Sunday , 27 September 2026

आसमान से दिखा कुदरत का अजब खेल: ISRO के INSAT-3DS ने खींची तस्वीर, दो हिस्सों में बंटा दिखा भारत का मौसम

नई दिल्ली।  भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अत्याधुनिक मौसम उपग्रह ‘इनसेट-3डीएस’ (INSAT-3DS) ने अंतरिक्ष से भारत के ऊपर वायुमंडलीय हलचल का एक हैरान कर देने वाला और दुर्लभ नजारा कैमरे में कैद किया है। शुक्रवार को सैटेलाइट द्वारा ली गई इस तस्वीर में पूरा भारतीय उपमहाद्वीप मौसम के मिजाज के लिहाज से साफ तौर पर दो धुर विरोधी हिस्सों में बंटा हुआ नजर आ रहा है। जहां देश का एक बड़ा हिस्सा घने, चमकदार बादलों के आगोश में लिपटा है, वहीं दूसरा सिरा पूरी तरह साफ और बादलों से मुक्त दिखाई दे रहा है।

तस्वीर में भारतीय उपमहाद्वीप के ऊपर मौसमी परिस्थितियों का यह नाटकीय अंतर बेहद स्पष्ट है। इसमें पूर्वी भारत, बंगाल की खाड़ी और उससे सटे समुद्री व तटीय इलाकों में बादलों का एक विशाल और सघन जमावड़ा देखा जा सकता है, जो उपमहाद्वीप के नक्शे को बीच से बांटता हुआ प्रतीत होता है।

थर्मल इन्फ्रारेड चैनल से सामने आया बादलों का चक्रव्यूह

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इनसेट-3डीएस के 10.83 माइक्रोमीटर वेवलेंथ वाले अत्याधुनिक थर्मल इन्फ्रारेड चैनल का इस्तेमाल करके यह तस्वीर ली गई है। यह तकनीक भारत और पड़ोसी देशों के ऊपर फैले बादलों के घनत्व और फैलाव को सटीक रूप से उजागर करती है।

तस्वीर में सबसे प्रमुख आकर्षण बादलों का वह विशाल और चमकीला समूह है, जो बंगाल की खाड़ी से शुरू होकर पूरे पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के आसमान पर छाया हुआ है। इसके साथ ही दक्षिणी प्रायद्वीप और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में भी बादलों की चौड़ी पट्टियां स्पष्ट नजर आ रही हैं। इसके बिल्कुल उलट, पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी भारत का अधिकांश भूभाग पूरी तरह बादलों से खाली और साफ दिख रहा है, जिससे दोनों भौगोलिक क्षेत्रों के बीच एक स्पष्ट विभाजन रेखा खिंची नजर आती है।

मॉनसून की विदाई और मौसमी सिस्टम का मिलाजुला असर

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यह दृश्य उस दौर की स्थिति को बयां करता है जब दक्षिण-पश्चिम मॉनसून देश के कई हिस्सों से लौटने (Monsoon Withdrawal) की प्रक्रिया में है, जबकि अलग-अलग वायुमंडलीय सिस्टम विभिन्न इलाकों में सक्रिय बने हुए हैं।

पूर्वी भारत और बंगाल की खाड़ी में बने इस घने चक्रव्यूह की मुख्य वजह समुद्र से उठने वाली नमी युक्त मानसूनी हवाएं, कम दबाव का क्षेत्र (Low Pressure Area) और अन्य मौसमी हलचलें हो सकती हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि महज एक सैटेलाइट फ्रेम से यह तय नहीं किया जा सकता कि इस सटीक पैटर्न के पीछे कौन सा विशिष्ट मौसमी सिस्टम पूरी तरह जिम्मेदार है।

रात में भी बादलों की टोह लेने में माहिर है INSAT-3DS

इनसेट-3डीएस भारत के उन्नत मौसम उपग्रह कार्यक्रम की रीढ़ है। यह उपग्रह पृथ्वी के वायुमंडल में बादलों की गति, तापमान, नमी और पवन प्रोफाइल जैसे अहम मानकों की सटीक जानकारी रियल-टाइम में उपलब्ध कराता है।

इस सैटेलाइट में लगा थर्मल इन्फ्रारेड उपकरण पृथ्वी और वायुमंडल से उत्सर्जित होने वाले रेडिएशन को पकड़ता है, जिसकी बदौलत मौसम वैज्ञानिक घुप अंधेरे और रात के वक्त भी बादलों के बदलते पैटर्न और चक्रवाती गतिविधियों पर पैनी नजर रखने में सक्षम होते हैं। यह तस्वीर साफ दर्शाती है कि भारतीय उपमहाद्वीप में वायुमंडलीय बदलाव कितनी तेजी से मौसम को एक ही समय में दो अलग-अलग छोरों पर खड़ा कर सकते हैं।

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