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NEET-UG 2026 पेपर लीक: ब्यूटी पार्लर संचालिका से लेकर प्रिंटिंग प्रेस तक फैला जाल, CBI की जांच में ‘गेस पेपर’ के नाम पर हुए खेल का पर्दाफाश

नई दिल्ली। देशभर के 23 लाख से अधिक मेडिकल उम्मीदवारों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाली NEET-UG 2026 परीक्षा के रद्द होने के बाद अब परत-दर-परत चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की सघन जांच में यह साफ हो गया है कि यह केवल एक साधारण पेपर लीक नहीं, बल्कि कई राज्यों में फैला एक संगठित अपराध था। ‘गेस पेपर’ के नाम पर लाखों के सौदे और टेलीग्राम चैनलों के जरिए प्रश्नपत्रों का वितरण इस पूरे स्कैम का केंद्र रहा है।

CBI का देशव्यापी एक्शन: नासिक से पुणे तक गिरफ्तारियां

पेपर लीक मामले में CBI अब तक 5 मुख्य आरोपियों को दबोच चुकी है। इसमें महाराष्ट्र के नासिक से शुभम खैरनार और पुणे से मनीषा वाघमारे की गिरफ्तारी ने जांच की दिशा बदल दी है। पुलिस के अनुसार, मनीषा वाघमारे पहले ब्यूटी पार्लर चलाती थी और पिछले तीन वर्षों से एडमिशन सिंडिकेट के संपर्क में थी। जांच में उसके बैंक खातों से भारी लेनदेन के सबूत मिले हैं, जो सीधे तौर पर परीक्षा धांधली से जुड़े बताए जा रहे हैं।

नासिक की प्रिंटिंग प्रेस से लीक हुआ पेपर, 25 लाख में हुई डील

गिरफ्तार आरोपी शुभम खैरनार ने पूछताछ में कबूला है कि वह उस प्रिंटिंग प्रेस की प्रक्रिया से जुड़ा था जहां प्रश्नपत्र छप रहे थे। चौंकाने वाली बात यह है कि असली सवालों को ‘गेस पेपर’ का नाम देकर परीक्षा से तीन हफ्ते पहले ही सर्कुलेट करना शुरू कर दिया गया था। इन गेस पेपर्स के 150 सवाल हुबहू NEET के असली पेपर से मैच कर गए। गिरोह ने प्रत्येक छात्र से पेपर के बदले 25 से 30 लाख रुपये की मोटी रकम वसूली थी।

टेलीग्राम और ऑनलाइन क्लास का सहारा

जांच में यह भी सामने आया है कि इस सिंडिकेट ने तकनीक का बखूबी इस्तेमाल किया। टेलीग्राम के जरिए राजस्थान, दिल्ली और आंध्र प्रदेश समेत 10 राज्यों में पेपर फैलाया गया। इतना ही नहीं, कुछ ऑनलाइन क्लास में ‘महत्वपूर्ण प्रश्न’ बताने के नाम पर 50-50 हजार रुपये लिए गए और वही सवाल छात्रों को रटाए गए जो लीक पेपर (केमिस्ट्री और बायोलॉजी की PDF) में मौजूद थे। यह पूरा खेल परीक्षा से 48 घंटे पहले अपने चरम पर था।

सड़कों पर आक्रोश: छात्रों का प्रदर्शन और सुप्रीम कोर्ट की चौखट

NTA मुख्यालय के बाहर ABVP और NSUI के कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन उग्र हो गया है। छात्रों का कहना है कि बार-बार होने वाली ये गड़बड़ियां उनकी मेहनत पर सीधा प्रहार हैं। मशहूर शिक्षक खान सर ने भी NTA को ‘नेवर ट्रस्टेबल एजेंसी’ करार देते हुए नाराजगी जताई है। वहीं, FAIMA ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर शीर्ष अदालत की निगरानी में दोबारा परीक्षा कराने और NTA के पुनर्गठन की मांग की है।

जुलाई में दोबारा परीक्षा की संभावना, शैक्षणिक सत्र होगा प्रभावित

विशेषज्ञों का मानना है कि नई परीक्षा के आयोजन के लिए पेपर सेटिंग और प्रिंटिंग में कम से कम 25-30 दिन का समय लगेगा। ऐसे में परीक्षा जुलाई के अंत में होने और परिणाम अगस्त-सितंबर तक आने की उम्मीद है। इसका सीधा असर नए शैक्षणिक सत्र पर पड़ेगा, जो अब नवंबर या दिसंबर तक ही शुरू हो पाएगा। इससे छात्रों का पूरा एक साल प्रभावित होने का डर सता रहा है।

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