नई दिल्ली। देश में इस समय ओटीपी फ्रॉड (OTP Fraud), फर्जी निवेश स्कीम और डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) जैसे खौफनाक साइबर अपराध बेहद तेजी से पैर पसार रहे हैं। हर दिन हजारों मासूम लोग इन शातिर ठगों के जाल में फंसकर अपनी जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई गंवा बैठते हैं। इसके बाद शुरू होता है थका देने वाला वो सिलसिला, जिसमें पीड़ित को अपना ही पैसा वापस पाने के लिए बैंकों से लेकर सरकारी दफ्तरों और पुलिस थानों के चक्कर काटने पड़ते हैं।
लेकिन अब ऐसे पीड़ितों को बड़ी राहत देते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक बेहद क्रांतिकारी कदम उठाया है। सरकार ने साइबर ठगी के शिकार हुए लोगों की सहूलियत के लिए ‘मोबाइल रिस्टोरेशन मॉड्यूल’ यानी MRM Portal की शुरुआत की है। इस नए और आधुनिक पोर्टल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब पीड़ित व्यक्ति बिना किसी दफ्तर की दौड़ लगाए, घर बैठे ही ऑनलाइन माध्यम से अपने रिफंड के लिए आवेदन कर सकता है। हालांकि, इस रिफंड व्यवस्था का लाभ केवल उन्हीं सतर्क लोगों को मिल सकेगा जिन्होंने ठगी होते ही समय रहते इसकी आधिकारिक शिकायत दर्ज करा दी थी और पुलिस व बैंक की मदद से ठग के खाते में जा रही रकम को समय पर फ्रीज (Block) करवा दिया था।
आखिर क्या है मोबाइल रिस्टोरेशन मॉड्यूल (MRM)?
‘मोबाइल रिस्टोरेशन मॉड्यूल’ (Mobile Restoration Module) केंद्र सरकार की एक बेहद महत्वाकांक्षी तकनीकी पहल है, जिसे भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) द्वारा विशेष रूप से तैयार और लॉन्च किया गया है। यह मॉड्यूल पूरी तरह से ‘नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल’ के एक अभिन्न हिस्से के रूप में काम करता है। इस सिस्टम को शुरू करने का मुख्य मकसद साइबर अपराधियों के चंगुल में फंसे पीड़ितों को उनके पैसे वापस दिलाने की कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया को बेहद आसान, पारदर्शी और त्वरित बनाना है। इस पोर्टल के लाइव होने के बाद अब जनता को रिफंड की गुहार लगाने के लिए अलग-अलग विभागों और वित्तीय संस्थानों के चक्कर नहीं काटने होंगे, बल्कि वे सीधे एक ही जगह से ऑनलाइन क्लेम सेटलमेंट की अर्जी लगा सकेंगे।
इन दो शर्तों को पूरा करने वालों को ही मिलेगा रिफंड का पैसा
गृह मंत्रालय के नए नियमों के मुताबिक, MRM पोर्टल के जरिए अपना डूबा हुआ पैसा वापस पाने के लिए पीड़ितों को दो बेहद महत्वपूर्ण शर्तों को पूरा करना अनिवार्य होगा:
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त्वरित शिकायत: साइबर ठगी का शिकार होते ही पीड़ित ने बिना कोई वक्त गंवाए तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करके या फिर नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर अपनी आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई हो।
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रकम का फ्रीज होना: पीड़ित की मुस्तैदी और शिकायत के आधार पर पुलिस और संबंधित बैंक ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ठग या स्कैमर के बैंक खाते में भेजी गई उस रकम को सफलतापूर्वक फ्रीज (होल्ड) कर दिया हो।
अगर आपके मामले में ये दोनों शर्तें पूरी होती हैं, तभी आप MRM Portal पर जाकर अपने रिफंड के लिए क्लेम रिक्वेस्ट सबमिट कर सकते हैं।
पैसे की रिकवरी के लिए तय किए गए अलग-अलग नियम
सरकार ने रिफंड की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए रकम के हिसाब से कुछ अहम नियम तय किए हैं, जो इस प्रकार हैं:
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₹50,000 से कम की रकम होने पर: यदि स्कैमर के खाते में फ्रीज की गई कुल राशि 50,000 रुपये से कम है, तो पीड़ित को रिफंड पाने के लिए किसी भी तरह की एफआईआर (FIR) दर्ज कराने या अदालती आदेश (Court Order) की कोई जरूरत नहीं होगी। ऐसे मामलों में केवल शुरुआती पुलिस शिकायत के सत्यापन के आधार पर ही सीधे रिफंड जारी कर दिया जाएगा।
