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विजय का ‘राजतिलक’ तो हो गया, पर डगर है कठिन: क्या थलपति के इन वादों से तमिलनाडु का खजाना हो जाएगा खाली? जानें कितनी बड़ी हैं चुनौतियां

चेन्नई: अभिनय की दुनिया के ‘बेताज बादशाह’ थलपति विजय अब तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बन चुके हैं। चेन्नई के नेहरू स्टेडियम में आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह के बाद विजय ने राज्य की कमान संभाल ली है। 234 में से 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने वाली ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) के लिए यह सफर आसान नहीं था। चार बार राज्यपाल से मुलाकात और गठबंधन की लंबी खींचतान के बाद विजय आखिरकार सीएम की कुर्सी तक पहुंचे हैं, लेकिन अब उनके सामने वह चुनौतियां हैं जो किसी फिल्म के विलेन से कहीं अधिक घातक साबित हो सकती हैं।

बहुमत का ‘जादुई’ खेल और राज्यपाल की सख्त शर्त

विजय के पास तकनीकी रूप से 107 विधायक थे (चूंकि उन्होंने दो सीटों से जीत हासिल की थी)। कांग्रेस के 5 विधायकों के साथ आंकड़ा 112 पहुंचा, लेकिन राज्यपाल आर.वी. आर्लेकर ने स्पष्ट कर दिया था कि जब तक 118 विधायकों का लिखित समर्थन पत्र नहीं मिलता, शपथ ग्रहण संभव नहीं होगा। आखिरकार भाकपा, माकपा, वीसीके और आईयूएमएल के कुल 121 विधायकों के समर्थन ने विजय की नैया पार लगाई। अब उन्हें 13 मई तक विधानसभा में अपना बहुमत साबित करना होगा।

गठबंधन की गांठ और ‘मजबूत’ विपक्ष से मुकाबला

विजय के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने ही साथियों को साथ लेकर चलना है। कांग्रेस, वामपंथी और अन्य छोटे दलों के बीच मंत्रालयों का बंटवारा और वैचारिक संतुलन बनाए रखना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगा। वहीं, दूसरी ओर एम.के. स्टालिन की डीएमके (59 सीटें) एक अत्यंत आक्रामक और अनुभवी विपक्ष के रूप में तैयार खड़ी है। विजय को अब ‘हीरो’ की छवि से बाहर निकलकर खुद को एक परिपक्व ‘प्रशासक’ के रूप में साबित करना होगा।

वादों का वो भारी बोझ: 1 लाख करोड़ का आएगा खर्च!

विजय ने चुनावी घोषणा पत्र में जनता से उम्मीदों के ऐसे पहाड़ बांध दिए हैं, जिन्हें पूरा करना आसान नहीं होगा। उनके वादों की फेहरिस्त कुछ इस प्रकार है:

  • महिलाओं को सहारा: 1.57 करोड़ महिलाओं को हर महीने ₹2,500 की आर्थिक मदद।

  • किसानों और श्रमिकों को लाभ: 79.4 लाख किसानों को सालाना ₹15,000 और कृषि श्रमिकों को ₹10,000 की सहायता।

  • मुफ्त सिलेंडर: 1.85 करोड़ परिवारों को साल में 6 मुफ्त एलपीजी सिलेंडर।

  • शिक्षा और बेरोजगारी: स्कूल जाने वाले बच्चों के अभिभावकों को ₹15,000 की सब्सिडी और बेरोजगार युवाओं को ₹4,000 मासिक भत्ता।

क्या दिवालिया हो जाएगा तमिलनाडु का बजट?

आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, विजय के इन वादों को पूरा करने के लिए राज्य सरकार पर सालाना लगभग ₹1 लाख करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। यह एम.के. स्टालिन सरकार द्वारा 2025-26 में खर्च किए गए ₹65,000 करोड़ से करीब 52% अधिक है। तमिलनाडु का कुल राजस्व अनुमान ₹3.31 लाख करोड़ है, जिसका लगभग 30% हिस्सा सिर्फ कल्याणकारी योजनाओं में चला जाएगा। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या विजय विकास कार्यों के लिए फंड जुटा पाएंगे या कर्ज का पहाड़ राज्य को संकट में डाल देगा?

तमिलनाडु की जनता ने थलपति पर भरोसा तो जताया है, लेकिन आने वाले 5 साल यह तय करेंगे कि उनकी ‘सियासी फिल्म’ सुपरहिट होगी या बजट के बोझ तले दब जाएगी।

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