Friday , 11 September 2026

आसमान में बना बेहद अशुभ ‘विष योग’, इन 3 राशियों की बढ़ सकती है टेंशन; जानें क्या होता है यह और कैसे बचें

ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की चाल और उनके गोचर (राशि परिवर्तन) को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ग्रहों की यही चाल समय-समय पर कई शुभ और अशुभ योगों का निर्माण करती है। इन्हीं में से एक बेहद कष्टकारी और ज्योतिष जगत में नकारात्मक माना जाने वाला योग है—विष योग। हाल ही में 6 जुलाई 2026 की सुबह जैसे ही चंद्रमा ने मीन राशि में गोचर किया, वैसे ही इस खतरनाक विष योग का निर्माण हो चुका है। चूंकि न्याय के देवता और कर्मफल दाता शनिदेव पहले से ही मीन राशि में विराजमान हैं, ऐसे में चंद्रमा और शनि की इस युति (मिलन) ने ब्रह्मांडीय ऊर्जा में बड़ा बदलाव ला दिया है। ज्योतिष शास्त्र में विष योग को मानसिक तनाव, कार्यों में अप्रत्याशित रुकावटें और आर्थिक तंगी देने वाला माना जाता है। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर यह विष योग क्या है, इसे इतना अशुभ क्यों कहते हैं और मेष, सिंह व तुला राशि वालों के जीवन में यह क्या हलचल मचाने वाला है।

क्या होता है ज्योतिष में ‘विष योग’?

जब गोचर काल या कुंडली में चंद्रमा और शनि देव एक ही राशि में आकर संबंध बनाते हैं या युति करते हैं, तब ‘विष योग’ का निर्माण होता है। ज्योतिष में चंद्रमा को मन, भावनाओं, माता, मानसिक शांति और संवेदनशीलता का कारक माना गया है। इसके विपरीत, शनि देव को कर्म, कड़े संघर्ष, धैर्य, जिम्मेदारी, न्याय और कठिन परीक्षाओं का कारक माना जाता है। जब ये दोनों बिल्कुल विपरीत स्वभाव वाले ग्रह एक साथ आते हैं, तो व्यक्ति के मन और विचारों पर एक अनजाना दबाव बढ़ जाता है। इसके प्रभाव से जातक को असमंजस, निर्णय लेने में भ्रम, गहरे मानसिक तनाव, आत्मविश्वास में अचानक कमी या हर काम में अत्यधिक देरी जैसी विषम स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। यही वजह है कि इस योग को सामान्य तौर पर बेहद अशुभ और पीड़ादायक माना जाता है।

आखिर इसे इतना अशुभ और कष्टकारी क्यों माना जाता है?

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, चंद्रमा और शनि का मूल स्वभाव एक-दूसरे से पूरी तरह भिन्न और शत्रुवत है। चंद्रमा जहां मन को शांत, कोमल, चंचल और भावुक बनाते हैं, वहीं शनि देव व्यक्ति को जीवन के कठोर अनुभवों, कड़े अनुशासन और लंबे संघर्ष के जरिए तपाकर आगे बढ़ाते हैं। जब इन दोनों का मिलन होता है, तो कोमल मन पर शनि का सख्त पहरा लग जाता है। इसके परिणामस्वरूप व्यक्ति के भीतर दुविधा, गहरी चिंता, निराशा या अचानक भावनात्मक उतार-चढ़ाव बढ़ने लगते हैं। इस दौरान कई बार हाथ में आए काम अंतिम समय पर रुक जाते हैं, सोची गई योजनाओं में अड़चनें आती हैं और जातक छोटी-छोटी बातों को लेकर भी अवसाद या तनाव महसूस करने लगता है। हालांकि, ज्योतिषियों का कहना है कि इसका प्रभाव हर व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होता।

