Monday , 7 September 2026

सत्य निकेतन हादसा: मालिक की लापरवाही या सिस्टम की चूक? छात्रों से भरी इमारत कैसे बनी मौत का जाल

नई दिल्ली। दिल्ली के मोतीबाग स्थित सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर एक बड़ा और दर्दनाक हादसा पेश आया। दिल्ली विश्वविद्यालय (साउथ कैंपस) के पास छात्रों के पीजी के तौर पर इस्तेमाल हो रही पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर जमींदोज हो गई। इस भीषण हादसे में अब तक 5 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हैं। मलबे में कई जिंदगियों के अभी भी दबे होने की आशंका है, जिसके चलते राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है।

सत्य निकेतन में दोपहर 1:30 बजे मची चीख-पुकार

रविवार की दोपहर करीब 1:30 बजे सत्य निकेतन का इलाका सामान्य दिनों की तरह चहल-पहल से भरा था। तभी अचानक ‘होस्टल डेज’ नाम से संचालित पांच मंजिला पीजी इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई। छुट्टी का दिन होने की वजह से ज्यादातर छात्र अपने कमरों में ही मौजूद थे। इमारत ढहते ही चारों तरफ धूल का गुबार और चीख-पुकार मच गई। कमरे, दीवारें, किताबें और छात्रों के सपने चंद पलों में मलबे के ढेर में तब्दील हो गए।

बेसमेंट के साथ 5 मंजिला था पीजी, रहते थे डीयू के कई छात्र

जानकारी के मुताबिक, जिस इमारत में यह हादसा हुआ वह बेसमेंट के अलावा 5 मंजिला थी। हर फ्लोर पर करीब 4 कमरे थे और प्रति कमरे में 2 से 3 छात्र रहते थे। यानी प्रत्येक तल पर कम से कम 8 से 10 छात्र रह रहे थे, जबकि दूसरी मंजिल पर मेस और किचन संचालित हो रहा था। यहां दिल्ली विश्वविद्यालय के मोतीलाल नेहरू कॉलेज, श्री वेंकटेश्वर कॉलेज समेत साउथ कैंपस के विभिन्न संस्थानों के छात्र किराए पर रहकर पढ़ाई कर रहे थे।

एनडीआरएफ, आईटीबीपी और दमकल की टीमें रेस्क्यू में जुटीं

हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, दमकल विभाग, एनडीआरएफ (NDRF), आईटीबीपी (ITBP) और बीएसएफ (BSF) के जवान मौके पर पहुंचे। भारी मलबे को हटाने के लिए जेसीबी मशीनों और आधुनिक कटर का इस्तेमाल किया जा रहा है। मलबे के नीचे दबे छात्रों और अन्य लोगों की सांसें बचाने के लिए बेहद सावधानीपूर्वक पत्थरों और लिंटल को हटाया जा रहा है। कई घायलों को सुरक्षित निकालकर नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

बेसमेंट में चल रहा था निर्माण कार्य, जांच के घेरे में लापरवाही

प्राथमिक जांच में पुलिस और प्रशासन को पता चला है कि इमारत के बेसमेंट में निर्माण कार्य और बदलाव किए जा रहे थे। आशंका जताई जा रही है कि बेसमेंट की खुदाई या स्ट्रक्चरल छेड़छाड़ की वजह से इमारत की नींव कमजोर पड़ गई। इसके अलावा सीलन और पानी जमा होने जैसे पहलुओं की भी जांच की जा रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि यदि बेसमेंट में खतरनाक निर्माण कार्य चल रहा था, तो पीजी को तुरंत खाली क्यों नहीं कराया गया? क्या नगर निगम या स्थानीय प्रशासन से इसके लिए अनुमति ली गई थी?

सीएम और नेताओं ने लिया जायजा, जांच के आदेश

हादसे के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा और क्षेत्रीय सांसद बांसुरी स्वराज सहित कई वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बगल की इमारत की छत से पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन का मुआयना किया और अधिकारियों को त्वरित राहत के निर्देश दिए। उन्होंने दो टूक कहा कि इस घोर लापरवाही के जिम्मेदार किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने जताया दुख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हादसे पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की है। उधर, गृह मंत्री अमित शाह ने भी हादसे पर दुख जताते हुए अपने सार्वजनिक कार्यक्रम को स्थगित किया और दिल्ली की सीएम, पुलिस कमिश्नर व एनडीआरएफ से फोन पर स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि प्रशासन और एनडीआरएफ पूरी तेजी से राहत कार्य में जुटे हैं और घायलों को हर संभव चिकित्सा सहायता दी जा रही है।

फिलहाल रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है, लेकिन इस दर्दनाक मंजर के बीच यह सवाल हर किसी के जेहन में गूंज रहा है कि यह सिर्फ एक इमारत का गिरना था या फिर नियमों और निगरानी व्यवस्था की खुली अनदेखी का नतीजा?

 

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