Tuesday , 1 September 2026

प्रयागराज में गंगा-यमुना के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी: कानपुर बैराज से छोड़ा गया 3 लाख क्यूसेक पानी, प्रशासन अलर्ट मोड पर

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प्रयागराज। संगम नगरी प्रयागराज में गंगा, यमुना और उनकी सहायक नदियों के जलस्तर में लगातार उतार-चढ़ाव और वृद्धि का सिलसिला जारी है। सोमवार देर शाम जिला प्रशासन द्वारा जारी दैनिक बाढ़ बुलेटिन के अनुसार, नैनी में यमुना नदी का जलस्तर 82.390 मीटर दर्ज किया गया, जिसमें बीते 12 घंटों के दौरान 1.58 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। राहत की बात यह है कि जिले के सभी प्रमुख तटबंध पूरी तरह सुरक्षित हैं और प्रशासन स्थिति पर 24 घंटे कड़ी नजर बनाए हुए है।

गंगा और यमुना के विभिन्न घाटों पर स्थिति

बाढ़ नियंत्रण कक्ष के ताजा आंकड़ों के अनुसार नदियों का जलस्तर इस प्रकार दर्ज किया गया:

  • फाफामऊ (गंगा): 82.760 मीटर (पिछले 12 घंटों में 1.17 सेंटीमीटर की वृद्धि)।

  • छतनाग (गंगा): 82.000 मीटर (बीते 12 घंटों में 2.67 सेंटीमीटर की बढ़त)।

  • नैनी (यमुना): 82.390 मीटर दर्ज किया गया, जो फिलहाल खतरे के निशान से 2.354 मीटर नीचे बह रही है।

टोंस नदी खतरे के निशान के करीब, तटीय इलाकों में अलर्ट

सहायक नदियों में भी पानी का दबाव तेजी से बढ़ रहा है। कौड़हार घाट पर टोंस नदी का जलस्तर 83.890 मीटर पहुंच गया है, जिसमें 12 घंटों में 1.90 सेंटीमीटर का इजाफा हुआ। टोंस नदी अब खतरे के निशान से महज 0.11 मीटर नीचे रह गई है, जिसके चलते नदी के किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों के निवासियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, नारी क्षेत्र में बेलन नदी के जलस्तर में भी बीते 12 घंटों के भीतर 4.40 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

कानपुर बैराज से छोड़ा गया भारी पानी, जलस्तर और बढ़ने की आशंका

कानपुर बैराज से गंगा में 3,06,197 क्यूसेक पानी छोड़े जाने की आधिकारिक सूचना मिली है। बैराज से छोड़ा गया यह भारी जलप्रवाह जैसे ही प्रयागराज पहुंचेगा, गंगा के जलस्तर में और तेजी से उछाल आने की प्रबल संभावना है। सिंचाई विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारी बैराज से आ रहे पानी के प्रवाह और संगम क्षेत्र के तटों की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं।

प्रशासन की आमजन से सावधानी बरतने की अपील

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि तटबंधों की स्थिति मजबूत और सुरक्षित है, फिर भी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए राहत टीमें अलर्ट पर हैं। प्रशासन ने स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे उफनती नदियों के गहरे पानी, संवेदनशील घाटों और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जाने से बचें तथा समय-समय पर जारी प्रशासनिक दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करें।

 

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