Sunday , 6 September 2026

इंग्लैंड दौरे पर बवाल: तीसरे टेस्ट से पहले PCB ने जब्त किए पाकिस्तानी खिलाड़ियों के मोबाइल, फिक्सिंग का डर या कुछ और?

पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के इंग्लैंड दौरे से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने क्रिकेट जगत में खलबली मचा दी है। एजबेस्टन में खेले जाने वाले तीसरे और निर्णायक टेस्ट मैच से ठीक पहले पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) ने अपनी ही टीम के कई प्रमुख खिलाड़ियों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए हैं। जानकारी के अनुसार, ये सभी फोन तीसरा टेस्ट मैच समाप्त होने तक बोर्ड के नियंत्रण में ही रहेंगे। हालांकि, पीसीबी ने अब तक यह सार्वजनिक नहीं किया है कि किन-किन खिलाड़ियों के डिवाइस लिए गए हैं और इस अप्रत्याशित कदम के पीछे की असल वजह क्या है।

365 न्यूज का सनसनीखेज दावा, मैच फिक्सिंग की आशंका पर गहराया सस्पेंस

पाकिस्तानी न्यूज चैनल ‘365 न्यूज’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, टीम के कुछ सदस्यों के फोन बोर्ड अधिकारियों को सौंपे जा चुके हैं। इस पूरे घटनाक्रम पर पीसीबी की रहस्यमयी चुप्पी ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बोर्ड ने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि यह कार्रवाई किसी रूटीन टीम प्रोटोकॉल का हिस्सा है, अनुशासनात्मक कार्रवाई है या फिर इसके पीछे मैच फिक्सिंग और स्पॉट फिक्सिंग जैसे काले साए का डर है। अचानक लिए गए इस फैसले के बाद खिलाड़ियों के निजता के अधिकार को लेकर भी बहस छिड़ गई है कि आखिर कोई बोर्ड कितने समय तक और किन परिस्थितियों में किसी खिलाड़ी के पर्सनल गैजेट्स अपने पास रख सकता है।

ICC की सख्त गाइडलाइंस: मैच के दौरान फोन बैन, लेकिन क्या बोर्ड कई दिन तक रख सकता है फोन?

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के कड़े नियमों के अनुसार, मैच के दौरान ड्रेसिंग रूम और प्रतिबंधित क्षेत्रों (PMOA) में खिलाड़ियों व सपोर्ट स्टाफ द्वारा किसी भी तरह के कम्युनिकेशन डिवाइस के इस्तेमाल पर पूरी तरह पाबंदी होती है। खेल की अखंडता और अनधिकृत संपर्क को रोकने के लिए मैच शुरू होने से पहले ही फोन जमा करा लिए जाते हैं। हालांकि, मैच के कुछ घंटों के दौरान डिवाइस जमा करने और किसी बोर्ड द्वारा टेस्ट खत्म होने तक कई दिनों के लिए निजी मोबाइल फोन जब्त करने में जमीन-आसमान का अंतर है।

एंटी करप्शन कोड के तहत जांच का दायरा, क्या पीसीबी के पास है ऐसा अधिकार?

आईसीसी के एंटी करप्शन कोड के तहत इंटीग्रिटी जांच के दौरान अधिकृत जांच अधिकारियों को खिलाड़ियों के फोन से जुड़े डेटा की मांग करने का व्यापक अधिकार हासिल है। यदि जांचकर्ताओं के पास पुख्ता आधार हो, तो वे कॉल रिकॉर्ड, इंटरनेट हिस्ट्री, वॉट्सऐप चैट, मैसेज, फोटो, वीडियो, ऑडियो और पासवर्ड तक की मांग कर सकते हैं। खिलाड़ी द्वारा यह जानकारी न देने पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई का नियम है। हालांकि, मौजूदा मामले में न तो पीसीबी ने किसी औपचारिक जांच की पुष्टि की है और न ही किसी खिलाड़ी पर भ्रष्टाचार, सट्टेबाजी या फिक्सिंग का कोई आरोप लगा है। ऐसे में आईसीसी नियमों और बोर्ड के आंतरिक कॉन्ट्रैक्ट के बीच खींचतान साफ नजर आ रही है, क्योंकि पीसीबी ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि खिलाड़ियों की प्राइवेसी पर यह कड़ा पहरा किस नियम के तहत लगाया गया है।

 

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