पुणे/दिल्ली। भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने सीमा पार के दुश्मनों को बेहद कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। पुणे के खड़कवासला स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) की 150वीं पासिंग आउट परेड में शामिल हुए सेना प्रमुख ने साफ कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, बल्कि फिलहाल केवल एक संघर्ष विराम (सीजफायर) जैसी स्थिति है। उन्होंने हुंकार भरते हुए कहा कि अगर देश की सुरक्षा के लिए दोबारा जरूरत पड़ी, तो हमारी तीनों सेनाएं ‘ऑपरेशन सिंदूर 2.0’ के लिए पूरी तरह मुस्तैद और तैयार हैं।
रिव्यूइंग ऑफिसर के तौर पर 355 कैडेट अफसरों की पासिंग आउट परेड की सलामी लेने के बाद सेना प्रमुख ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने एक ऐसा बेंचमार्क (मानक) सेट कर दिया है, जो यह दिखाता है कि भारत किसी भी दुस्साहस या उकसावे का किस तरह मुंहतोड़ जवाब देता है। उन्होंने युवा कैडेट्स को सीख दी कि वे अपने करियर की शुरुआत से ही इस शौर्य के मानक को बनाए रखें।
आसमान में लड़ाकू विमानों का गर्जन और जांबाज कैडेट्स का मार्च पास्ट
राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के गौरवमयी इतिहास की इस 150वीं पासिंग आउट परेड के दौरान नवनियुक्त कैडेट्स ने शानदार मार्च पास्ट कर अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। इस ऐतिहासिक मौके पर आसमान में भारतीय वायुसेना और थल सेना के जांबाज विंग्स ने आसमान में अपनी कलाबाजियां दिखाईं। फ्लाईपास्ट के दौरान सुखोई (Su-30 MKI) लड़ाकू विमानों, चेतक हेलिकॉप्टरों और प्रसिद्ध ‘सारंग हेलिकॉप्टर एरोबेटिक्स टीम’ ने आसमान में हैरतअंगेज करतब दिखाए। इसके साथ ही ‘आकाशगंगा स्काईडाइविंग टीम’ के पैराट्रूपर्स ने आसमान से छलांग लगाकर परेड ग्राउंड में मौजूद दर्शकों को रोमांचित कर दिया।
मॉडन वॉरफेयर पूरी तरह पारदर्शी, हर सैनिक के हाथ में हो ‘बाज’
परेड को संबोधित करते हुए जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने युवा सैन्य अधिकारियों को आधुनिक युद्ध नीति (Modern Warfare) और भविष्य की चुनौतियों को लेकर 5 मूल मंत्र दिए:
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24 घंटे चौकसी: आज के दौर में युद्ध पूरी तरह पारदर्शी हो चुका है, जहां 24 घंटे हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर तकनीक के जरिए नजर रखी जाती है। ऐसे में बॉर्डर एरिया में सैनिकों की तैनाती और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर हमें अत्यधिक सतर्क रहना होगा।
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इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर पर भरोसा: जीत हमेशा जमीन पर बाद में, पहले इंसान के दिमाग में होती है। सूचना का युद्ध (Information Warfare) तभी सफल होता है जब पूरा देश और उसकी संस्थाएं एक-दूसरे पर अटूट विश्वास करें।
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका: युद्ध की तेज गति के बीच सही समय पर सटीक फैसले लेने के लिए हमें ऑटोमेशन और एआई (AI) जैसी तकनीकों का ज्यादा से ज्यादा सहारा लेना होगा।
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मल्टी डोमेन वॉरफेयर: भविष्य की लड़ाइयां केवल पारंपरिक (जमीन-आसमान) तरीके से नहीं होंगी। अब यह मल्टी डोमेन मुकाबला होगा, जिसमें अंतरिक्ष (Space), साइबर, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक और कॉग्निटिव (मस्तिष्क) क्षेत्र भी शामिल हैं।
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ईगल ऑन द आर्म (Eagle on the Arm): सेना प्रमुख ने पद संभालने के बाद से ही इस बात पर जोर दिया है कि देश के हर सैनिक के हाथ में एक ‘बाज’ होना चाहिए। इसका सीधा मतलब यह है कि हमारी सेना के हर जवान के भीतर ड्रोन उड़ाने और उसे ऑपरेट करने की बेहतरीन काबिलियत होनी चाहिए, जिसकी ट्रेनिंग हमारी अकादमियों में तेजी से चल रही है।
अगले 2 से 3 साल में लागू हो सकती है ‘थिएटर कमांड व्यवस्था’
