रांची। 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा (PT) में कथित धांधली और अनियमितताओं के खिलाफ उबला झारखंड का छात्र आंदोलन अब एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक मोड़ पर आ पहुंचा है। राजधानी रांची के ऐतिहासिक जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहा अभ्यर्थियों का सत्याग्रह शनिवार को 15वें दिन में प्रवेश कर गया है। कड़ाके की धूप और शारीरिक थकान के बावजूद हजारों युवाओं का मनोबल टस से मस नहीं हुआ है। सरकार के साथ हुई पिछले दौर की वार्ता बेनतीजा रहने के बाद अब छात्रों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।
सर्किट हाउस में निर्णायक महामंथन: 10 सदस्यीय दल वार्ता के लिए तैयार
शुक्रवार को राज्य सरकार के प्रतिनिधियों और आंदोलनकारी छात्रों के बीच हुई करीब एक घंटे की बातचीत बिना किसी निष्कर्ष के समाप्त हो गई थी। इसके बाद शनिवार सुबह 10 बजे प्रशासन ने छात्र प्रतिनिधियों को एक बार फिर रांची स्थित सर्किट हाउस में वार्ता के लिए बुलाया है। आंदोलन की अगुवाई कर रहे प्रमुख छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने स्पष्ट किया है कि बैठकों का दौर चाहे जितना लंबा चले, जब तक सरकार लिखित में ठोस फैसला नहीं लेती, आंदोलन खत्म नहीं होगा। उन्होंने कहा कि प्रतिनिधिमंडल में कितने सदस्य जा रहे हैं यह महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि महत्वपूर्ण यह है कि झारखंड के लाखों युवाओं की मांग एक ही है और उससे कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
छात्रों की दो सिरमौर मांगें: JPSC रद्द हो और CBI संभाले जांच की कमान
जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में डटे अभ्यर्थियों का आंदोलन मुख्य रूप से दो बड़ी मांगों पर टिका हुआ है। पहली मांग यह है कि 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा में हुई धांधली की निष्पक्ष जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराई जाए, ताकि पर्दे के पीछे छिपे बड़े चेहरों का नकाब उतर सके। वहीं दूसरी मांग यह है कि विवादित 14वीं JPSC PT परीक्षा को पूरी तरह रद्द कर नए सिरे से पारदर्शी तरीके से दोबारा परीक्षा आयोजित की जाए। छात्रों का तर्क है कि जब तक पूरे मामले का दूध का दूध और पानी का पानी नहीं हो जाता, तब तक इस परीक्षा परिणाम के आधार पर आगे बढ़ना प्रतिभावान अभ्यर्थियों के साथ सरासर अन्याय होगा।
अनशन से घट रही ऊर्जा, पर बुलंद है हौसला: प्रदेशव्यापी भूख हड़ताल की चेतावनी
आंदोलनकारी छात्र नेता कुश महतो ने सरकार को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि लगातार अनशन और प्रदर्शन के कारण अभ्यर्थियों की शारीरिक ऊर्जा भले ही कम हो रही हो, लेकिन उनका आत्मबल पहले से कहीं अधिक मजबूत हुआ है। देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व में 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल सरकार के समक्ष छात्रों का पक्ष रखेगा। यदि इस बैठक में भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और प्रशासन ने अभ्यर्थियों की न्यायसंगत मांगों पर सकारात्मक मुहर नहीं लगाई, तो यह आंदोलन केवल रांची तक सीमित नहीं रहेगा। छात्रों ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी न होने की स्थिति में पूरे झारखंड के प्रतियोगी छात्र सड़क पर उतरेंगे और राज्यव्यापी भूख हड़ताल शुरू करेंगे।
अब आगे क्या? सरकार के पाले में गेंद
15वें दिन भी जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में गूंजते नारों ने यह साफ कर दिया है कि युवा अब खोखले आश्वासनों से बहलने वाले नहीं हैं। सरकार के लिए भी यह परीक्षा का समय है कि वह युवाओं के आक्रोश को भांपते हुए पारदर्शी कदम उठाती है या फिर यह आंदोलन आने वाले दिनों में राज्य सरकार के लिए एक बड़ा राजनीतिक संकट बन जाएगा। फिलहाल पूरे प्रदेश की निगाहें सर्किट हाउस में होने वाली उच्चस्तरीय बैठक के नतीजों पर टिकी हुई हैं।
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