Sunday , 21 June 2026

बांग्लादेश-चीन पर एकसाथ नजर : क्यों भारत के लिए अहम है हल्दिया में बनने वाला नौसेना का नया ‘बेस’

भारतीय नौसेना पश्चिम बंगाल के हल्दिया में एक नया नौसैनिक अड्डा स्थापित करने जा रही है। इसका उद्देश्य बंगाल की खाड़ी में सैन्य मौजूदगी मजबूत करना, समुद्री निगरानी बढ़ाना और चीन-पाकिस्तान के साथ बांग्लादेश में हो रही गतिविधियों पर नजर रखना है। यह सुविधा हल्दिया पोर्ट अथॉरिटी के सहयोग से तैयार की जा रही है। इस प्रस्ताव पर बहुत पहले से विचार चल रहा है, जिसे अब आधिकारिक मंजूरी मिल गई है। आइए इसकी अहमियत समझते हैं।

कहां होगा नया अड्डा?

हल्दिया हुगली नदी पर स्थित है और बंगाल की खाड़ी से करीब 130 किलोमीटर दूर सैंडहेड्स के पास है। यहां 1970 के दशक से चालू हल्दिया डॉक कॉम्प्लेक्स है, जो बड़े जहाजों को संभालने में सक्षम है। इससे नौसेना को जरूरी बुनियादी ढांचा पहले से तैयार मिलेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआत में एक विशेष जेट्टी (जहाज बांधने की जगह) और अन्य सहायक सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा। नौसेना नागरिक बंदरगाह के साथ समन्वय में काम करेगी।

अड्डे पर कौन-कौनसे पोत होंगे तैनात?

नई अड्डे पर बड़े जहाजों की तैनाती नहीं होगी। यहां मुख्य रूप से फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट (FIC) और न्यू वॉटर जेट फास्ट अटैक क्राफ्ट (NWJFAC) तैनात किए जाएंगे। ये जहाज तटीय और बंदरगाह की सुरक्षा, घुसपैठ पर लगाम लगाने और विशेष अभियानों में काम आते हैं। 2024 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंहेै की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने 120 FIC और 31 NWJFAC की खरीद को मंजूरी दी थी।

FIC और NWJFAC क्या होते हैं?

FIC छोटे और तेज गति से चलने वाले जहाज होते हैं। करीब 100 टन वजनी इन जहाजों को 10-12 सदस्यों का चालक दल चला सकता है। इन पर मशीन गन लगी होती है। वहीं, NWJFAC FIC से थोड़े बड़े जहाज होते हैं, जो 40-45 नॉट्स की गति से चलते हैं। इनमें मशीन गन और नागास्त्र जैसे लूटरिंग मुनिशन भी तैनात की जा सकती हैं। ये निगरानी से लेकर हमले तक कई भूमिकाएं निभा सकते हैं।

बंगाल की खाड़ी में बढ़ेगी निगरानी

यह अड्डा नौसेना को बंगाल की खाड़ी तक सीधी पहुंच प्रदान करेगा। हालिया सालों में बंगाल की खाड़ी में चीन की नौसैनिक गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं। चीन ने बांग्लादेश में चटगांव और पायरा बंदरगाह में भागीदारी बढ़ाई है। दूसरी ओर, पाकिस्तान पहले से ही चीनी नौसैनिक प्लेटफॉर्म और पनडुब्बियों के दम पर इस क्षेत्र में सक्रियता बढ़ा रहा है। ऐसे में ये नया अड्डा पूर्व में उभरते चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश गठजोड़ को निपटने से मदद करेगा।

कितना अहम है ये अड्डा?

हल्दिया की रणनीतिक स्थिति चीन-पाकिस्तान-बांग्लादेश के अलावा नौसेना को बंगाल की खाड़ी से मलक्का स्ट्रेट की ओर जाने वाले समुद्री यातायात पर निगरानी रखने में मदद करेगी। यह वैश्विक व्यापार का अहम मार्ग है, जिसमें भी चीनी गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। ये अड्डा नौसेना को अंडमान-निकोबार कमान के साथ तालमेल बढ़ाने और पूर्वी मोर्चे पर किसी भी स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया देने में सक्षम करेगा और समुद्री संप्रभुता को मजबूत करेगा।

ये भी होंगे फायदे

ये अड्डा सैन्य उद्देश्यों के साथ-साथ आपदा राहत, चक्रवात और बाढ़ के दौरान सहायता में भी अहम भूमिका निभाएगा चूंकि बंगाल की खाड़ी में आए दिन चक्रवात और तूफान आते रहते हैं। बताया जा रहा है कि ये अन्य अड्डों के मुकाबले अपेक्षाकृत छोटा अड्डा होगा, जिसमें लगभग 100 अधिकारियों और नौसैनिकों की तैनाती की जा सकती है। इससे हुगली नदी के रास्ते बंगाल की खाड़ी वाला लंबे रास्ते का विकल्प भी मिलेगा।

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