मार्च महीने में शुरू की गई इस विशेष व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य बाजार में अतिरिक्त कच्चे तेल की आपूर्ति सुनिश्चित कर वैश्विक स्तर पर कीमतों और बाजारों को स्थिर रखना था। लेकिन अब समय सीमा खत्म होने के कगार पर पहुंचने से भारतीय तेल बाजार में हलचल तेज हो गई है।

वाशिंगटन का दबाव बनाम भारत की ‘ऊर्जा संप्रभुता’

मौजूदा अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत रूसी तेल पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं लगाया गया है, लेकिन वाशिंगटन (अमेरिका) लगातार नई दिल्ली पर कूटनीतिक दबाव बना रहा है। अमेरिका का साफ कहना है कि यूक्रेन युद्ध के चलते भारत मॉस्को (रूस) से की जा रही रियायती और सस्ती खरीदारी को कम करे।

दूसरी ओर, 28 फरवरी से मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में गहराए संकट के कारण भारतीय अधिकारियों ने अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। भारतीय नीति निर्धारकों का कहना है कि देश की सवा सौ करोड़ से अधिक आबादी की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। भारत ने अमेरिका और वैश्विक मंचों पर चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि यदि तेल बाजारों में इस समय अस्थिरता आई, तो इसके बेहद गंभीर आर्थिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

प्रतिबंधों के डर से भारतीय रिफाइनरियों ने तोड़े सारे रिकॉर्ड

अमेरिका की विशेष छूट खत्म होने की आशंका और भविष्य की अनिश्चितताओं के बीच भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने रूस से कच्चे तेल की खरीदारी में अभूतपूर्व तेजी ला दी है। हालिया आंकड़ों पर नजर डालें तो मई महीने में रूस से भारत का कच्चे तेल का आयात अब तक के सबसे उच्चतम स्तर यानी रिकॉर्ड 23 लाख बैरल प्रति दिन (bpd) तक पहुंच गया है।

हालांकि, भारत अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर पूरी तरह सतर्क भी है। भारत ने हाल ही में उन रूसी एलएनजी (LNG) कार्गो को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया है जो सीधे तौर पर अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आते हैं। सरकार की इसी सख्ती के कारण रूसी एलएनजी का कम से कम एक बड़ा शिपमेंट फिलहाल सिंगापुर के पास समुद्र में अटका हुआ है।

देश में ईंधन का संकट नहीं, केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी का बड़ा आश्वासन

रूसी तेल पर छूट खत्म होने की खबरों के बीच देश में ईंधन की किल्लत को लेकर तरह-तरह की आशंकाएं जताई जा रही थीं। इन तमाम कयासों और सवालों पर विराम लगाते हुए केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने देशवासियों को बड़ी राहत दी है। उन्होंने साफ तौर पर आश्वस्त किया है कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है और न ही आने वाले समय में ऐसी कोई नौबत आएगी।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए मजबूत बैकअप तैयार कर रखा है। वर्तमान में भारत के पास 69 दिनों का एलएनजी (LNG) और 45 दिनों का एलपीजी (LPG) स्टॉक सुरक्षित बफर के रूप में उपलब्ध है। इतना ही नहीं, मध्य पूर्व के तनावपूर्ण हालातों को देखते हुए सरकार ने घरेलू स्तर पर एलपीजी का दैनिक उत्पादन भी 36,000 टन से सीधे बढ़ाकर 54,000 टन कर दिया है।

वैश्विक तनाव के बीच ऊर्जा सुरक्षा के इस महत्वपूर्ण रोडमैप और भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा करने के लिए रूसी उप ऊर्जा मंत्री और भारतीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के बीच आगामी जून महीने में एक हाई-लेवल बैठक होने की संभावना है। फिलहाल, भारत सरकार हर अंतरराष्ट्रीय हलचल और जियोपॉलिटिकल घटनाक्रम पर पैनी नजर रखते हुए घरेलू ईंधन आपूर्ति को पूरी तरह सुरक्षित बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

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