Friday , 11 September 2026

UP Flood Alert: कहीं घट रहा गंगा का पानी तो कहीं टोंस-पांडु ने बढ़ाई धड़कनें, प्रयागराज से वाराणसी तक अलर्ट पर प्रशासन

उत्तर प्रदेश में बाढ़ और बारिश के मिजाज ने लोगों को राहत और आफत के दोराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है। पूर्वांचल के कुछ जिलों में जहां गंगा का रौद्र रूप धीरे-धीरे शांत हो रहा है, वहीं टोंस और पांडु जैसी सहायक नदियों के उफान ने ग्रामीणों और कछारी आबादी की नींद उड़ा रखी है। शुरुआती सैलाब में ही प्रदेश के पांच प्रमुख जिलों की करीब 11 हजार हेक्टेयर से अधिक उपजाऊ जमीन जलमग्न हो चुकी है, जिससे बड़े पैमाने पर फसलों को नुकसान पहुंचा है। नदियों के इस अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव को देखते हुए शासन से लेकर जिला प्रशासन तक पूरी तरह मुस्तैद है और प्रभावित क्षेत्रों पर पैनी नजर रखी जा रही है।

प्रयागराज में गंगा-यमुना की धीमी चाल, टोंस का उफान बना आफत

संगम नगरी प्रयागराज में गंगा और यमुना के जलस्तर में एक बार फिर मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है। राहत की बात यह है कि दोनों ही जीवनदायिनी नदियां खतरे के लाल निशान से फिलहाल काफी नीचे बह रही हैं और जिले के तमाम तटबंध पूरी तरह महफूज हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार छतनाग में गंगा का गेज 81.09 मीटर और नैनी में यमुना का जलस्तर 81.60 मीटर रिकॉर्ड किया गया। हालांकि, टोंस और मंदाकिनी के उफान ने कोरांव और मेजा क्षेत्र के दर्जनों गांवों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई बस्तियों और मकानों के इर्द-गिर्द पानी भरने से कछारी इलाकों में रहने वाले परिवारों में अफरा-तफरी का माहौल है। प्रशासन स्थिति पर 24 घंटे निगरानी रख रहा है।

वाराणसी के 84 घाटों पर नौका संचालन ठप, गाजीपुर में चेतावनी बिंदु से ऊपर पानी

धर्मनगरी काशी में गंगा का जलस्तर अभी भी सामान्य नहीं हो सका है। सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रशासन ने दशाश्वमेध और अस्सी समेत सभी 84 पक्के घाटों पर नावों के संचालन पर सख्त पाबंदी लगा रखी है, जिससे श्रद्धालु केवल दूर से ही मां गंगा के दर्शन कर पा रहे हैं। वहीं गाजीपुर जिले में गंगा के जलस्तर में गिरावट तो शुरू हुई है, लेकिन शाम के वक्त 62.970 मीटर दर्ज किया गया गेज अभी भी चेतावनी बिंदु (62.100 मीटर) से ऊपर बना हुआ है। गाजीपुर प्रशासन ने मोर्चा संभालते हुए अब तक 551 से अधिक बाढ़ राहत किट जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाई हैं।

कानपुर में पांडु नदी का कहर, चित्रकूट में सीएम ने संभाली कमान

कानपुर की पांडु नदी ने रिहायशी बस्तियों में भारी तबाही मचा रखी है। लगभग 500 से अधिक मकान बाढ़ के घेरे में आ चुके हैं, जिससे करीब एक हजार से ज्यादा लोग अपनी छतों और ऊपरी मंजिलों पर शरण लेने को मजबूर हैं। दूसरी ओर धर्मनगरी चित्रकूट में मची तबाही के बाद अब हालात को पटरी पर लाने की कवायद तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद बाढ़ और पुनर्वास कार्यों की उच्चस्तरीय समीक्षा की है, जिसके बाद प्रभावित 800 से ज्यादा परिवारों को तत्काल राशन और जरूरी राहत सामग्री का वितरण किया गया।

11 हजार हेक्टेयर फसलें डूबीं, यूपीएसडीएमए ने जारी किया हाई अलर्ट

बाढ़ के इस दौर में पांच जिलों के किसानों पर दोहरी मार पड़ी है। 11 हजार हेक्टेयर से ज्यादा रकबे में लहलहाती फसलें पानी में समा चुकी हैं। उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (UPSDMA) और स्थानीय प्रशासन ने साफ कर दिया है कि भले ही कुछ मुख्य धाराओं का पानी कम हो रहा हो, लेकिन सहायक नदियों के रुख को देखते हुए खतरा टला नहीं है। कछारी और निचले इलाकों में मुनादी कराकर लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर बने रहने के निर्देश दिए गए हैं।

 

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