
काठमांडू: नेपाल के रसुवा भोटे क्षेत्र में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, प्राकृतिक आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 675 हो गई है। निचले इलाकों के प्रभावित जिलों से शवों और अवशेषों को निकालने का सिलसिला लगातार जारी है। आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक 2,418 लोग अब भी लापता या संपर्क से बाहर हैं। इस भीषण आपदा में भारतीय नागरिकों पर भी असर पड़ा है, जिनमें से 287 लोगों से अब तक संपर्क स्थापित नहीं हो पाया है।
चितवन में सर्वाधिक 246 शव बरामद, कई जिलों में भारी जनहानि

NDRRMA की रिपोर्ट के अनुसार, बाढ़ का सबसे वीभत्स असर चितवन जिले में देखने को मिला है, जहां से अब तक सर्वाधिक 246 शव बरामद किए जा चुके हैं। अन्य प्रभावित जिलों में नवलपरासी पूर्व से 165, नवलपरासी पश्चिम से 63, गोरखा से 57, नुवाकोट से 51, धाडिंग से 45, तनहुन से 35 और रसुवा से 13 शव निकाले गए हैं। स्वास्थ्य टीमों द्वारा प्रभावित इलाकों में 219 घायल व्यक्तियों का उपचार किया गया है।
लापता लोगों में सैकड़ों मजदूर, पर्यटक और सुरक्षा कर्मी शामिल
आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, 2,418 लापता व्यक्तियों में भूमिगत जलविद्युत परियोजनाओं (हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स) में कार्यरत 933 मजदूर, 589 विदेशी नागरिक और विदेशी पर्यटकों के साथ गाइड/सहायक के तौर पर मौजूद 127 नेपाली नागरिक शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, 104 सुरक्षा व प्रशासनिक अधिकारी भी लापता हैं, जिनमें नेपाल सेना के 45 जवान, नेपाल पुलिस के 27 कर्मी, सीमा शुल्क (कस्टम) विभाग के 15 कर्मचारी, सशस्त्र पुलिस बल (APF) के 13 सदस्य तथा 4 इमिग्रेशन अधिकारी शामिल हैं।
287 भारतीय नागरिक अब भी संपर्क विहीन, 88 का हुआ सुरक्षित रेस्क्यू
भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, आपदा के बाद से 287 भारतीय नागरिकों से अभी तक कोई संपर्क नहीं हो सका है। हालांकि, राहत कार्य के तहत अब तक 88 भारतीयों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। वहीं, नेपाल पर्यटन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 183 भारतीय पर्यटकों समेत दुनियाभर के कुल 753 विदेशी सैलानी अब भी लापता हैं।
युद्धस्तर पर राहत व बचाव अभियान जारी
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनल ने बताया कि सेना, पुलिस, स्थानीय प्रशासन और आपातकालीन चिकित्सा दल रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग तथा चितवन जिलों के दुर्गम क्षेत्रों में संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहे हैं। मलबे और पानी में फंसे लोगों को निकालने के लिए हेलीकॉप्टरों और विशेष तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।
चीन ने दी झील टूटने की चेतावनी, बढ़ेगा जलस्तर का खतरा
इस बीच, चीन की ओर से नेपाल को एक नई गंभीर चेतावनी जारी की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, लेंडे नदी प्रणाली के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में बनी एक अस्थाई प्राकृतिक झील के कभी भी टूटने का खतरा मंडरा रहा है। यदि यह झील फूटती है, तो 500 घन मीटर प्रति सेकंड की तीव्र गति से भारी जलप्रवाह नीचे की ओर आ सकता है, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ का दूसरा और अधिक भयानक दौर आने की आशंका जताई गई है।
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