
गुजरात के सियासी गलियारों में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज क्षत्रप शंकरसिंह वाघेला ने कांग्रेस में दोबारा शामिल होने की दिली इच्छा जताई है। इस अप्रत्याशित कदम के बाद वाघेला ने आगामी 2 अक्टूबर को अपनी नई पार्टी के औपचारिक गठन और राजनीतिक अभियान की शुरुआत का प्लान फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है। कांग्रेस पार्टी के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो वाघेला के साथ प्रारंभिक बातचीत काफी सकारात्मक रही है, लेकिन पार्टी में उनके कद, संगठनात्मक रोल और भविष्य की भूमिका को लेकर अंतिम फैसला आलाकमान से विमर्श के बाद ही तय किया जाएगा।
हाईकमान से चल रहा संवाद, अमित चावड़ा ने दी अहम जानकारी
गुजरात प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अमित चावड़ा ने शंकरसिंह वाघेला की घर वापसी की खबरों की पुष्टि करते हुए बताया कि इस मुद्दे पर केंद्रीय नेतृत्व के साथ मंथन जारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय जनता पार्टी की कार्यशैली से असंतुष्ट कई कद्दावर चेहरे इन दिनों लगातार कांग्रेस के संपर्क में हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि राज्य में कांग्रेस ही एक मजबूत और साझा लोकतांत्रिक विकल्प दे सकती है। चावड़ा ने यह भी रेखांकित किया कि वाघेला लंबे समय से भाजपा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों के खिलाफ खुलकर आवाज उठाते रहे हैं, जिससे उनकी विचारधारा का झुकाव साफ झलकता है।
‘प्रजा शक्ति पार्टी’ को किया था रिवाइव, अब बदले सियासी सुर
सियासी घटनाक्रम इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि हाल ही में शंकरसिंह वाघेला ने अपनी ‘प्रजा शक्ति डेमोक्रेटिक पार्टी’ को पुनर्जीवित करने का दावा किया था। उन्होंने सार्वजनिक मंचों से ऐलान किया था कि वे 2027 का गुजरात विधानसभा चुनाव अपने ही संगठन के दम पर अकेले लड़ेंगे। उस दौरान उन्होंने तल्ख टिप्पणी करते हुए यह भी कहा था कि अब कांग्रेस में लौटने का वक्त बीत चुका है और वे किसी के साथ जाने के बजाय अपना मंच तैयार करेंगे। हालांकि, बदले हुए राजनीतिक समीकरणों के बीच वाघेला सीधे कांग्रेस नेतृत्व के संपर्क में आ गए हैं और नई पार्टी के प्रचार पर ब्रेक लगा दिया है।
1995 से 2017: बगावत, मुख्यमंत्री की कुर्सी और पार्टी बदलने का सफर
शंकरसिंह वाघेला का राजनीतिक सफर बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा है। साल 1995 में उन्होंने भाजपा से बगावत कर राष्ट्रीय जनता पार्टी (RJP) का गठन किया था और फिर कांग्रेस के बाहरी समर्थन से गुजरात के मुख्यमंत्री बने। इसके बाद 1998 में वे औपचारिक रूप से कांग्रेस में शामिल हो गए। करीब दो दशक तक कांग्रेस में प्रभावशाली भूमिका निभाने के बाद, 2017 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले उन्होंने बगावती तेवर दिखाते हुए कांग्रेस छोड़ दी। उनके साथ कई वफादार विधायकों ने भी इस्तीफा दिया था। इसके बाद उन्होंने ‘जन विकल्प मोर्चा’ बनाकर चुनाव लड़ा, लेकिन उनका एक भी प्रत्याशी जीत का स्वाद नहीं चख सका।
एनसीपी से होते हुए फिर कांग्रेस की दहलीज तक
साल 2019 में वाघेला ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) का दामन थामा और राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी संभाली, लेकिन वहां भी उनकी पारी ज्यादा लंबी नहीं चली। नवंबर 2024 में उन्होंने अपने गांधीनगर स्थित आवास ‘वसंत वागदो’ पर समर्थकों की बैठक बुलाकर ‘प्रजा शक्ति डेमोक्रेटिक पार्टी’ को दोबारा जिंदा किया और 2 अक्टूबर से व्यापक अभियान की योजना बनाई थी। अब जब गांधीनगर नगर निगम के चुनाव सिर पर हैं, कांग्रेस नेतृत्व वाघेला के जमीनी नेटवर्क और प्रभाव को ध्यान में रखते हुए इस सियासी जोड़-तोड़ पर पैनी नजर बनाए हुए है।
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