मेष राशि (Aries): मानसिक रूप से रहना होगा मजबूत

मेष राशि के जातकों के लिए विष योग का यह समय मानसिक रूप से थोड़ा चुनौतीपूर्ण और उतार-चढ़ाव भरा रह सकता है। इस अवधि में आपके खर्चों में अचानक भारी बढ़ोतरी होने की संभावना है, जिससे बजट बिगड़ सकता है। इसके अलावा, आपके कुछ महत्वपूर्ण काम उम्मीद के मुताबिक पूरे होने में ज्यादा समय ले सकते हैं। कार्यक्षेत्र या नौकरी में सहयोगियों के साथ तालमेल बिठाने और किसी भी तरह के विवाद से बचने के लिए आपको इस समय धैर्य बनाए रखना सबसे जरूरी होगा।

सिंह राशि (Leo): पैसों के लेन-देन में बरतनी होगी एक्स्ट्रा सावधानी

सिंह राशि के लोगों को इस खतरनाक योग के प्रभाव के दौरान निवेश और पैसों से जुड़े तमाम मामलों में अतिरिक्त सावधानी बरतने की सख्त सलाह दी जाती है। इस समय किसी भी अजनबी या करीबी पर आंख बंद करके भरोसा करना आपको बड़ा आर्थिक नुकसान पहुंचा सकता है। नौकरी हो या बिजनेस, अपने से बड़ों या सहयोगियों से बातचीत करते समय अपनी वाणी और गुस्से पर पूरा संयम रखें, अन्यथा बने-बनाए संबंध बिगड़ सकते हैं।

तुला राशि (Libra): काम का बढ़ेगा बोझ, सेहत का रखें ख्याल

तुला राशि के जातकों के लिए यह गोचर काल कार्यक्षेत्र में काम का दबाव और तनाव बढ़ाने वाला साबित हो सकता है। आपको अपनी रोजमर्रा की जिम्मेदारियां पहले की तुलना में अधिक बोझिल महसूस हो सकती हैं। काम की व्यस्तता के बीच आपको अपने स्वास्थ्य को लेकर बिल्कुल भी लापरवाही नहीं करनी चाहिए। इस समय खानपान में शुद्धता रखें, पूरी नींद लें और अपनी नियमित दिनचर्या पर विशेष ध्यान दें, ताकि शारीरिक और मानसिक व्याधियों से बचा जा सके।

विष योग के बुरे प्रभावों से बचने के लिए क्या करें?

ज्योतिषीय मान्यताओं और जानकारों के अनुसार, विष योग की इस पूरी अवधि में खुद के भीतर धैर्य और संयम बनाए रखना ही सबसे अचूक हथियार है।

  • इस दौरान किसी भी तरह के बड़े या जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय को लेने में जल्दबाजी न दिखाएं।

  • अपने भीतर क्रोध, ईर्ष्या और नकारात्मक सोच को हावी न होने दें।

  • मानसिक शांति और संतुलन बनाए रखने के लिए नियमित रूप से ध्यान (Meditation), गहरी सांस लेने के व्यायाम, प्रार्थना या किसी भी तरह की आध्यात्मिक गतिविधियों में समय बिताना आपके लिए सबसे ज्यादा लाभदायक और ढाल की तरह काम करेगा।

क्या हर इंसान पर होता है इसका एक जैसा असर?

ज्योतिष विज्ञान के अनुसार, किसी भी गोचर या ग्रह योग का प्रभाव केवल व्यक्ति की नाम राशि या चंद्र राशि के आधार पर शत-प्रतिशत तय नहीं होता है। इसके लिए व्यक्ति की वास्तविक जन्म कुंडली, उसमें ग्रहों की तात्कालिक स्थिति, वर्तमान में चल रही महादशा-अंतर्दशा और कुंडली में बन रहे अन्य शुभ-अशुभ योग भी बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यही कारण है कि हो सकता है कि किसी एक व्यक्ति पर इस विष योग का नकारात्मक प्रभाव बहुत अधिक और स्पष्ट दिखाई दे, जबकि उसी राशि के किसी दूसरे व्यक्ति पर इसका असर बेहद सामान्य या बिल्कुल न के बराबर हो।

Check Also

DILRMP 3.0: अब हर जमीन की होगी डिजिटल कुंडली, सरकार ने जारी की नई गाइडलाइन; जानें आपके लिए क्या बदलेगा

देशभर में जमीन की खरीद-बिक्री में होने वाली धोखाधड़ी, फर्जीवाड़े और बरसों पुराने मुकदमों पर …