भारतीय रक्षा तंत्र में होने वाले अब तक के सबसे बड़े सुधार यानी ‘थिएटर कमांड’ पर बोलते हुए सेना प्रमुख ने एक अहम जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि थिएटराइजेशन की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है और इसकी पूरी विस्तृत रिपोर्ट रक्षा मंत्री को सौंप दी गई है, जिसका विभिन्न स्तरों पर रिव्यू किया जा रहा है।
इस नई व्यवस्था के तहत थलसेना, नौसेना और वायुसेना के चीफ अपनी-अपनी सेनाओं की लॉजिस्टिक्स, तैयारी और संसाधनों की जिम्मेदारी संभालेंगे, जबकि ‘थिएटर कमांडर’ सीधे तौर पर जॉइंट मिलिट्री ऑपरेशन्स (संयुक्त सैन्य अभियानों) को लीड करेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले 2 से 3 वर्षों के भीतर यह व्यवस्था जमीनी स्तर पर पूरी तरह लागू हो जाएगी। वर्तमान में भारत में तीनों सेनाओं के कुल 17 अलग-अलग कमांड हैं, जो अभियान के वक्त साथ तो आते हैं, लेकिन उनकी कमान अलग होती है। थियेटर कमांड बनने के बाद किसी विशेष मिशन या क्षेत्र के लिए एक ही कमांडर होगा।
‘डिकेड ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन’ से खुद को बदल रही भारतीय सेना
जनरल द्विवेदी ने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य को देखते हुए भारतीय सेना खुद को “डिकेड ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन” (बदलाव का दशक) पहल के तहत एक बेहद आधुनिक और तकनीक-सक्षम बल में तब्दील कर रही है। सेना के भीतर मौजूदा संसाधनों का ही सही इस्तेमाल करके फर्स्ट रेजिमेंट बटालियन, दिव्यास्त्र बैटरियां, शक्तिमान रेजिमेंट और भारत बटालियन जैसी अत्याधुनिक तकनीक-आधारित सैन्य संरचनाओं को विकसित किया जा रहा है, जिसमें देश की युवा पीढ़ी को केंद्र में रखा गया है।
क्या था ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जिसने हिला दी थी दुश्मन की नींव?
जिस ऑपरेशन सिंदूर के दूसरे वर्जन (2.0) का जिक्र सेना प्रमुख ने किया, वह भारतीय सेना की अदम्य बहादुरी की एक मिसाल है। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए एक कायरतापूर्ण आतंकी हमले (जिसमें 26 बेकसूर लोग मारे गए थे) के जवाब में भारतीय सेना ने यह बड़ी कार्रवाई की थी।
भारतीय जांबाजों ने 6-7 मई 2025 की रात को केवल 24 मिनट के एक बेहद अचूक और सीक्रेट ऑपरेशन में पीओके (PoK) के भीतर चल रहे 9 प्रमुख आतंकी लॉन्चपैड्स और ठिकानों को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया था। सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा हुआ था कि इस दौरान भारत ने पाकिस्तान के सरगोधा, नूर खान, भोलारी और सुक्कुर जैसे बड़े एयरबेसों को भी निशाना बनाकर भारी क्षति पहुंचाई थी। इस पूरे ऑपरेशन में 100 से अधिक पाकिस्तानी जवान और कई खूंखार आतंकी मारे गए थे, जिसके बाद 10 मई 2025 को दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम की घोषणा हुई थी।
राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA): दुनिया की पहली ट्राई-सर्विस मिलिट्री एकेडमी
पुणे के खड़कवासला में स्थित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) देश का सबसे प्रतिष्ठित सैन्य संस्थान है, जहां 12वीं पास करने के बाद कड़े इम्तिहान से गुजरकर आए कैडेट्स 3 साल तक थलसेना, नौसेना और वायुसेना के अफसर बनने की कंबाइंड ट्रेनिंग लेते हैं।
इसे दुनिया की पहली ‘ट्राई सर्विस’ एकेडमी होने का गौरव प्राप्त है, जहां एक समय में 2000 से ज्यादा कैडेट्स एक साथ रहते हैं। इस संस्थान की आधारशिला 6 अक्टूबर 1949 को रखी गई थी और 16 जनवरी 1955 से यहां औपचारिक रूप से ट्रेनिंग की शुरुआत हुई। साल 2021 से इस प्रतिष्ठित एकेडमी के दरवाजे महिला कैडेट्स के लिए भी खोल दिए गए हैं, जिनका पहला बैच 2022 में यहां पहुंचा। एनडीए का मुख्य प्रशासनिक भवन ‘सूडान ब्लॉक’ के नाम से जाना जाता है, जो द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सूडान के रणक्षेत्र में अदम्य साहस दिखाने वाले भारतीय सैनिकों के सम्मान में नामित किया गया था।
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