Monday , 14 September 2026

उत्तराखंड में ‘सिस्टम’ ने ली 3 जानें: रेफर-रेफर के खेल में गर्भवती मां और जुड़वां बच्चों की मौत, अस्पतालों के चक्कर काटते रहे बेबस परिजन !

अल्मोड़ा ब्यूरो। उत्तराखंड के पर्वतीय अंचलों में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली ने एक बार फिर एक हंसते-खेलते परिवार की दुनिया उजाड़ दी है। सल्ट ब्लॉक के इनोलू गांव से सामने आए एक बेहद दर्दनाक मामले में समय पर समुचित इलाज और बुनियादी सुविधाएं न मिलने के कारण एक 24 वर्षीय गर्भवती महिला और उसके गर्भ में पल रहे दो मासूम जुड़वां बच्चों ने दम तोड़ दिया। इस रूह कंपा देने वाली त्रासदी ने पहाड़ पर ‘बेहतर और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं’ के सरकारी दावों की जमीनी हकीकत को तार-तार कर दिया है।

सांस की तकलीफ से शुरू हुआ भटकाव, रामनगर से हल्द्वानी तक सिर्फ रेफर प्राप्त जानकारी के मुताबिक, इनोलू गांव की रहने वाली निशा (24) की तबीयत अचानक बिगड़ गई और उन्हें सांस लेने में तेज तकलीफ होने लगी। गंभीर स्थिति को देखते हुए घबराए परिजन तुरंत उन्हें नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाने की जगह सीधे रामनगर अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां बुनियादी मेडिकल सुविधाओं और संसाधनों के अभाव का हवाला देते हुए चिकित्सकों ने मरीज को हायर सेंटर हल्द्वानी रेफर कर दिया। इसके बाद शुरू हुआ जिंदगी बचाने के लिए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक की चौखट नापने का दर्दनाक सिलसिला। बेबस तीमारदार निशा को लेकर हल्द्वानी और काशीपुर के कई सरकारी व निजी अस्पतालों के चक्कर काटते रहे, लेकिन हर जगह से केवल टालमटोल और निराशा ही हाथ लगी।

अस्पताल की दहलीज पर उजड़ी दुनिया, एक साथ बुझ गए तीन चिराग घंटों तक चले इलाज की जद्दोजहद और दर-दर भटकने के बाद, परिजन गंभीर हालत में निशा को काशीपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराने पहुंचे। डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया, लेकिन तब तक संक्रमण और सांस की समस्या के चलते निशा की हालत नाजुक हो चुकी थी। इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। इसके बाद डॉक्टरों ने आनन-फानन में सिजेरियन ऑपरेशन कर गर्भ में पल रहे जुड़वां बच्चों को बाहर निकाला, लेकिन तब तक एक नवजात की धड़कनें शांत हो चुकी थीं। दूसरे बच्चे को बचाने का भरसक प्रयास किया गया, लेकिन कुछ ही घंटों में उसने भी दम तोड़ दिया। एक साथ तीन मौतों से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

‘सड़ चुकी है स्वास्थ्य व्यवस्था’, फूट-फूट कर रोए ससुर मृतका निशा के ससुर राजू टम्टा ने इस दर्दनाक हादसे के लिए सीधे तौर पर स्वास्थ्य महकमे की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है। आंखों में आंसू लिए उन्होंने कहा कि यदि समय रहते सही अस्पताल और वेंटिलेटर या ऑक्सीजन युक्त समुचित उपचार मिल जाता, तो आज उनका भरा-पूरा परिवार बिखरने से बच जाता। उन्होंने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में स्वास्थ्य तंत्र पूरी तरह चरमरा चुका है और भ्रष्टाचार व लापरवाही के चलते आम और गरीब जनता को अपनी जान गंवाकर इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ रही है।

 

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