Friday , 28 August 2026

प्रतापगढ़ में PM किसान योजना में महाघोटाला: कुंडा तहसील की लॉगिन ID हैक कर 3 लाख फर्जी खाते खोले, जानिए कैसे खुला राज़ 

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जनपद में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM-Kisan) में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़े और सुनियोजित साइबर अपराध का सनसनीखेज मामला सामने आया है। कुंडा तहसील की आधिकारिक लॉगिन आईडी और पासवर्ड का दुरुपयोग कर अपात्रों, नाबालिगों और बाहरी राज्यों के लोगों के नाम पर हजारों फर्जी पंजीकरण कराने के आरोप में साइबर क्राइम थाने में गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। प्रारंभिक जांच में करीब तीन लाख संदिग्ध लाभार्थियों द्वारा योजना का गलत तरीके से लाभ उठाने और 60 करोड़ रुपये से अधिक के सरकारी राजस्व के गबन की गंभीर आशंका जताई गई है।

कुंडा तहसील की लॉगिन से संगठित सिंडिकेट ने किया खेल उप कृषि निदेशक द्वारा साइबर थाने में दी गई आधिकारिक तहरीर के मुताबिक, तहसील कुंडा की सरकारी आईडी और विभागीय पोर्टल का अनाधिकृत इस्तेमाल कर यह बड़ा खेल रचा गया। संगठित गिरोह ने नियमों को ताक पर रखकर ऐसे लोगों का पंजीकरण कर दिया जो किसान सम्मान निधि के पात्र ही नहीं थे। इनमें बड़ी संख्या में नाबालिग, गैर-कृषक और जनपद व उत्तर प्रदेश से बाहर के अन्य राज्यों के नागरिक शामिल हैं। विभागीय पोर्टल पर बिना सत्यापन इन फर्जी प्रोफाइलों को एक्टिव कर सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये की धनराशि जारी करवा ली गई।

3 लाख संदिग्ध लाभार्थियों के खातों में पहुंची सरकारी रकम मामले की शुरुआती विभागीय व तकनीकी जांच में सामने आया है कि करीब 3 लाख फर्जी पंजीकरणों के जरिए शासकीय योजनाओं का अनुचित लाभ उठाया गया। इस महाघोटाले के कारण सरकार को लगभग 60 करोड़ रुपये से अधिक की प्रत्यक्ष वित्तीय क्षति पहुंचने का अनुमान है। मामले की भनक लगते ही कृषि विभाग में हड़कंप मच गया, जिसके बाद 26 अगस्त 2026 को साइबर क्राइम पुलिस थाना प्रतापगढ़ में औपचारिक तहरीर देकर केस दर्ज कराया गया।

एसपी दीपक भूकर का सख्त रुख, सिंडिकेट की तलाश में साइबर टीम प्रतापगढ़ के पुलिस अधीक्षक (SP) दीपक भूकर ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि प्रकरण अत्यंत गंभीर और संगठित अपराध से जुड़ा है। तहरीर के आधार पर सुसंगत कानूनी धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर विस्तृत विवेचना शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि इस फर्जीवाड़े में शामिल साइबर ठगों, विभागीय कर्मचारियों और बिचौलियों के पूरे नेटवर्क को बेनकाब करने के लिए डिजिटल साक्ष्य, आईपी एड्रेस और बैंक लेन-देन का ब्योरा खंगाला जा रहा है। मामले में शामिल सभी आरोपियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

 

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