
नई दिल्ली। नेपाल में हाल ही में आई भीषण जल त्रासदी ने अब भारतीय हिमालयी क्षेत्रों के लिए भी खतरे का बड़ा सायरन बजा दिया है। उत्तराखंड के ऊंचे पहाड़ों में प्राकृतिक रूप से बनीं 13 ग्लेशियर झीलें इस वक्त ‘जलबम’ का रूप ले चुकी हैं, जो कभी भी फट सकती हैं। यदि इनमें से किसी भी झील का प्राकृतिक तटबंध टूटा, तो चमोली, उत्तरकाशी, ऋषिकेश और हरिद्वार तक भारी जल प्रलय आ सकती है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) और वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान की संयुक्त रिपोर्ट में इस बड़े खतरे को लेकर सरकारों को आगाह किया गया है।
अनियोजित निर्माण और सुरंगों से कमजोर हो रहे संवेदनशील पहाड़
एनडीएमए और वाडिया संस्थान की रिपोर्ट में चिंता जताई गई है कि पहाड़ों में बिना ठोस योजना के हो रहे सुरंग निर्माण, सड़कों के चौड़ीकरण, हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स और भारी अनियंत्रित खनन ने हिमालय के नाजुक इकोसिस्टम को अत्यधिक कमजोर कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पहाड़ों पर बढ़ते इस मानवीय और बुनियादी ढांचे के दबाव के कारण उच्च हिमालयी क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं की तीव्रता और आवृत्ति दोनों बढ़ गई हैं।
ये 5 झीलें सबसे ज्यादा खतरनाक, चमोली और पिथौरागढ़ पर सीधा संकट
अध्ययन में उत्तराखंड की 13 अति-संवेदनशील ग्लेशियर झीलों में से पांच को ‘अत्यधिक जोखिम’ (High Risk) की श्रेणी में रखा गया है:
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वसुधारा ताल (चमोली)
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अनाम उच्च-जोखिम झील (जोशीमठ क्षेत्र, चमोली)
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सयांत्यांकती झील (दारमा और कुटियांगली घाटी, पिथौरागढ़)
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माबोंग झील (लासरयांगती घाटी, पिथौरागढ़)
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प्युंगरू झील (चीन सीमा से सटा संवेदनशील ग्लेशियर क्षेत्र, पिथौरागढ़)
इसके अलावा, चमोली जिले की सरस्वती ताल और उत्तरकाशी की केदारताल को भी भारी जोखिम वाली श्रेणी में चिह्नित किया गया है।
ग्लेशियर झील फटने (GLOF) पर मचेगी भारी तबाही: अलकनंदा से भागीरथी तक अलर्ट
वैज्ञानिकों का आकलन है कि यदि ये झीलें टूटती हैं (ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड – GLOF), तो नदियों के बहाव क्षेत्र में बसे शहरों और ढांचों को भारी नुकसान होगा:
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अलकनंदा घाटी: जोशीमठ, तपोवन, रैणी, कर्णप्रयाग, नंदप्रयाग और चमोली शहर के निचले इलाकों में तीव्र कटाव और अचानक बाढ़ का खतरा रहेगा।
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भागीरथी घाटी: गंगोत्री और केदारताल क्षेत्र में हलचल से भागीरथी का जलस्तर उफान पर आ सकता है, जिससे हर्षिल, झाला, मनेरी और उत्तरकाशी शहर सीधे प्रभावित होंगे।
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ऋषिकेश और हरिद्वार: ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट, चंद्रभागा तटीय क्षेत्र, नाव घाट, राम झूला-लक्ष्मण झूला के तटीय बाजार और आश्रम जलमग्न हो सकते हैं। हरिद्वार में हर की पौड़ी, कांगड़ा घाट और चंडी घाट के डूबने का गंभीर खतरा है।
एनडीएमए की सिफारिशें और सीएम धामी का एक्शन प्लान
खतरे को देखते हुए एनडीएमए ने संवेदनशील झीलों पर स्वचालित मौसम केंद्र (AWS), वाटर-लेवल सेंसर लगाने और संवेदनशील पर्यटन मार्गों की ‘कैरिंग कैपेसिटी’ (वहन क्षमता) तय करने की सिफारिश की है।
नेपाल के हालात से सबक लेते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उच्चस्तरीय बैठक कर तत्काल कदम उठाने के आदेश दिए हैं। सीएम ने वैज्ञानिकों के दलों को सरस्वती ताल और केदारताल के तत्काल ऑन-ग्राउंड सर्वे के लिए रवाना किया है। साथ ही, इन झीलों पर अर्ली वार्निंग सैटेलाइट सायरन सिस्टम लगाने और साइफनिंग के जरिए झीलों के पानी को धीरे-धीरे निकालकर प्राकृतिक दबाव कम करने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया गया है।
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