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टुकड़ों में बंटी रकम होने पर: यदि ठगी गई कुल रकम 50,000 रुपये से अधिक है, लेकिन वह ठगों के अलग-अलग बैंक खातों में बंटी हुई है और किसी भी एक इकलौते खाते में फ्रीज की गई राशि 50,000 रुपये से ज्यादा नहीं है, तो इस स्थिति में भी बिना एफआईआर और कोर्ट ऑर्डर के ही रिफंड मिल जाएगा।
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₹50,000 से अधिक की रकम होने पर: यदि किसी एक ही बैंक खाते के भीतर फ्रीज की गई रकम 50,000 रुपये से ज्यादा है, तो ऐसी स्थिति में रिफंड की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए पीड़ित के नाम पर बकायदा एफआईआर (FIR) दर्ज होना और सक्षम अदालत से रिफंड का कानूनी आदेश (Court Order) प्राप्त करना पूरी तरह अनिवार्य होगा।
MRM Portal पर रिफंड के लिए ऑनलाइन आवेदन करने का स्टेप-बाय-स्टेप तरीका
यदि आप सभी पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं, तो नीचे दिए गए बेहद आसान स्टेप्स को फॉलो करके अपने रिफंड के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं:
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स्टेप 1: सबसे पहले भारत सरकार के आधिकारिक MRM Portal पर जाएं और होमपेज पर दिखाई दे रहे ‘Citizen Login’ के विकल्प पर क्लिक करें।
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स्टेप 2: इसके बाद आपको वहां अपना वही मोबाइल नंबर दर्ज करना होगा, जिसका इस्तेमाल आपने नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर शुरुआती शिकायत दर्ज कराते समय किया था।
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स्टेप 3: अब आपके इस रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक वन-टाइम पासवर्ड (OTP) आएगा, उसे निर्धारित बॉक्स में भरकर सफलतापूर्वक लॉगिन करें।
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स्टेप 4: लॉगिन होते ही डैशबोर्ड पर मौजूद ‘Raise Refund Request’ (रिफंड अनुरोध दर्ज करें) के विकल्प पर जाएं और अपनी 14 अंकों वाली आधिकारिक शिकायत आईडी (Complaint ID) दर्ज करें।
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स्टेप 5: शिकायत आईडी डालते ही सिस्टम आपके केस से जुड़ी और फ्रीज की गई रकम की पूरी जानकारी स्क्रीन पर दिखा देगा। इसके बाद आपको अपने पैन कार्ड (PAN Card) की एक साफ डिजिटल कॉपी (Scanned Copy) अपलोड करनी होगी।
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स्टेप 6: अब आपको उस बैंक खाते की पूरी जानकारी जैसे- बैंक खाता संख्या (Account Number) और आईएफएससी कोड (IFSC Code) दर्ज करना होगा, जिसमें आप रिफंड का पैसा वापस पाना चाहते हैं।
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स्टेप 7: यदि आपका मामला 50,000 रुपये से अधिक की राशि का है और आपके पास अदालत का आदेश है, तो इस चरण में उस कोर्ट आदेश की डिजिटल कॉपी को भी अपलोड करें।
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स्टेप 8: अंत में स्क्रीन पर दिए गए स्व-घोषणा पत्र (Declaration Form) को ध्यान से पढ़कर अपनी सहमति दें और ‘Submit’ बटन पर क्लिक कर दें। आपकी रिफंड अर्जी संबंधित अधिकारियों के पास जांच के लिए पहुंच जाएगी।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) द्वारा जारी दिशा-निर्देशों पर आधारित है। साइबर अपराध से सुरक्षा और रिफंड की विस्तृत व नवीनतम तकनीकी नियमों की जानकारी के लिए कृपया नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल की आधिकारिक वेबसाइट का ही अवलोकन करें।
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