बीजिंग। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने ऐतिहासिक दो दिवसीय दौरे पर चीन की राजधानी बीजिंग पहुंच चुके हैं। ‘एयर फोर्स वन’ के लैंड होते ही बीजिंग के कैपिटल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उनका भव्य स्वागत किया गया। हालांकि, इस दौरे ने एक पुरानी चर्चा को फिर से हवा दे दी है कि आखिर राष्ट्रपति शी जिनपिंग खुद ट्रंप को रिसीव करने एयरपोर्ट क्यों नहीं पहुंचे? क्या यह कोई कूटनीतिक संदेश है या फिर इसके पीछे चीन का कोई पुराना नियम है?
प्रोटोकॉल का पेंच: ओबामा के वक्त जिनपिंग क्यों गए थे?
सोशल मीडिया पर अक्सर यह सवाल उठता है कि जब पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा चीन आए थे, तब शी जिनपिंग उन्हें रिसीव करने एयरपोर्ट पहुंचे थे, तो फिर ट्रंप के लिए ऐसा क्यों नहीं? इसका जवाब चीन के सख्त डिप्लोमैटिक प्रोटोकॉल में छिपा है।
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नियम क्या है? चीन के प्रोटोकॉल के मुताबिक, वहां के राष्ट्रपति कभी भी किसी विदेशी मेहमान के स्वागत के लिए एयरपोर्ट नहीं जाते। मेहमानों की अगवानी का जिम्मा हमेशा उपराष्ट्रपति का होता है।
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ओबामा वाला सच: जब बराक ओबामा चीन पहुंचे थे, तब शी जिनपिंग खुद चीन के उपराष्ट्रपति थे। प्रोटोकॉल के तहत उस समय यह उनकी जिम्मेदारी थी, इसलिए वे एयरपोर्ट गए थे। आज वे राष्ट्रपति हैं, इसलिए नियम के मुताबिक वे एयरपोर्ट नहीं जा सकते।
ट्रंप के लिए तोड़ा गया नियम: मिला ‘दुर्लभ सम्मान’
भले ही शी जिनपिंग एयरपोर्ट नहीं आए, लेकिन उन्होंने ट्रंप के लिए एक बड़ा अपवाद जरूर किया है। आमतौर पर विदेशी नेताओं (जैसे व्लादिमीर पुतिन) का स्वागत ‘स्टेट काउंसलर’ करते हैं, लेकिन ट्रंप के लिए चीन ने अपने उपराष्ट्रपति हान झेंग को भेजा। विशेषज्ञों के मुताबिक, उपराष्ट्रपति को भेजकर चीन ने यह संदेश दिया है कि वह ट्रंप के इस दौरे को कितनी अधिक अहमियत दे रहा है।
एजेंडे में क्या है? व्यापार युद्ध और ईरान संकट
ट्रंप का यह दौरा केवल औपचारिकताओं तक सीमित नहीं है। बीजिंग में होने वाली इस हाई-प्रोफाइल मीटिंग के तीन मुख्य केंद्र बिंदु हैं:
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बोर्ड ऑफ ट्रेड: ट्रंप प्रशासन चीन के साथ एक स्थायी ‘बोर्ड ऑफ ट्रेड’ बनाना चाहता है ताकि भविष्य में व्यापार युद्ध की नौबत न आए और टैरिफ से जुड़े विवादों को बातचीत से सुलझाया जा सके।
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ईरान युद्ध और तेल संकट: ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के बंद होने से दुनिया भर में ऊर्जा संकट गहरा गया है। हालांकि ट्रंप ने कहा है कि ईरान उनके नियंत्रण में है, लेकिन वैश्विक बाजार की नजर इस पर है कि चीन इस युद्ध को रोकने में क्या भूमिका निभाता है।
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ताइवान और हथियार: ताइवान को अमेरिकी हथियारों की बिक्री को लेकर चीन पहले ही ‘रेड लाइन’ खींच चुका है। ट्रंप इस $11 बिलियन के हथियार सौदे पर शी जिनपिंग के सामने अमेरिका का पक्ष रखेंगे।
300 युवा और मिलिट्री बैंड: बीजिंग में भव्य तैयारी
एयरपोर्ट पर ट्रंप के स्वागत के लिए 300 चीनी युवाओं ने झंडे लहराकर “वेलकम-वेलकम” के नारे लगाए। सैन्य सम्मान गार्ड और मिलिट्री बैंड की मौजूदगी ने इस दौरे को और भी खास बना दिया। अब पूरी दुनिया की नजरें गुरुवार को होने वाली उस शिखर वार्ता पर टिकी हैं, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था और शांति की नई इबारत लिख सकती है।
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