
नोएडा: दिल्ली के पूर्व मुख्य सचिव और 1975 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राकेश मेहता (74) का नोएडा स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, उन्होंने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। घटना 6 सितंबर की है, जिसकी सूचना पर पहुंची पुलिस को उनके फ्लैट से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है। नोट में उन्होंने अपनी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं और मानसिक तनाव का जिक्र किया है। पोस्टमार्टम के बाद 7 सितंबर को नई दिल्ली स्थित लोधी रोड श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार संपन्न किया गया।
अंदर से बंद था फ्लैट, दरवाजा तोड़कर दाखिल हुई पुलिस यह दुखद घटना नोएडा के सेक्टर-82 स्थित केंद्रीय विहार-2 सोसाइटी के फ्लैट में घटी। 6 सितंबर को डायल-112 पर सूचना मिलने के बाद थाना फेस-2 पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। फ्लैट का मुख्य दरवाजा अंदर से पूरी तरह लॉक था। अनहोनी की आशंका के चलते पुलिस ने दरवाजा तोड़कर भीतर प्रवेश किया, जहां मेहता मृत अवस्था में मिले। इसके बाद मौके पर फोरेंसिक टीम को बुलाकर बारीकी से साक्ष्य जुटाए गए और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
देहरादून में थीं पत्नी, फोन न उठने पर दी गई पुलिस को सूचना वारदात के समय राकेश मेहता की पत्नी सुमंती मेहता देहरादून में मौजूद थीं। जानकारी के मुताबिक, जब उन्होंने नोएडा स्थित पति से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की और कई बार कॉल करने पर भी कोई जवाब नहीं मिला, तो उन्हें अनहोनी की गहरी चिंता हुई। इसके बाद परिजनों ने तुरंत पुलिस को अलर्ट किया। पुलिस अब फ्लैट से मिले साक्ष्यों, मोबाइल कॉल डिटेल्स और नोट के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
सुसाइड नोट में छलका दर्द: किसी को नहीं ठहराया जिम्मेदार पुलिस जांच में सामने आया है कि घटनास्थल से मिले नोट में राकेश मेहता ने अपनी बिगड़ती शारीरिक सेहत और उससे उपजे मानसिक तनाव को इस कदम की मुख्य वजह बताया है। नोट में उन्होंने अपनी मौत के लिए किसी भी बाहरी व्यक्ति पर कोई आरोप नहीं लगाया है और न ही किसी को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हैंडराइटिंग मिलान और नोट की प्रामाणिकता की फोरेंसिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा।
कौन थे पूर्व आईएएस राकेश मेहता? राकेश मेहता 1975 बैच के केंद्र शासित कैडर के बेहद सम्मानित और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी थे। तीन दशकों से अधिक लंबे अपने शानदार प्रशासनिक करियर के दौरान उन्होंने दिल्ली सरकार और दिल्ली नगर निगम (MCD) में कई शीर्ष पदों पर काम किया। वह वर्ष 2007 में दिल्ली के मुख्य सचिव बने और नवंबर 2010 तक इस पद पर रहे। उनके मुख्य सचिव रहते हुए ही राजधानी दिल्ली ने ऐतिहासिक 2010 राष्ट्रमंडल खेलों (Commonwealth Games) की सफल मेजबानी की थी।
दिल्ली के आधुनिक स्वरूप और बुनियादी ढांचे के रहे शिल्पकार दिवंगत राकेश मेहता को राजधानी के बुनियादी ढांचे, बिजली और सार्वजनिक परिवहन के आधुनिकीकरण का प्रमुख शिल्पकार माना जाता है। पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के कार्यकाल में उन्होंने बिजली क्षेत्र में निजीकरण और ऐतिहासिक सुधारों को सफलतापूर्वक लागू किया। इसके अलावा संपत्ति कर व्यवस्था (यूनिट एरिया सिस्टम) को पारदर्शी बनाने और दिल्ली की सड़कों से जानलेवा साबित हो रही ब्लू लाइन बसों को हटाकर आधुनिक लो-फ्लोर डीटीसी बसें शुरू कराने की योजना का श्रेय भी उन्हें ही जाता है। दिल्ली नगर निगम के आयुक्त के रूप में भी उनके फैसलों को हमेशा याद किया जाता रहा है।
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