Wednesday , 24 June 2026

नेपाल में प्रधानमंत्री का कार्यभार संभालते ही सुशीला कार्की का बड़ा फैसला, जान गंवाने वाले युवाओं को शहीद का दर्जा, परिजनों को 10-10 लाख की मदद

काठमांडु । नेपाल में 8 सितंबर को सत्ता परिवर्तन के प्रदर्शन के दौरान पुलिस की गोली से मारे गए युवाओं को नेपाल की अंतरिम सरकार ने शहीद का दर्जा देने का निर्णय किया है। इनके परिजनों को दस-दस लाख रुपए की मदद की भी घोषणा की गई है।

सिंहदरबार में आज अपना कार्यभार संभालते हुए देश की अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने राष्ट्र के नाम संबोधन के दौरान कहा कि उन्होंने अपने पहले फैसले पर हस्ताक्षर किया है, जिसमें प्रदर्शन के दौरान पुलिस की गोली से मारे गए छात्रों को शहीद का दर्जा देने का निर्णय किया गया है।

कार्की ने बताया कि इस प्रदर्शन के दौरान मारे गए सभी युवाओं के परिजनों को दस-दस लाख रुपए की आर्थिक मदद का फैसला किया गया है। साथ ही सभी घायलों के इलाज का संपूर्ण खर्च नेपाल सरकार के द्वारा करने का भी निर्णय किया गया है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों की मौत हो गई उनके शव को गंतव्य तक पहुंचाने की व्यवस्था सरकार के तरफ से की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि नेपाल में बड़ी संख्या में युवा तत्कालीन ओली सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए जब सरकार ने 26 सोशल मीडिया साइट्स पर प्रतिबंध की घोषणा की। सोशल मीडिया साइट्स पर बैन लगाने और देश में व्याप्त भ्रष्टाचार के विरोध में जेन-जी के बैनर तले हजारों युवाओं ने राजधानी काठमांडू और विभिन्न शहरों में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सुरक्षा बलों की गोली से कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन सौ से अधिक घायल हो गए। मरने वालों में ज्यादातर स्कूल और कॉलेज के छात्र थे। दुनिया भर में गोलीकांड की तीखी निंदा हुई।उत्तेजित छात्रों ने पूरे देश में हिंसक प्रदर्शन कर राजनीतिक दलों के आला नेताओं, मंत्रियों और उनके आवास को निशाना बनाया।जिसके बाद ओली सरकार को आखिरकार जाना पड़ा।

नेपाल में 6 जले हुए शव बरामद, हिंसक घटनाओं में मरने वालों की संख्या 72 हुई

– मुख्य सचिव ने सुशीला कार्की को रिपोर्ट सौंपी, अभी भी अस्पतालों में 191 लोग भर्ती

देश की अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की को पदभार संभालने के बाद नेपाल सरकार के मुख्य सचिव ने देश में 8 सितंबर को शुरू हुए जेन जी प्रदर्शन और उसके बाद के झड़प और आगजनी के संबंध में एक रिपोर्ट सौंपी है। मुख्य सचिव एक नारायण अर्याल ने रिपोर्ट में बताया है कि हिंसक घटनाओं के दौरान मरने वालों की संख्या बढ़कर 72 हो गई है।

मुख्य सचिव रिपोर्ट के मुताबिक मरने वालों में 59 प्रदर्शनकारी, 10 जेल से भागे कैदी और तीन पुलिसकर्मी हैं। काठमांडू के बौद्ध में भाटभटेनी सुपर मार्केट से 6 जले हुए शव बरामद हुए हैं। इनके 4 पुरुष और दो महिलाएं हैं। मुख्य सचिव अर्याल ने बताया कि अभी भी अस्पतालों में 191 लोगों का इलाज किया जा रहा है। इनमें 134 प्रदर्शनकारी और 57 पुलिसकर्मी हैं। उन्होंने बताया कि 1000 से अधिक लोगों को अस्पताल से डिस्चार्ज किया जा चुका है।

हिंसक घटनाओं की होगी जांच

सुशीला कार्की ने 9 सितंबर को काठमांडू सहित देश भर में हुई आगजनी, हत्या, हिंसा और लूटपाट की घटनाओं की न्यायिक जांच कराने की बात कही है। उन्होंने देश के नाम संबोधन में कहा कि देश में किसी तरह की उद्दंडता को किसी भी हालत में जायज नहीं ठहराया जा सकता है।

सिंह दरबार में आज अपना कार्यभार संभालने के बाद अंतरिम प्रधानमंत्री कार्की ने कहा कि जेन जी प्रदर्शन के दौरान 9 सितंबर को काठमांडू सहित देशभर में सरकारी तथा निजी संपत्तियों पर हमले, आगजनी, लूटपाट की घटना एक षडयंत्र है। देश के नाम संबोधन में उन्होंने कहा कि जिस तरह से लक्ष्य की पहचान करके लोगों की संपत्तियों को जलाया गया है, यह युवा प्रदर्शनकारियों का काम नहीं है। सुशीला कार्की ने कहा कि कई समूहों की पहचान की गई है, जो इस पूरी हत्या, हिंसा, आगजनी और लूटपाट की घटनाओं में शामिल थे। उन्होंने कहा कि इस पूरी घटना की न्यायिक जांच कराई जाएगी। कार्की ने कहा कि इस तरह की उद्दंडता को किसी भी हालत में जायज नहीं ठहराया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि लोगों के निजी घरों, दुकानों, होटलों और फैक्ट्रियों में आगजनी और लूटपाट की घटनाओं से आम लोगों के जनजीवन पर बहुत ही बुरा असर हुआ है। कार्की ने कहा कि देश की आर्थिक अवस्था पहले ही बहुत खराब स्थिति से गुजर रही थी, उसी बीच इस तरह की घटनाओं के कारण आर्थिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि नेपाली नागरिक स्वयं ही मिल कर इस सदमे से ऊपर उठने में सक्षम हैं। कार्की ने उद्योग जगत की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस विषम परिस्थिति में उनकी दिखाई गई हिम्मत काबिल-ए-तारीफ है।

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